मोबाइल की दीवानगी कहां लेकर जाएगी?

व्यापक संदर्भ में देखें, तो ऐसे मामलों में दोष केवल युवाओं का भी नहीं है। कुछ बच्चे माता-पिता पर दबाव बनाते हैं कि अगर उन्हें लेटेस्ट फोन नहीं मिला तो वे पढ़ाई नहीं करेंगे। बच्चे महंगा स्मार्टफोन यह कहकर मांगते हैं कि इससे पढ़ाई, प्रोजेक्ट और नई तकनीक सीखने में मदद मिलेगी। खासकर कम पढ़े-लिखे माता-पिता को बच्चे कई बार इन वजहों का हवाला देकर समझाने की कोशिश करते हैं। हालांकि कई मामलों में असली वजह दोस्तों के बीच फोन को प्रदर्शित करना और खुद को उनसे पीछे न दिखाना होती है। भारत में मार्केट रिसर्च फर्म ‘काउंटरपॉइंट रिसर्च’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बिकने वाले कम से कम 42 प्रतिशत आईफोन ईएमआई (किस्तों) पर खरीदे जाएंगे। देश के ज्यादातर परिवारों की आय सीमित है। ऐसे में 75000 रुपए या उससे महंगे फोन की किस्तें चुकाना कई परिवारों को कर्ज में धकेल रहा है…
युवा किसी भी देश का भविष्य होते हैं। देश का भविष्य बनने वाले युवा भविष्य की चिंता किए बगैर सिर्फ एक झूठी होड़ का शिकार हों तो देश का भला कैसे होगा? मौजूदा दौर में मोबाइल को लेकर जो मारामारी मची हुई है, उसे देख कर लगता है कि जैसे देश के युवाओं के सामने कोई चुनौती नहीं बची है। युवाओं के स्वास्थ्य और भविष्य पर मोबाइल के नए से नए ब्रांडों का आकर्षण उन्हें दलदल की तरफ धकेल रहा है। महंगे मोबाइल ब्रांडों के जुनून से तो यही लगता है कि इस देश में बेरोजगारी और युवाओं से जुड़ी कोई समस्या बची ही नहीं है। नए से नए मोबाइल ब्रांड को पाने के लिए देश के युवा मारामारी करते रहे हैं। ऐसा लगता है कि जैसे वे इतने जरूरी काम में जुटे हुए हैं कि यदि यह नहीं हुआ तो उनका भविष्य खराब हो जाएगा। एक अमरीकी कंपनी के नए ब्रांड को लेकर युवा रातभर लाइन में खड़े रहे और अपने नंबर का इंतजार करते रहे। दिल्ली से मुंबई तक देश के कई शहरों में इस कंपनी के स्टोर के बाहर सैकड़ों लोग सुबह स्टोर खुलने की इंतजार में रात भर कतार में लगे रहे। वह भी एक ऐसे मोबाइल के लिए जिसकी कीमत भी डेढ़ से सवा तीन लाख रुपए तक की है। इनमें चंद ही ऐसे युवा होंगे जो इतने महंगे फोन से कुछ कमाई करेंगे, बाकी सभी तो सिर्फ जुनून के शिकार हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि लोग महंगा फोन खरीदने के लिए इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं?
बड़ा सवाल यह है कि कुछ लोगों को नया फोन, नई कार, नया गैजेट या कोई भी लेटेस्ट प्रोडक्ट सबसे पहले खरीदने की इतनी जल्दी क्यों होती है। साइकोलॉजी में इसे नयापन अर्थात अनोखा या अलग अनुभव करने की इच्छा कहते हैं। इसे आकर्षण से जोडक़र देखा जाता है। इनसान को नई और अलग चीजें स्वाभाविक तौर पर दिलचस्प लगती हैं। नए प्रोडक्ट के साथ नई तकनीक, नया डिजाइन और नई पहचान जुड़ी होती है। नवीनतम फोन खरीदने की इस होड़ के पीछे फोमो यानी दूसरों से पीछे छूट जाने का डर भी हो सकता है। लोगों को लगने लगता है कि बाकी सभी लोग आगे बढ़ रहे हैं और अगर उन्होंने यह फोन नहीं लिया तो वे पीछे रह जाएंगे। यही कारण है कि कुछ लोग नया फोन आने का महीनों इंतजार करते हैं और लॉन्च होते ही उसे खरीदने के लिए घंटों लाइन में लग जाते हैं। कुछ लोग हर चीज सबसे पहले क्यों लेना चाहते हैं? हर व्यक्ति नई चीज के पीछे एक ही वजह से नहीं भागता। किसी को नई तकनीक पसंद होती है, किसी को नई चीज इस्तेमाल करने का अनुभव अच्छा लगता है, जबकि कुछ लोगों के लिए सबसे पहले नया प्रोडक्ट खरीदना उनकी पहचान और सोशल स्टेटस से जुड़ जाता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर नया फोन दिखाकर रील बनाने और उसे प्रदर्शित करने की चाहत भी इसके आकर्षण को बढ़ा सकती है। कई युवा लेटेस्ट फोन खरीदने के लिए ईएमआई का सहारा लेते हैं। उन्हें लगता है कि अभी फोन ले लेते हैं और पैसे धीरे-धीरे चुका देंगे। सोशल मीडिया ने इस सामाजिक दबाव को और बढ़ाया है। इसका असर सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं में भी लेटेस्ट प्रोडक्ट को लेकर ऐसा क्रेज देखने को मिलता है। कई मामलों में माता-पिता बच्चों की इस जिद से परेशान होकर काउंसिलिंग के लिए पहुंचते हैं। मोबाइल फोन की चाहत को लेकर देश में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं।
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में एक युवक ईएमआई पर खरीदे गए एप्पल आईफोन की मासिक किस्त के पैसों को लेकर हुए झगड़े के बाद तिसगांव की एक पहाड़ी पर चढक़र कूदने की धमकी दे रहा था। वह नीचे गिर पड़ा। उसे बचाने और नीचे उतारने की कोशिश में उसके पिता भी संतुलन बिगडऩे से उसके साथ 250 फुट गहरी खाई में गिर गए और आंखों के सामने पूरे परिवार को उजड़ता देख सदमे में आई मां ने भी चट्टान से छलांग लगा दी। मोबाइल ने तीनों की जान ले ली। इसी तरह उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 4 फरवरी 2026 को तीन सगी नाबालिग बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली। माता-पिता द्वारा ऑनलाइन गेमिंग और अत्यधिक मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने व फोन छीन लिए जाने के बाद उन्होंने यह खौफनाक कदम उठाया। अगस्त 2026 को यूपी के फर्रूखाबाद में 25 वर्षीय युवती ने पिता द्वारा उसका मोबाइल फोन छीनने पर आत्महत्या कर ली। हिमाचल प्रदेश में मार्च 2025 में मंडी में एक बेटी ने पढ़ाई या परीक्षा के दौरान पिता द्वारा मोबाइल फोन छीन लिए जाने से आहत होकर आधी रात को विक्टोरिया पुल से ब्यास नदी में छलांग लगाकर अपनी जान दे दी थी। आगरा में एक पिता के मोबाइल तोडऩे पर 17 वर्षीय बेटी ने फांसी लगा ली थी। दिसंबर 2023 में नागपुर में एक 16 वर्षीय किशोरी ने फोन का इस्तेमाल रोकने पर आत्महत्या कर ली। दरअसल, ऐसी घटनाओं के पीछे उपभोक्तावाद, दिखावे की संस्कृति, साथियों के दबाव, डिजिटल दुनिया में निर्मित कृत्रिम जीवन शैली और तत्काल अपनी इच्छा पूरी कर लेने की बढ़ती प्रवृत्ति जैसे कई पहलू हो सकते हैं। व्यापक संदर्भ में देखें, तो ऐसे मामलों में दोष केवल युवाओं का भी नहीं है। कुछ बच्चे माता-पिता पर दबाव बनाते हैं कि अगर उन्हें लेटेस्ट फोन नहीं मिला तो वे पढ़ाई नहीं करेंगे। बच्चे महंगा स्मार्टफोन यह कहकर मांगते हैं कि इससे पढ़ाई, प्रोजेक्ट और नई तकनीक सीखने में मदद मिलेगी। खासकर कम पढ़े-लिखे माता-पिता को बच्चे कई बार इन वजहों का हवाला देकर समझाने की कोशिश करते हैं।
हालांकि कई मामलों में असली वजह दोस्तों के बीच फोन को प्रदर्शित करना और खुद को उनसे पीछे न दिखाना होती है। भारत में मार्केट रिसर्च फर्म ‘काउंटरपॉइंट रिसर्च’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल बिकने वाले कम से कम 42 प्रतिशत आईफोन ईएमआई (किस्तों) पर खरीदे जाएंगे। देश के ज्यादातर परिवारों की मासिक आय बहुत सीमित है। ऐसे में 75000 रुपए या उससे महंगे फोन की किस्तें चुकाना कई परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेल रहा है। भारत में 5 करोड़ से भी कम ऐसे परिवार हैं जिनकी मासिक आय 75000 रुपए है। वहीं, एक आईफोन की औसत कीमत भी लगभग 75000 रुपए है। मतलब एक फोन की कीमत पूरे परिवार की महीने भर की कमाई से भी ज्यादा है। अभिभावकों और समाज को भी यह समझना होगा कि बच्चों को महंगी वस्तुएं उपलब्ध कराना और उन्हें जीवन के मूल्य समझाना दो अलग-अलग बातें हैं। बच्चों की हर मांग पूरी करके उन्हें खुश रखना आसान है, लेकिन उन्हें ‘नहीं’ सुनने की क्षमता देना निश्चित ही कहीं अधिक जरूरी है।
योगेंद्र योगी



