2027 में BJP को होगा नुकसान, अगर… संजय निषाद का इंटरव्यू, गठबंधन तोड़ने के सवाल पर चुप हुए मंत्री

लखनऊः उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार बीजेपी के सामने सहयोगी दलों को लामबंद करके रखना भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है. क्योंकि सीट बंटवारे से लेकर उनकी मांगों तक को पूरा करना काफी मुश्किल हो सकता है. इस बीच निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद ने बड़ा ऐलान कर दिया है. न्यूज18 इंडिया से बातचीत के दौरान निषाद आरक्षण पर बयान देते हुए कहा कि अगर इस मुद्दे पर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पहल नहीं हुई तो बीजेपी को नुकसान होगा. साथ ही उन्होंने गठबंधन छोड़ने के सवाल पर भी जवाब दिया. इसके अलावा जब उनसे सवाल किया गया कि निषाद आरक्षण अब तक हो जाना चाहिए था? तो जवाब देते हुए कहा कि CM ने RGI को पत्र लिखा है. गृह मंत्रालय भी पहल कर चुका है.
अर्पिता आर्या ने पूछा- ‘मांग नहीं मानी गई तो क्या चुनाव से पहले NDA छोड़ देंगे?’
‘मुझे मंत्री पद मिला, मेरी बात सुनी नहीं जा रही’—निषाद आरक्षण के सवाल पर संजय निषाद का जवाब, बोले- 2027 में पहल नहीं हुई तो नुकसान होगा
संजय निषाद से अर्पिता ने सीधा सवाल करते हुए पूछा कि आरक्षण नहीं मिला तो क्या NDA और मंत्री पद छोड़ेंगे?
बोले- ‘मैं हिम्मत दिखाने वाला हूं’
अर्पिता: तो इस वक्त हमारे साथ यूपी सरकार के मंत्री संजय निषाद जी जुड़ चुके हैं. सर, बहुत स्वागत है आपका न्यूज़ 18 इंडिया पर. सबसे पहले जरा कुछ तस्वीरें हैं सर और इन तस्वीरों के मायने मैं आपसे समझना चाहती हूं. ये मुलाकात की तस्वीरें चलाइए जरा. सर, ये जो मुलाकात है सर, ये क्या संकेत दे रही है? राजनीति में तो हर चीज संकेत है सर, इशारा है सर. माता प्रसाद जी के साथ जो मुलाकात है। चलिए आइए बगल में.
अर्पिता:* संजय जी, यह मुलाकात क्या कहती है और आपकी जो मुस्कुराहट है, यह भी कुछ कह रही है सर. दोनों क्लियर कीजिएगा.
संजय निषाद: नहीं, आप लोगों की जो मायने हैं, उस पर हंसी आ रही है कि कम से कम किसी के बीमारी पर, किसी के चोट पर, किसी के मृत पर हमेशा राजनीति दिखाई देती है लोगों को. आज के दिन माता प्रसाद पांडे 10 दिन से भर्ती थे. वो हमारे अभिभावक रहे. पहले हम जब यूथ रहे, जब हम लोग स्टूडेंट लाइफ में रहे, राजनीति में जब हम लोग यूनिवर्सिटी का आंदोलन चलता था, तब वो हमारे अफवाह वगैरह रास्ता और तरीका बताते रहे. तो आज अब बीमार हैं तो एक हमारा कर्तव्य बनता मिलने और दो, नेता जहां रहेंगे जाएंगे. बड़े नेता तो वो एक हमारे प्रतिपक्ष के नेता हैं. हम हैं तो बातचीत तो होगी. उसमें कौन सा जो बात रही, वो भी मैंने स्पष्ट कर दी. मुलाकात थी कि भाई उन्होंने कहा तस्वीर पोस्ट कर-कर सियासी माइलेज लेने की क्या जरूरत थी?
अर्पिता: और मैं सीधा सवाल पूछ रही हूं सर. आपने कहा रास्ते, तो यह रास्ता एनडीए की तरफ ही जाता है या रास्ते जुदा हो सकते हैं सर?
संजय निषाद:* नहीं, नहीं. आप आपने मेरे पोस्ट को देखा होगा. उसमें क्या लिखा है? मैंने कहा ना कि अनौपचारिक मुलाकात है. चर्चा हुई है विनोद हत्याकांड पर कि मैंने. उन्होंने कहा कि भाई बहुत गलत हुआ है और तुमने अच्छा कहा. उन्होंने एक शब्द कहा कि भाई मेरे विधानसभा में बहुत निषाद थे. बड़ी सेवा किया. लेकिन आज के दिन में एक भी निषाद अब हमारी पार्टी में नहीं रह गए हैं. सब निषाद पार्टी में आ गए. अच्छी बात है कि दूसरी पार्टी में नहीं. उन्होंने कहा और उन्होंने कहा कि तुम अपने समाज के लिए ऐसा शायद देश में कोई नेता होगा कि जो 24 घंटे समाज के लिए खड़ा होता हो.
संजय निषाद: मैंने कहा कि विनोद हत्याकांड में पूछा उन्हें. हमने कहा भाई देखिए, अगर रील बनाने से काम चल जाए तो लोग रील बनाएं. रोल चाहिए. असली में अगर आपकी पार्टी के लोग गए धरना प्रदर्शन कर रहे हैं तो अगर हमारा एससी-एसटी प्रोटेक्शन एक्ट होता तो शायद उसकी हत्या नहीं होती. एससी-एसटी प्रोटेक्शन एक्ट छीनने वाली पिछली सरकारें रही हैं, वो वापस हो जाना चाहिए. आपकी सरकार ने वापस किया कि 25 दिसंबर औपचारिक बयान था सर आपका.
अर्पिता:* औपचारिक सूचना तो वहां पर ये सब विनोद सैनी साहब, इन सब की चर्चा क्यों होने लग गई सर
संजय निषाद: अरे, उन्होंने ही कहा कि विनोद साहनी के उस केस में क्या हुआ? मुकदमा दर्ज हुआ कि नहीं? उसके परिवार को कुछ कराया कि नहीं? मैंने बताया भाई, उनको जमीन, उनके लिए तीन लाइसेंस, उनके लिए सरकार की पहुंच है.
अर्पिता: उन्होंने जो कहा, फिर भी आपको नौबत क्यों आई इस मामले में धरना देने की सर?
संजय निषाद: आर्य, हम कह रहे हैं कि ये अधिकारी अगर बदमाश ना हो तो राजनीति करने की क्या जरूरत है भाई? अंग्रेज थे. लोकतंत्र की स्थापना इसीलिए हुई ना कि विधायिका और कार्यपालिका कार्य नहीं हो रहा तो विधायिका के लोग क्या करेंगे? विधायिका के लोग खड़े रहेंगे तभी कार्य होगा ना.
अर्पिता: हमने देखा, हम तो शुरू से कह रहे हैं कई नेता पहुंचे थे सर. अरे तो यह सिर्फ इंसाफ की लड़ाई कह रहे हैं कि सबको जाने का लोगों को सीधा सवाल है सर मेरा.
संजय निषाद: मैं कह रहा हूं कुछ लोगों को, मैं कह रहा हूं समाजवादी पार्टी से पूछिए ना. कुछ लोगों को लाशों पे राजनीति करना हो करेंगे. क्यों नहीं? आखिर धरना प्रदर्शन में गए तो उसके अंतिम संस्कार में क्यों नहीं समाजवादी पार्टी गई? जाना चाहिए ना. आज यहां फोटो खिंचाए, चल दिए. सारी पार्टियां फोटो खिंचाई, चल दिया. अंतिम में निषाद पार्टी का कार्यकर्ता पहले था। अंतिम संस्कार निषाद पार्टी के झंडे के नीचे हुआ. मैं कह रहा हूं ये भारतीय संस्कार है. कम से कम इसको ना भूलें. लोग राजनीति करें लेकिन संस्कार में तो शामिल.
अर्पिता: है, संस्कार में आपकी कोई सुन नहीं रहा है सर. अरे मैं कह रही हूं, हम उदाहरण. मैं इसका दे रही हूं, जहां आपने. दूसरा सर, करीब 7 साल से बीजेपी के साथ हैं, आप करीब 5 साल से सरकार में मंत्री हैं सर.
संजय निषाद:* सुनिए…
अर्पिता: सर, करीब 7 साल से बीजेपी के साथ, करीब 5 साल से सरकार में मंत्री। सरकार में कैसे मिलेगा ठीक है? निषाद आरक्षण आपकी सबसे बड़ी राजनीतिक मांगों में. सरकार में रहते हुए भी ये नाते मंत्री हैं और निषाद पार्टी के.
संजय निषाद: मंत्री हैं हम. भारतीय जनता पार्टी के मंत्री नहीं है. निषाद पार्टी के एमएलसी हैं. निषाद पार्टी के मंत्री हैं और निषाद के नाते निषाद पार्टी है. तो समाज के लिए हमारा मार्शल कौम रहा है. इतिहास रहा है, खून में आंदोलन. इस निषाद पार्टी का जन्म भी आंदोलन से. मार्शल अंग्रेजों-मुगलों का है. इतिहास रेल आंदोलन.
अर्पिता: बीजेपी के साथ तो है ना सर, सरकार में हैं, मंत्री हैं, फिर आपकी चल ही नहीं रही. आपको धरने पर बैठना पड़ रहा है. निषाद आरक्षण है, लगातार आपकी मांग रही, प्रमुख मांग रही सर. वह सरकार क्यों नहीं सुन पा रही आपकी मांग?
संजय निषाद: अरे हम कह रहे हैं आज के दिन मैंने सुनी तभी तो 8:00 बजे रात को जो है धर्मपाल जी से बैठक हुई और उन्होंने पूछा क्या मुद्दा, मैंने लिखवा दिया कि मुख्यमंत्री जी ने पत्र लिखा आरजीआई को, आरजीआई के पत्र को गृह मंत्री ने लिखवाया और कह दिया जो है सामाजिक न्याय मंत्रालय नोडल है. केवट, मल्लाह, मझवार अनुसूचित जाति का हकदार है. 2022 में पहल किया, जीत गए. 2024 में आपने पहल नहीं किया, देखो हार गए. 2027 में नहीं पहल करेंगे, नुकसान हो जाए. मैंने सही बात बता दिया. मैं निषाद आरक्षण, आरक्षण के साथ ही.
अर्पिता: मैंने भी कहा, अभी तक तो हो जाना चाहिए सर. ऐसा थोड़ी है, एक-दो साल हुए हैं सर. 5 साल से आप मंत्री हैं.
संजय निषाद: देखो, आप वरिष्ठ पत्रकार हैं और आपका सम्मान है, लेकिन समाज को सही बात जाना चाहिए. मैं कह रहा हूं, मैंने कहा वर्ग तीन की जमीन, रोजीरोटी का अंग्रेजों ने तो छीना ही था. हमारा जो है आसामी दर था, बसपा ने राज्य सरकार को भेज दिया. तालघाट, नदी, बाजू. यह बेईमान लोग हैं ना. मेरा शिक्षा में अनुसूचित जाति जनजाति की शिक्षा मिलती थी. हम मुक्ति जनजाति के नाते, हम जिले में हमारा शिक्षा सपा ने छीन लिया. वो बीजेपी वापस तो करेगी.
अर्पिता: निशाना साध रहे हैं. योगी जी, योगी जी आज मुख्यमंत्री हैं. पहले यह सदन में आवाज उठाते थे. जब वकील ही जज हो तो आज मैं वकील हूं, वो जज हैं. सर, मुझे आसान शब्दों में बता दीजिए ना सर. अभी आपने कहा कि जनता तक मैसेज साफ जाना चाहिए, तो मुझे यह बता दीजिए ना. निषाद आरक्षण कब मिल रहा है? और अगर नहीं मिल पाता, आप सरकार में हैं, 5 साल से मंत्री हैं. सुन लीजिए सर. अगर नहीं मिल पाता तो क्या आप इतना दम दिखाएंगे कि चुनाव से पहले आप गठबंधन से इस्तीफा दे दीजिए?
संजय निषाद: मैं कह रहा हूं, मैं तो हिम्मत दिखाने वाले हैं सर. अरे मैं कह रहा हूं, अरे मैं मंत्री हूं. 70 साल से बहुत बिरादरी मंत्री बना रखा, किसी को पेट में दर्द नहीं हुआ. सैफई खानदान भर मंत्री रहता, किसी को पेट में दर्द नहीं हुआ. बहन जी ने पूरा मंत्री बना रखा. निषाद का बेटा कैबिनेट में आ गया, 70 साल में तो सबको पेट में दर्द हो रहा है. आज के दिन में हम कह रहे हैं.
अर्पिता: मैं वकील हूं। पहले भाई कि आप मंत्रिमंडल में क्यों आए हैं? आप सवाल यह है कि आप प्रधानमंत्री से पूछ रहे हैं. मतलब आप यह कह रहे हैं. आपसे तो पूछूंगी कि आपकी मांग क्यों नहीं मानी जा रही है? आप यह कह दीजिए कि सुनी नहीं जा रही है. मुझे एक मंत्री पद मिला, मैं लेकर बैठा हूं. मेरी बात सुनी नहीं जा रही. ये क्लियर कर दीजिए. निषाद साहब, ये क्लियर कर दीजिए कि आप अपनी बात कह रहे हैं, वो सुन नहीं रहे हैं. बट आपको मलाई खानी है और आप बैठे हुए हैं. आप ना पद छोड़ेंगे, ना एनडीए, ना अपने मंत्रालय.
संजय निषाद: अगर मलाई है तो मलाई है. तो सब लोग मलाई. 70 साल से मलाई खाए। मतलब आप जब सब मलाई खा रहे थे तो निषाद साहब भी रहे.
अर्पिता: निषाद के नाते मंत्री हो, निषाद पार्टी के नाते मंत्री. निषाद सर निषाद चाह रहे हैं ना आरक्षण मिले. आप भी यही चाह रहे हैं, बट आप जिनके साथ हैं वो नहीं हो पा रहा है। तो क्या आप यह हिम्मत जुटाएंगे, क्या आप उनका साथ छोड़ दें? आप उनका साथ छोड़ दें, क्या यह हिम्मत जुटा पाएंगे? क्या फायदा हुआ सर मंत्री पद पर बैठने का जब आप उनकी मांगों को नहीं उठा पा रहे? विक्टिम होते… विक्टिम कार्ड मत खेलिए सर. विक्टिम कार्ड मत कीजिए. हमारे लोग नहीं होते तो हमारे लोग आपके लोग ही, जो मांग कर रहे हैं. वो आप 5 साल से बैठकर हल नहीं कर पा रहे, तो आपके ही लोग यह सवाल पूछ रहे हैं सर. जवाब तो आपको देना होगा. लगातार बोलने से आप बच नहीं जाएंगे.



