महिलाओं के लिए फायदेमंद, तो वहीं किसानों के लिए एटीएम से कम नहीं है ये औषधीय पौधा

शतावरी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय जड़ी-बूटी मानी जाती है और खासतौर पर महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कई पारंपरिक उपयोगों के लिए जानी जाती है. इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान भी इसकी खेती की ओर रुख कर रहे हैं. शतावरी को खेत के साथ गमले में भी उगाया जा सकता है, इसके लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी और जैविक खाद जरूरी है.
शतावरी एक औषधीय जड़ी-बूटी है, जो महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद होती है. आयुर्वेद में इसे स्त्रियों के लिए अमृत कहा गया है. इसके उपयोग से कई तरह की दवाइयां भी बनाई जाती हैं. शतावरी महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और मासिक धर्म की समस्याओं में यह बहुत अधिक उपयोगी है. इसके अलावा, यह पेट की जलन, एसिडिटी, अल्सर, त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी होती है. इसके बढ़ते उपयोग की वजह से किसान भी इसकी खेती करने लगे हैं.
दरअसल रायबरेली जिले के राजकीय आयुष चिकित्सालय शिवगढ़ की प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर स्मिता श्रीवास्तव (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि शतावरी के पत्ते या जड़ को पानी में उबालकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है. इसके ताजे पत्तों और जड़ों का उपयोग सब्जी बनाने में किया जा सकता है. इसके अलावा, इसका चूर्ण भी लिया जा सकता है, जिसे दूध या गुनगुने पानी के साथ सेवन किया जाता है. वहीं, मार्केट में इसके कैप्सूल भी उपलब्ध हैं.
शतावरी महिलाओं के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है, खासकर उनके लिए जिनका मासिक धर्म अनियमित होता है. यह प्रजनन स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी मानी जाती है. इसके अलावा, यह पाचन तंत्र को सुधारती है, इम्यूनिटी को बढ़ाती है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है. यह त्वचा और बालों के लिए भी लाभकारी होती है. शतावरी झुर्रियों को कम करने और त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत देने का काम करती है.
गार्डेनिंग एक्सपर्ट शिव कुमार सिंह बताते हैं कि शतावरी के बीज को गमले में डालने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. जिस मिट्टी को गमले में डालना है, उसे एक दिन के लिए धूप में रख देना चाहिए. इसके बाद, मिट्टी में 1-2 कप खाद डालें। खादयुक्त मिट्टी को गमले में डालकर बराबर कर लें.
वहीं उनका कहना है कि लगभग 2 इंच गहरा गड्ढा करके बीज डालें और मिट्टी को बराबर कर दें. इसके बाद थोड़ा सा पानी अवश्य डालें. खाद के रूप में वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद या गोबर खाद) का उपयोग करना अधिक लाभकारी रहेगा. इससे मिट्टी उपजाऊ बनी रहती है और पौधे की ग्रोथ बेहतर होती है.
शतावरी की खेती सिर्फ गमले में ही नहीं, बल्कि खेतों में भी की जा सकती है. किसान भी अब इसकी खेती करने लगे हैं, क्योंकि यह बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती है. इसकी बढ़ती मांग के कारण किसान इससे अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.
इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी की जरूरत होती है. उचित देखभाल करने पर शतावरी के पौधे से लगातार कई सालों तक फसल मिलती रहती है. इसलिए, यह एक दीर्घकालिक लाभ देने वाली औषधीय फसल मानी जाती है.आयुर्वेद में इसकी उपयोगिता को देखते हुए, इसका व्यापार भी बढ़ता जा रहा है. लोग अब घरों में भी इसे उगाने लगे हैं. इसकी खेती से न सिर्फ सेहतमंद जीवन पाया जा सकता है, बल्कि आर्थिक रूप से भी यह एक लाभकारी विकल्प बन चुका है.



