अब भारत से पैसा नहीं निकालेंगे विदेशी निवेशक! टैक्स में बड़ी राहत देने की तैयारी में सरकार

नई दिल्ली: भारत सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए सरकारी बॉण्ड (G-sec) में निवेश पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को खत्म करने की तैयारी में है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने ET को बताया कि, सरकार का मकसद रुपये को मजबूत करना और देश में विदेशी निवेश बढ़ाना है। जिससे ईरान युद्ध के आर्थिक असर को कम किया जा सके। विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकार आने वाले समय में कुछ और कदम भी उठा सकती है।
अभी के नियमों के हिसाब से, विदेशी निवेशकों को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखे गए लिस्टेड शेयरों और बॉण्ड पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा, सरकारी बॉण्ड से मिलने वाले ब्याज पर उन्हें 20% विदहोल्डिंग टैक्स भी देना होता है। सरकार ने 2023 में विदेशी निवेशकों को मिलने वाली 5% की रियायती टैक्स दर को खत्म कर दिया था।
क्यों है अहम?
यह मामला ऐसे समय में आया है जब विदेशी निवेश का फ्लो कम हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हो गया है। इससे पहले 2019 में भी सरकार ने प्राइवेट निवेश को बढ़ावा देने के लिए अध्यादेश के जरिए कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की थी।
अहम बातें
- 12.5%: लिस्टेड शेयरों और बॉण्ड पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स
- 20%: सरकारी बॉण्ड के ब्याज पर लगने वाला विदहोल्डिंग टैक्स।
- 2.47 लाख करोड़ रुपये: इस साल अब तक विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से निकाली गई रकम।
- 1.04 लाख करोड़ रुपये: साल 2025 में विदेशी निवेशकों द्वारा निकाली गई रकम।
आगे क्या होगा?
जानकारों का कहना है कि भारत से लगातार बाहर जा रही विदेशी पूंजी को देखते हुए वे काफी समय से LTCG और विदहोल्डिंग टैक्स को कम करने की मांग कर रहे थे। एक जानकार ने बताया कि रेगुलेटरी संस्थाएं भी कुछ और कदम उठा सकती हैं, जिससे भारतीय बाजार विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बने रहें।
FPIs ने की निकासी?
जानकारों का कहना है कि विदेशी निवेशकों को लुभाने के लिए सरकार और रेगुलेटर कुछ बड़े ऐलान कर सकते हैं। दरअसल, इस साल अब तक विदेशी निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से कुल 2.47 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। यह 2025 में निकाले गए 1.04 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है।



