ब्रह्मोस से 3 गुना रेंज, पर स्पीड सबसोनिक; जानते हो स्वदेशी माणिक इंजन वाले LRLACM की ताकत? DRDO ने किया सफल टेस्ट

LRLACM Missile vs Bhramos: डीआरडीओ ने 1,500 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली स्वदेशी लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का सफल परीक्षण किया है. भारत के अपने माणिक टर्बोफैन इंजन से लैस यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी है. भले ही इसकी रफ्तार ब्रह्मोस से कम (सबसोनिक) हो लेकिन इसकी मारक दूरी ब्रह्मोस से तीन गुना अधिक है. यह मिसाइल जमीन से सटकर पहाड़ों की ओट में उड़ते हुए राडार को चकमा देने में माहिर है.
ओडिशा के चांदीपुर तट पर कल जब समंदर की लहरें खामोश थीं, तभी अचानक एक जोरदार धमाके ने आसमान को थर्रा दिया. धुआं छंटा तो सफेद रंग का एक स्वदेशी शिकारी आग उगलते हुए बादलों को चीरकर आगे बढ़ गया. यह कोई आम मिसाइल नहीं बल्कि भारत का वो ब्रह्मास्त्र है जो आने वाले वक्त में जंग की पूरी परिभाषा बदलने वाला है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने आज भारत की अपनी टॉमहॉक कही जाने वाली लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल (LRLACM) का ऐसा सफल परीक्षण किया, जिसने बीजिंग से लेकर इस्लामाबाद तक के रक्षा मुख्यालयों में खलबली मचा दी है.
इस मिसाइल का पूरा गणित बड़ा ही दिलचस्प और हैरान करने वाला है. जहां भारत की सबसे खतरनाक सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस अपनी तूफानी रफ्तार के लिए जानी जाती है, वहीं यह नया लड़ाका LRLACM रफ्तार के मामले में बिल्कुल शांत यानी सबसोनिक है. लेकिन धोखा मत खाइए; इसकी असली ताकत इसकी रफ्तार नहीं बल्कि इसकी वो अदृश्य पहुंच है जो ब्रह्मोस से भी तीन गुना ज्यादा दूरी तक दुश्मन का काल बन सकती है. भारत के अपने स्वदेशी माणिक टर्बोफैन इंजन की ताकत से लैस यह क्रूज मिसाइल अब समंदर की सतह को चूमते हुए और पहाड़ों की ओट में छिपते हुए दुश्मन के घर में 1,500 किलोमीटर भीतर घुसकर तबाही मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
यह निर्भय और ITCM मिसाइल प्रोग्राम की परिपक्व तकनीकों पर आधारित एक अत्याधुनिक, पूरी तरह स्वदेशी क्रूज मिसाइल है जो भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना तीनों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी.
• लो-अल्टीट्यूड और सी-स्किमिंग: यह मिसाइल जमीन से सटकर पहाड़ों और घाटियों के बीच से (राडार की नजरों से बचते हुए) उड़ान भरने में सक्षम है. समुद्र के ऊपर यह बिल्कुल पानी की सतह के करीब उड़ सकती है.
• वेपॉइंट नेविगेशन: यह मिसाइल सीधे रास्ते पर जाने के बजाय टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होकर जाती है. इससे दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम यह अंदाजा नहीं लगा पाते कि मिसाइल का अंतिम टारगेट क्या है.
• स्वदेशी इंजन: LRLACM को ताकत मिलती है भारत के अपने ‘माणिक’ स्मॉल टर्बोफैन इंजन (Manik STFE) से. इससे पहले भारत इस श्रेणी के इंजनों के लिए रूस पर निर्भर था.
• लॉन्च प्लेटफॉर्म्स: इसे जमीन पर चलने वाले मोबाइल आर्टिकुलेटेड लॉन्चर और नौसेना के युद्धपोतों में लगे यूनिवर्सल वर्टिकल लॉन्च मॉड्यूल (UVLM) दोनों से दागा जा सकता है. इसका एयर-लॉन्च (सुखोई-30 MKI से लॉन्च होने वाला) वेरिएंट भी विकसित किया जा रहा है.
पेलोड, रेंज और अनुमानित कीमत
• रेंज: इस मिसाइल की मारक क्षमता 1,000 किलोमीटर से लेकर 1,500 किलोमीटर तक है. यानी यह दुश्मन के इलाके में बहुत गहराई में घुसकर हमला कर सकती है.
• पेलोड: यह लगभग 200 से 300 किलोग्राम वजनी पारंपरिक और विशेष विस्फोटक ले जाने में सक्षम है. इसके अग्रभाग में आधुनिक सीकर लगे हैं जो आखिरी पलों में सटीक टारगेट को पहचानते हैं.
• रफ्तार: यह एक सबसोनिक (Subsonic) क्रूज मिसाइल है, जो लगभग 0.7 से 0.8 मैक (लगभग 850-950 किमी/घंटा) की रफ्तार से उड़ती है. कम रफ्तार इसे चुपके से (Stealth) आगे बढ़ने में मदद करती है.
• वजन और लंबाई: इसकी लंबाई लगभग 6 मीटर और वजन करीब 1 टन (1,000 किलोग्राम) है.
• कीमत: आधिकारिक तौर पर सटीक कीमत का खुलासा नहीं किया गया है लेकिन अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल (जिसकी कीमत करीब $1.5-$2 मिलियन डॉलर होती है) की तुलना में स्वदेशी LRLACM की निर्माण लागत काफी कम (अनुमानित 5 से 7 करोड़ रुपये प्रति मिसाइल) बैठने वाली है, क्योंकि इसके सभी सब-सिस्टम भारत में ही बने हैं.
वैश्विक मिसाइलों से तुलना
| प्रकार | सबसोनिक क्रूज मिसाइल | सबसोनिक क्रूज मिसाइल | सबसोनिक/सुपरसोनिक क्रूज | सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल |
| रेंज | 1,000 – 1,500 किमी | 1,600 – 2,500 किमी | 1,500 – 2,500 किमी | 290 – 500 किमी |
| रफ्तार | 0.7 – 0.8 मैक | 0.74 मैक | 0.8 मैक (टर्मिनल 3 मैक) | 2.8 – 3.0 मैक |
| मुख्य भूमिका | डीप पेनिट्रेशन, लैंड अटैक | ग्लोबल स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक | लंबी दूरी का अटैक | क्विक, हाई-स्पीड प्रिसिजन स्ट्राइक |
LRLACM भारतीय सेनाओं के लिए कितनी बड़ी कामयाबी?
• ब्रह्मोस और LRLACM की जुगलबंदी: ब्रह्मोस अपनी तेज रफ्तार के कारण दुश्मन के एयर डिफेंस को तुरंत तबाह करने के काम आएगी, जबकि LRLACM अपनी लंबी दूरी और जमीन से सटकर उड़ने की खूबी के कारण दुश्मन के अंदरूनी कमांड सेंटर्स, एयरबेस, रसद डिपो और राडार स्टेशनों को निशाना बनाएगी.
• पूरी तरह आत्मनिर्भर: एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE), बेंगलुरु ने इसे भारत डायनामिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ मिलकर बनाया है. युद्ध की स्थिति में विदेशी पाबंदियों का इस मिसाइल की सप्लाई चेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
• कॉस्ट-इफेक्टिव वॉरफेयर: सुपरसोनिक या हाइपरसोनिक मिसाइलें बेहद महंगी होती हैं. लंबी दूरी के युद्ध में सैकड़ों की संख्या में मिसाइलें दागनी पड़ती हैं, वहां LRLACM जैसी सबसोनिक मिसाइलें किफायती और अत्यधिक विनाशकारी हथियार साबित होती हैं.
सवाल-जवाब
क्या LRLACM एक परमाणु सक्षम (Nuclear-Capable) मिसाइल है?
LRLACM को मुख्य रूप से भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, नौसेना, वायुसेना) के लिए एक पारंपरिक लंबी दूरी के सटीक-स्ट्राइक (Conventional Precision-Strike) हथियार के रूप में डिजाइन किया जा रहा है. हालांकि, तकनीकी रूप से क्रूज मिसाइलों को जरूरत पड़ने पर रणनीतिक पेलोड के लिए मॉडिफाई किया जा सकता है, लेकिन इसका मुख्य फोकस पारंपरिक युद्ध पर ही है.
यह मिसाइल भारत की पुरानी ‘निर्भय’ मिसाइल से किस तरह अलग है?
निर्भय मिसाइल एक टेक्नोलॉजी डेमोनस्ट्रेटर (तकनीकी प्रदर्शन) थी, जिसमें शुरुआती चरणों में रूसी इंजन का इस्तेमाल हुआ था. LRLACM उसी तकनीक का अत्यधिक एडवांस, रिफाइंड और 100% स्वदेशी वेरिएंट है, जिसमें उन्नत एवियोनिक्स, आधुनिक सीकर और पूरी तरह से भारत में निर्मित ‘माणिक’ टर्बोफैन इंजन का उपयोग किया गया है.
कम रफ्तार (सबसोनिक) होने के बावजूद दुश्मन इसे हवा में मार क्यों नहीं गिरा पाता?
भले ही इसकी रफ्तार ध्वनि से कम (सबसोनिक) हो, लेकिन इसकी ताकत इसकी ‘अदृश्यता’ में है. यह जमीन या समुद्र की सतह से महज कुछ मीटर ऊपर (Terrain-Hugging) उड़ती है. इतनी कम ऊंचाई पर उड़ने के कारण पृथ्वी की वक्रता (Curvature) और पहाड़ों की ओट की वजह से दुश्मन के बड़े राडार इसे तब तक नहीं देख पाते, जब तक यह बेहद करीब न आ जाए.
भारतीय नौसेना के लिए यह मिसाइल क्यों इतनी महत्वपूर्ण मानी जा रही है?
नौसेना इसके जरिए अपने युद्धपोतों और पनडुब्बियों से दुश्मन की मुख्य भूमि पर 1,500 किलोमीटर दूर स्थित ठिकानों को तबाह कर सकेगी. इससे भारतीय नौसेना को गहरे समुद्र से ‘स्टैंड-ऑफ लैंड अटैक’ (दुश्मन की मिसाइल रेंज से बाहर रहकर जमीन पर हमला करने) की बेहतरीन क्षमता मिल जाएगी.



