राजनीति

खाने-पीने की राजनीति से भाजपा की तौबा

अधिकारी के वीडियो से प्रेरणा लेते हुए, सत्ताधारी पार्टी ने सुझाव दिया कि उसे शाकाहारी-मांसाहारी बहस को समाप्त कर देना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह विवाद यहीं समाप्त होना चाहिए। भाजपा ने खानपान को लोगों का व्यक्तिगत मामला बता कर मुख्यमंत्री अधिकारी के मछली खाने के विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश की है। सवाल यह है कि क्या भाजपा लोगों को अपने हिसाब से जीने का पूरा अधिकार देती है। लोग क्या खाएं, क्या पीएं, कैसे कपड़े पहनें और इससे बढक़र किसके साथ रहें या किसके साथ नहीं रहें, क्या इन सभी मामलों में भाजपा की सहमति है। दरअसल भाजपा वोट बैंक के हिसाब से मुद्दे तय करती है। मतलब जहां वोट बैंक को खुश रखना है तो लोग मांस मछली खाएं, कोई फर्क नहीं पड़ेगा, किन्तु ऐसा करने से यदि विपक्षी दलों को निशाना बनाकर वोट बटोरे जा सकते हैं, तो भाजपा चूकेगी नहीं…

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेन्दु अधिकारी के राजधानी कोलकाता स्थित सदियों पुराने कालीघाट मंदिर में मछली खाने का मुद्दा सुर्खियों में रहा। अधिकारी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट गए, जिसे शाक्त हिंदू शुभ मानते हैं। उन्होंने जमीन पर बैठकर भोग खाया, जिसमें एक विशाल मछली का सिर शामिल था, जो कालीघाट भोग की थाली का प्रतीक है। इसके अलावा, तली हुई मछली और बसंती पुलाव (पीले चावल) भी थे। इससे पहले बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेन्द्र शास्त्री, जिन्हें बागेश्वर बाबा के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा दुर्गा पूजा के दौरान बंगाली हिंदुओं से मांसाहारी भोजन का त्याग करने की अपील की थी। उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन करने वाले बंगाली हिंदुओं को पाखंडी भी कहा था। शास्त्री ने कहा- ‘मांसाहारी भोजन की बिक्री बंद करने के पक्ष में कौन है? कृपया अपने मोबाइल फोन की लाइट जलाकर यह संकेत दें। यह संदेश पश्चिम बंगाल के हर व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और सरकार को इस मुद्दे से अवगत कराया जाना चाहिए। दुर्गा पूजा के दौरान पश्चिम बंगाल में मांस और शराब की दुकानें बंद रहनी चाहिए। इस पर भाजपा के बंगाल प्रमुख सामिक भट्टाचार्य ने कहा कि बागेश्वर बाबा एक अलग ही दुनिया से आते हैं। बंगाल के लोग क्या खाएंगे, यह तय करने का बागेश्वर बाबा को कोई अधिकार नहीं है। बंगाली लोग मछली और मांस खाएंगे। विवेकानंद ने बंगालियों द्वारा मांस और मछली के सेवन के पक्ष में बात की है। उन्होंने बागेश्वर बाबा की अपील का जवाब देते हुए कहा कि वे स्वयं मंदिर गए और देवता को अर्पित किए गए प्रसाद में से मांसाहार का सेवन किया। बंगाली लोगों के नियमित आहार में मछली एक प्रमुख खाद्य पदार्थ है। भारत के पूर्वी क्षेत्रों में सांस्कृतिक और धार्मिक रीति-रिवाजों के अंतर्संबंध के कारण, इस क्षेत्र में प्रचलित शाक्त परंपराओं में मछली एक महत्वपूर्ण प्रसाद के रूप में उभर कर सामने आई है।

उदाहरण के तौर पर, कालीघाट में काली को मछली और बलि के लिए बकरी का मांस दोनों ही अर्पित किए जाते हैं। देश के इस हिस्से में सबसे बड़े त्योहार दुर्गा पूजा के दौरान भोजन मुख्य रूप से मांसाहारी होता है। इसे बुरा नहीं माना जाता, बल्कि इसका जश्न मनाया जाता है। कुछ परंपराओं में शाकाहारी भोजन के नियम कायम हैं, जबकि कुछ में अनुष्ठानों के हिस्से के रूप में देवी-देवताओं को मांसाहारी भोजन अर्पित करना अनिवार्य है। हालांकि, इस तरह की प्रथाओं को सुदूर पश्चिम या उत्तर में इतने बड़े दर्शक वर्ग नहीं मिलते हैं, यही कारण है कि इस तरह की आहार संबंधी प्राथमिकताएं जिज्ञासा जगाती रहती हैं और बहस को जन्म देती हैं। भारत एक हिंदू बहुसंख्यक देश है और भारत में शाकाहार के मुकाबले नॉनवेज खाने वाले भी बहुसंख्यक हैं। अर्थात नॉनवेज खाने वालों की संख्या ज्यादा है। 140 करोड़ की आबादी वाले भारत में 57 प्रतिशत पुरुष और 45 फीसदी महिलाएं नॉनवेज खाते हैं। ऐसे में सवाल उठाते हैं कि क्या किसी का मछली खाना राजनीतिक मुद्दा हो सकता है? क्या खाने की आदत से धर्म और इनसान पहचाना जाएगा? क्या हिंदू सिर्फ शाकाहारी होते हैं और जो नॉनवेज खा लेते हैं वो विधर्मी? अगर सावन या नवरात्रि में कोई नॉनवेज खाता है तो क्या गलत है? क्या सावन या नवरात्रि में नॉनवेज खाकर वीडियो बनाने या पोस्ट करने से दूसरों की भावना को चोट पहुंचती है और क्या सावन-नवरात्र में किसी के नॉनवेज खाने का वीडियो डालने से अल्पसंख्यक वोटर वोट दे देते हैं? दरअसल खानपान के मामले को भारतीय जनता पार्टी ने चुनावी मुद्दा बना कर कई मौकों पर भुनाने का प्रयास किया है। विशेषकर विपक्षी दलों के नेताओं के ऐसे वीडियो को खूब प्रचारित किया गया, ताकि उन्हें नॉनवेज खाना वाला साबित करके शाकाहारी भोजन वाले मतदाताओं को आकर्षित किया जा सके। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 12 अप्रैल 2024 को जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए मंच से बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर त्योहारों के समय पर नॉनवेज खाने वाले वीडियो को लेकर जमकर हमला बोला था।

पीएम मोदी ने कहा था कि आरजेडी नेता लालू यादव, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के त्योहारों के समय नॉनवेज खाने वाले वीडियो पर निशाना साधते हुए इनका नाम लिए बगैर कहा था कि सावन के महीने में एक सजायाफ्ता मुजरिम अर्थात लालू यादव के घर जाकर वो मटन बना रहे थे। ये लोग ऐसा जानबूझकर ऐसा करते हैं, ताकि देश की मान्यताओं पर हमला हो। उन्होंने कहा- कानून और मोदी किसी को कुछ भी खाने से नहीं रोकते हैं। सबको स्वतंत्रता है कि जब मन करे वेज और नॉनवेज खाएं। लेकिन इन लोगों की मंशा ऐसा वीडियो बनाकर देश के लोगों को चिढ़ाने की होती है। त्यौहार के सीजन में मुख्यमंत्री अधिकारी के मछली का बड़ा सिर खाए जाने पर न तो भाजपा ने कोई आपत्ति की और न ही पीएम मोदी ने। मतलब तेजस्वी यादव, लालू यादव और राहुल गांधी ने नॉनवेज खाया तो पीएम मोदी ने इसे चुनावी मुद्दा बनाते हुए एक तरह से हिन्दुओं की भावनाओं के खिलाफ करार दिया, किन्तु अपनी ही पार्टी के मुख्यमंत्री ने अब जब मंदिर में जाकर मछली का सिर खाया तो भाजपा बचाव में उतर आई।

उत्तरी राज्यों से शाकाहारी खानपान की आदतों को मांसाहारी बंगाल में लाने के लिए अक्सर आलोचनाओं का सामना करने वाली भाजपा ने बार-बार ऐसे दावों को खारिज किया है। अधिकारी के वीडियो से प्रेरणा लेते हुए, सत्ताधारी पार्टी ने सुझाव दिया कि उसे शाकाहारी-मांसाहारी बहस को समाप्त कर देना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि यह विवाद यहीं समाप्त होना चाहिए। भाजपा ने खानपान को लोगों का व्यक्तिगत मामला बता कर मुख्यमंत्री अधिकारी के मछली खाने के विवाद से पीछा छुड़ाने की कोशिश की है। सवाल यह है कि क्या भाजपा लोगों को अपने हिसाब से जीने का पूरा अधिकार देती है। लोग क्या खाएं, क्या पीएं, कैसे कपड़े पहनें और इससे बढक़र किसके साथ रहें या किसके साथ नहीं रहें, क्या इन सभी मामलों में भाजपा की सहमति है। दरअसल भाजपा वोट बैंक के हिसाब से मुद्दे तय करती है। मतलब जहां वोट बैंक को खुश रखना है तो लोग मांस मछली खाएं, कोई फर्क नहीं पड़ेगा, किन्तु ऐसा करने से यदि विपक्षी दलों को निशाना बनाकर वोट बटोरे जा सकते हैं, तो भाजपा चूकेगी नहीं। पीएम मोदी का लोकसभा चुनाव के दौरान लालू यादव, तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर किया गया तंज इसका उदाहरण है।-योगेंद्र योगी

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