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मोदी के अंतर्गत भारत बढ़ते आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक प्रभाव वाली वैश्विक शक्ति बना

10 जून, 2026 को, भारत अपनी लोकतांत्रिक यात्रा में एक उल्लेखनीय क्षण का गवाह बनेगा, जब नरेंद्र मोदी निरंतर कार्यकाल के मामले में देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री बन जाएंगे। वस्तुत: स्वतंत्रता के बाद से ही सार्वजनिक जीवन में शामिल रहने के कारण, मुझे पिछले 2 लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्रियों के साथ निकटता से बातचीत करने का अवसर मिला है।

पंडित जवाहरलाल नेहरू मेरे गुरु थे। उन्हें उपनिवेशवाद, गरीबी, विभाजन और सांप्रदायिक संहार से उभरती हुई एक घायल सभ्यता विरासत में मिली थी। उनकी महान उपलब्धि एक विशाल और विविध उपमहाद्वीप को एक कार्यशील लोकतांत्रिक गणराज्य में बदलना था। श्रीमती इंदिरा गांधी के साथ मैंने 10 वर्षों तक उनके मंत्रिमंडल में सेवा की और बंगलादेश के निर्माण में उनकी सबसे बड़ी जीत और आपातकाल के दौरान उनके सबसे काले दौर, दोनों का गवाह रहा। नरेंद्र मोदी की अगली चुनौती प्रधानमंत्री के रूप में उनके कुल कार्यकाल को पार करने की होगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खाते में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। उन्हें जो भारत विरासत में मिला, वह जवाहरलाल नेहरू के युग के भारत से काफी अलग था। देश की जनसंख्या लगभग 34 करोड़ से बढ़कर करीब 146 करोड़ हो गई थी, जबकि मतदाता सूची लगभग 11 करोड़ मतदाताओं से बढ़कर 83 करोड़ से अधिक हो गई थी। यह तथ्य कि उन्होंने अपनी पार्टी को लगातार 3 संसदीय जीतों की ओर अग्रसर किया, अपने आप में एक उल्लेखनीय राजनीतिक उपलब्धि है। यदि वह अगले आम चुनाव में फिर से सफल होते हैं, तो भारतीय राजनीति में एक और अभूतपूर्व रिकॉर्ड स्थापित करेंगे।

नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है, जिसने कोविड-19 महामारी, वैश्विक मुद्रास्फीति के दबावों, भू-राजनीतिक संघर्षों और आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों के कारण पैदा हुई बाधाओं के बावजूद मजबूत विकास को बनाए रखा है। उन्होंने टैलीविजन, डिजिटल मीडिया और सोशल नैटवर्किंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से अभूतपूर्व ‘रियल टाइम’ निगरानी के युग में शासन किया है। उनकी सामाजिक कल्याण पहलें, जिनमें स्वच्छ भारत, ग्रामीण स्वच्छता का विस्तार, महिलाओं के लिए स्वच्छ रसोई ईंधन, ग्रामीण विद्युतीकरण, गरीबों के लिए आवास, सौर ऊर्जा पहलें और करोड़ों नागरिकों को लाभ पहुंचाने वाले खाद्य सुरक्षा उपाय शामिल हैं, ने आम भारतीयों के जीवन को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है और ऐसे ये मोदी सरकार की महत्वपूर्ण उपलब्धियां बनी हुई हैं।
शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों का विस्तार भी उल्लेखनीय रहा है। जवाहरलाल नेहरू ने पहले आई.आई.टी. और एम्स की स्थापना की थी। नरेंद्र मोदी के तहत, आई.आई.टी., एम्स और आई.आई.एम. की संख्या में काफी वृद्धि हुई है।

ये संस्थान भारत की मानव पूंजी में एक बड़े निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश की बढ़ती व्यावसायिक, वैज्ञानिक और बौद्धिक आकांक्षाओं को दर्शाते हैं। इसी तरह बुनियादी ढांचे का विकास भी इस अवधि की एक परिभाषित विशेषता रहा है। राजमार्गों, हवाई अड्डों के तेजी से विस्तार, रेलवे के आधुनिकीकरण, डिजिटल कनैक्टिविटी और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे ने दीर्घकालिक आर्थिक विकास की नींव रखने का प्रयास किया है। कोई हर नीति से सहमत हो या नहीं, कार्यान्वयन का पैमाना काफी बड़ा रहा है। उनके कुछ निर्णय नि:संदेह विवादास्पद रहे हैं, जिनमें नोटबंदी और अनुच्छेद 370 को हटाना शामिल है। एक लोकतंत्र में, प्रमुख नीतिगत पहलों पर हमेशा दोनों पक्षों की ओर से कड़े विचार सामने आएंगे, फिर भी नरेंद्र मोदी ने अपने घोषित लक्ष्यों को पूरा करने का दृढ़ संकल्प दिखाया है।

विदेशी मामलों में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महत्वपूर्ण पहलें की हैं। उनके व्यापक अंतर्राष्ट्रीय जुड़ावों ने प्रमुख शक्तियों के साथ-साथ विकासशील देशों के साथ भी भारत के संबंधों को मजबूत किया है। भारत के बढ़ते राजनयिक कद, ग्लोबल साऊथ में नेतृत्व की भूमिका और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बढ़ी हुई दृश्यता ने विश्व मंच पर इसके सम्मान को बढ़ाया है। खाड़ी देशों तक उनकी पहुंच विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही है, जिससे भारत के लिए अत्यधिक रणनीतिक और आर्थिक महत्व वाले क्षेत्र के साथ संबंधों को गहरा करने में मदद मिली है, बावजूद इसके कि उन्हें यह आशंका थी कि भारत धर्मनिरपेक्षता से दूर जा रहा है। मैं यह भी जोड़ सकता हूं कि यद्यपि यह शब्द हमारे संविधान की प्रस्तावना में शामिल है लेकिन दुर्भाग्य से इसने एक हिंदू-विरोधी ग्रंथि प्राप्त कर ली थी। इस पृष्ठभूमि में, उनके कार्यकाल के दौरान एक प्रमुख उपलब्धि सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद अयोध्या में श्री राम लला मंदिर का निर्माण रही है। करोड़ों भारतीयों के लिए इसने एक लंबे समय से चले आ रहे सभ्यतागत और सांस्कृतिक मुद्दे के समाधान को चिन्हित किया।

शायद नरेंद्र मोदी का सबसे स्थायी योगदान भारतीय आबादी के विशाल वर्गों के साथ सीधे जुडऩे और भारत के भविष्य में विश्वास जगाने की उनकी क्षमता रही है। उनका नेतृत्व एक ऐसे कालखंड के साथ मेल खाता है, जिसमें भारत ने खुद को केवल एक विकासशील देश के रूप में नहीं, बल्कि बढ़ती आॢथक, तकनीकी और रणनीतिक प्रभाव वाली एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में देखा है। अधिक विस्तार में जाए बिना, यह कहना पर्याप्त है कि असंख्य राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, नरेंद्र मोदी बदलाव के एक महत्वाकांक्षी एजैंडे को आगे बढ़ाते हुए लोकतांत्रिक शासन को बनाए रखने में सफल रहे हैं। 

आगे की चुनौतियां कठिन बनी हुई हैं-भारत के संघीय ढांचे को मजबूत करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, युवा आबादी के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना, पर्यावरणीय चिंताओं को दूर करना और समावेशी विकास सुनिश्चित करना। किसी की राजनीतिक विचारधारा चाहे जो भी हो, नरेंद्र मोदी ने भारतीय राजनीति की शब्दावली को बदल दिया है। स्वतंत्रता के बाद से बहुत कम नेता मतदाताओं के साथ ऐसा सीधा संबंध स्थापित करने या राष्ट्रीय विमर्श को उस सीमा तक आकार देने में सक्षम हुए हैं, जैसा उन्होंने पिछले दशक में किया है। जैसे ही भारत अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है, इन कार्यों के लिए ज्ञान, धैर्य और राष्ट्रीय आम सहमति की आवश्यकता होगी। स्वतंत्रता की भोर से भारत की यात्रा को देखने वाले व्यक्ति के रूप में, यह मेरी आशा है कि आने वाले वर्ष हमारे देश को न केवल शक्ति और समृद्धि में, बल्कि ज्ञान, करुणा और राष्ट्रीय एकता में भी बढ़ते हुए देखेंगे। उस बड़े प्रयास में, दलीय राजनीति से अलग, हम सभी को राष्ट्र की सेवा में प्रधानमंत्री की सफलता की कामना करनी चाहिए।-डा. करण सिंह

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