विकास के साथ परमाणु रक्षा मजबूती जरूरी

वस्तुत: चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रक्षा तैयारी रणनीति के तहत यह एक असाधारण बदलाव है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक रक्षा व्यय से संबंधित ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दुनिया में भारत रणनीतिक रूप से आर्थिक मजबूती के साथ रक्षा मजबूती के लिए रक्षा व्यय बढ़ाने वाले प्रमुख देश के रूप मे उभर कर दिखाई दे रहा है…
इस समय जिस तरह पाकिस्तान के द्वारा सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद पाकिस्तान के हिस्से का भारत के द्वारा पानी रोकने के परिप्रेक्ष्य में युद्ध और परमाणु हमले की धमकियां दी जा रही हैं तथा पाकिस्तान को चीन और तुर्किये से आधुनिक सैन्य हथियारों की आपूर्ति की जा रही है, उसके मद्देनजर भारत के लिए तेज विकास के साथ परमाणु हथियार मोर्चे सहित बहुआयामी रक्षा मजबूती जरूरी दिखाई दे रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित तीन नौसैनिक जहाजों को राष्ट्र को समर्पित करते हुए कहा कि देश में शांति और विकास के लिए रक्षा मजबूती आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में यह उभरकर दिखाई दे रहा है कि भारत तेज आर्थिक विकास के साथ परमाणु हथियार मोर्चे पर भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक भू राजनीतिक चुनौतियों और सीमा पार पड़ोसियों से मिल रही रक्षा चुनौतियों के बीच भारत की मजबूत परमाणु निवारक क्षमता से दुनिया में भारत के प्रति आर्थिक विश्वास बढ़ रहा है, भारत में निवेश बढ़ रहे हैं, भारत के व्यापार समझौते बढ़ रहे हैं और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में अब भारत को विकसित राष्ट्र और दुनिया की महाशक्ति बनाने के मद्देनजर और तेजी से आर्थिक विकास के साथ परमाणु हथियार मोर्चे पर आगे बढऩा जरूरी है। इस परिप्रेक्ष्य में दो हालिया रिपोर्टें उल्लेखनीय हैं। विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बीच वर्ष 2026-27 में भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत होगी और उभरते हुए देशों में भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे तेज गति से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। दूसरी ओर दुनिया में हथियारों पर नजर रखने वाली ग्लोबल संस्था स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिप्री) की परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत परमाणु हथियार मोर्चे पर दुनिया में अभूतपूर्व तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। उल्लेखनीय है कि सिप्री ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रक्षा बजट के मामले में भारत दुनिया में पांचवें क्रम पर है।
जनवरी 2026 तक भारत के पास कुल 190 परमाणु वॉरहेड (पाकिस्तान-170) हो गए हैं। भारत के पास एक साल पहले इनकी संख्या 180 थी। इनमें से 12 परमाणु बमों को उनके डिलीवरी सिस्टम जैसे मिसाइल, पनडुब्बी और लड़ाकू विमानों के साथ जोड़ दिया गया है। साथ ही उन्हें ऑपरेशनल फोर्स वाले बेस पर तैनात किया गया है। स्पष्ट है कि परमाणु हथियारों को अलग स्टोरेज फैसिलिटी में रखने की भारत की दशकों पुरानी नीति अब बदल गई है। लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि शांति के समय भारत अपने परमाणु वॉरहेड को तैनात लॉन्चर से अलग रखता है। मिसाइलों को लगातार कैनिस्टर में रखने और समुद्र में डेटरेंस पैट्रोलिंग (सुरक्षा के लिए गश्त) करने जैसे हालिया कदमों से संकेत मिलता है कि भारत शांति के समय में भी अपने कुछ वॉरहेड को लॉन्चर के साथ जोडऩे की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि भारतीय युद्धपोत, पनडुब्बी और दूसरे हथियारों में परमाणु हथियार हमेशा तैनात रहते हैं। वस्तुत: चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रक्षा तैयारी रणनीति के तहत यह एक असाधारण बदलाव है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और वैश्विक रक्षा व्यय से संबंधित ताजा रिपोर्टों के मुताबिक दुनिया में भारत रणनीतिक रूप से आर्थिक मजबूती के साथ रक्षा मजबूती के लिए रक्षा व्यय बढ़ाने वाले प्रमुख देश के रूप मे उभर कर दिखाई दे रहा है। निश्चित रूप से एक ऐसे समय में जब भारत की सीमाएं बढ़ती भूराजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर पहले से अधिक असुरक्षित और संवेदनशील हो गई हैं, तब भारत को न केवल दुनिया की आर्थिक शक्ति, वरन् उन्नत परमाणु हथियारों से सुसज्जित सैन्य शक्ति बनने की जरूरत दिखाई दे रही है। यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि भारत के पड़ोस में सीमावर्ती क्षेत्रों में पाकिस्तान के द्वारा आधुनिक चीनी हथियारों से आतंक और घुसपैठ को प्रश्रय दिया जा रहा है। पिछले दिनों ईरान-अमरीका के बीच मध्यस्थता के प्रयासों से पाकिस्तान को अमरीका से सराहना मिली है और आतंकी पाकिस्तान की अमरीका से निकटता बढ़ी है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि चीन की ओर से भी सीमा पर भारत के संप्रभु इलाकों पर चुनौती देने वाली गतिविधियां बढ़ी हैं।
चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) एवं विशेष रूप से काराकोरम दर्रे के पास चुनौतियां भी पैदा कर रहा है। पिछले दिनों चीन द्वारा शरारत पूर्ण तरीके से अक्साई चीन में नई एडमिनिस्ट्रेटिव काउंटी स्थापित की गई है। चीन हिंद महासागर में ‘स्ट्रिंग ऑफ पल्र्स’ नीति के जरिए भी भारत को चुनौती दे रहा है। ऐसे में भारत चीन के हर विस्तारवादी कदम का लगातार कड़ा और बहुआयामी जवाब देते हुए दिखाई दे रहा है। पिछले वर्ष 2025 में भारत के द्वारा पाकिस्तान को पहलगाम आतंकी हमले का जवाब देने के मद्देनजर जब 7 मई से ऑपरेशन सिंदूर चलाया गया था, तब पाकिस्तान का साथ देने के लिए चीन, तुर्किये और अजरबैजान का खतरनाक गठजोड़ सामने आया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान चीन ने पाकिस्तान को साइबर सपोर्ट, उपग्रह के जरिए खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी। अब पाकिस्तान के द्वारा चीन के सहयोग से परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम अंतर महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल जैसे हथियार विकसित किए जा रहे हैं। इतना ही नहीं पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता भी किया है। पिछले दिनों अमरीका की नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर के द्वारा प्रस्तुत ‘एनुअल थ्रेट असेसमेंट’ रिपोर्ट 2026 में कहा गया है कि इस समय पाकिस्तान के द्वारा किया जा रहा परमाणु और पारंपरिक हथियारों का विस्तार भारत सहित दक्षिण एशिया के लिए बड़ा खतरा बन गया है। अब भारत को यह दृढ़ता से स्वीकार करना होगा कि भारत के साथ शत्रुता रखने वाले पड़ोसियों के टकराव की स्थिति और बढ़ सकती है। साथ ही हालिया ईरान और अमरीका-इजरायल युद्ध से भी भारत के लिए तेज विकास के साथ रक्षा मोर्चे पर मजबूती के साथ आगे बढऩे का सबक उभरकर दिखाई दे रहा है। हमें युद्ध पर आधारित ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में भी तैयार होना होगा, जहां जरूरत पडऩे पर तेजी से औद्योगिक और तकनीकी क्षमता का इस्तेमाल करते हुए युद्ध सामग्री का निर्माण हो सके। हमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से रक्षा इकाइयों को तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के साथ जोडक़र सैन्य साजो सामान को अत्याधुनिक बनाने की डगर पर तेजी से बढऩा होगा। देश में साइबर और सूचना युद्ध क्षमताओं को तेजी से विस्तारित करना होगा। हमें ध्यान देना होगा कि अब युद्ध केवल सीमाओं पर ही नहीं लड़े जाते, वरन् ये आधुनिक चिप्स से निर्मित मिसाइलों व उन्नत ड्रोन के इस्तेमाल से हवाए समुद्र तथा साइबर स्पेस में भी लड़े जाते हैं। अतएव हमें हाइपरसोनिक मिसाइलें, स्वार्म ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की नई क्षमताओं के साथ आगे बढऩा होगा।
अभी भी रक्षा मजबूती के लिए मीलों चलना बाकी है। ‘मेक इन इंडिया’ के तहत आधुनिक हथियारों का मजबूत स्वदेशीकरण किया जाना होगा। भारत को सैन्य साजो-सामान के आधुनिकीकरण के साथ एआई, साइबर तकनीक और आधुनिक मिसाइलों से सुसज्जित होना होगा। उम्मीद करें कि सरकार पाकिस्तान से मिल रही युद्ध और परमाणु हमले की चुनौतियों और सीमा पार से बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच देश को उन्नत परमाणु हथियार सहित बहुआयामी सुरक्षा मोर्चे पर तेजी से आगे बढ़ाएगी। साथ ही उम्मीद करें कि सरकार 2030 तक देश को रणनीतिपूर्वक दुनिया की तीसरी बढ़ी आर्थिक शक्ति बनाने की राह पर भी आगे बढ़ेगी।-डा. जयंती लाल भंडारी



