मध्यप्रदेश

10 साल से नौकरी कर रहे CMO की MBBS डिग्री निकली फर्जी, बालाघाट में 32 बच्चों की मौत के बाद बड़ा एक्शन

बालाघाट: जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बिरसा तहसील के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बच्चों की मौत के मामलों की गूंज अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि अब यहां तैनात रहे एक डॉक्टर की पूरी डिग्री ही फर्जी निकल आई है। रीवा के विश्वविद्यालय के नाम पर पिछले 10 साल से सरकारी सेवा चला रहे इस डॉक्टर का सच सामने आने के बाद महकमे में हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद एक्शन लेते हुए बिरसा थाने में आरोपी डॉक्टर के खिलाफ औपचारिक एफआईआर दर्ज करा दी गई है। स्थानीय स्तर पर इस खुलासे के बाद लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

दस साल से चल रहा था फर्जीवाड़े का खेल

जांच में यह बात सामने आई है कि डॉ. सुनील सिंह पिछले एक दशक से बालाघाट के बिरसा इलाके में अपनी सेवाएं दे रहे थे। उन्होंने अपनी एमबीबीएस की डिग्री रीवा के अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय से होना बताई थी, जो कि पूरी तरह फर्जी निकली है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराई गई अंदरूनी जांच के बाद 9 अक्टूबर को ही इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए थे। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघन सिंह दाहिया की पुष्टि के बाद, बिरसा बीएमओ ने थाने में मामला दर्ज कराया। एसपी आदित्य मिश्रा ने भी इस पूरे फर्जीवाड़े पर मुहर लगा दी है।

बच्चों की मौत और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला

यह पूरा फर्जीवाड़ा ऐसे समय में उजागर हुआ है जब बिरसा क्षेत्र में बीमारी के कारण हुई अधिकृत तौर पर 32 बच्चों की मौत का मामला पहले से ही सुर्खियों में है। इस संवेदनशील मुद्दे को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है। इतना ही नहीं, देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और इसे स्वतः संज्ञान याचिका के रूप में सुनवाई के दायरे में ले रखा है।

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