जंतर-मंतर से हुंकार: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़े सोनम वांगचुक

नई दिल्ली: देश की शिक्षा व्यवस्था में कथित धांधलियों के खिलाफ जंतर-मंतर पर चल रहा प्रदर्शन तेज होता जा रहा है। शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज 13वां दिन है। अपनी सेहत से जुड़े सवालों पर उन्होंने कहा कि शुरुआती कुछ दिनों की दिक्कतों के बाद अब उनकी भूख ‘स्थिर’ हो गई है।
प्रशासन को दी चेतावनी
उन्होंने प्रशासन को चेतावनी देते हुए साफ किया कि वह अपनी मर्जी से इस प्रदर्शन में बैठे हैं, इसलिए उन्हें धरना स्थल से हटाने की कोई भी कोशिश उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगी। सोनम वांगचुक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पिछले 21 दिनों से चल रहे इस आंदोलन के समर्थन में 28 जून से आमरण अनशन पर है।
प्रदर्शन के पीछे क्या है मांग
प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग परीक्षाओं में गड़बड़ी और पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और जवाबदेही तय करना है। पत्रकारों से बातचीत में वांगचुक ने बताया कि लंबे उपवास के कारण उनके शरीर का फैट और मांसपेशियां काफी कम हो गई है, जिससे हड्डियां तक दिखने लगी हैं।
अनशन के बाद भी ऊर्जावान महसूस कर रहे सोनम
इसके बावजूद वह खुद को ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं और उनका यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। प्रशासन द्वारा जबरन हटाए जाने की आशंकाओं को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है और पूरी दुनिया इस समय भारतीय लोकतंत्र की स्थिति को देख रही है।
केंद्र को दी सलाह
उन्होंने केंद्र सरकार को सलाह दी कि संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार कर लेना चाहिए, जिससे युवाओं में फैला भारी आक्रोश कम हो सके और सरकार उनका भरोसा दोबारा जीत सके।



