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व्यापार समझौतों का नया सुकूनदेह परिदृश्य

साथ ही अब मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ सफलतापूर्वक कार्यान्वित हो रहे एफटीए के और अधिक लाभ मिलते हुए दिखाई देंगे…

हाल ही में 25 से 27 जून तक लंदन में भारत-ब्रिटेन व्यापक, आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीइटीए) की समीक्षा के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सीइटीए 15 जुलाई से कार्यान्वित होगा। इससे भारत और ब्रिटेन दोनों लाभान्वित होंगे। खासतौर से भारत से निर्यात बढ़ेंगे एवं भारतीय पेशेवरों के लिए ब्रिटेन के बाजार में अवसर बढ़ेंगे। इसमें कोई दोमत नहीं हैं कि इस समय भारत के व्यापार समझौतों का परिदृश्य लगातार सुकूनदायक होता जा रहा है। विगत 17 जून को फ्रांस में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में ट्रंप ने कहा कि अमरीका के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार समझौता जल्द आकार लेगा। ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि मैं उन्हें बहुत पसंद करता हूं, वे मेरे अच्छे दोस्त हैं और भविष्य में मैं भारत जा सकता हूं। ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देश व्यापार समझौते के लिए अपने आर्थिक-व्यापारिक मुद्दों को सुलझाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों 1 जून से 4 जून के बीच नई दिल्ली में भारत और अमरीका के बीच महत्वपूर्ण व्यापार वार्ता संपन्न हुई है। इस वार्ता के बाद दोनों देशों ने कहा कि उनके बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता से संबंधित 99 प्रतिशत मुद्दे तय हो चुके हैं और दोनों देश एक पारस्परिक रूप से लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की राह पर हैं।

यह भी महत्वपूर्ण है कि जी-7 सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी के साथ यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने वार्ता के दौरान कहा कि यूरोपीय संघ के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जल्द ही कार्यान्वित होगा। यूरोपीय संघ के साथ भारत के व्यापार समझौते को सभी व्यापार समझौतों में सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। उल्लेखनीय है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत आगामी 10 महीनों में 9 एफटीए लागू करेगा। इससे देश निर्यात, विनिर्माण और निवेश का वैश्विक केंद्र बनने की राह पर आगे बढ़ते हुए दिखाई देगा। पश्चिम एशिया संकट के समाधान से भारत से निर्यात बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के मद्देनजर व्यापार समझौतों की अहम भूमिका उभरकर दिखाई दे रही है। यह कोई छोटी बात नहीं है कि जब इस समय वैश्विक निर्यात का ग्राफ तेजी से घट रहा है, वहीं हाल ही में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-मई माह 2026 में भारत का निर्यात पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 15 प्रतिशत बढ़ गया है और भारत की विकास दर भी उभरते हुए देशों में सबसे अधिक है। ऐसे में अब नए व्यापार समझौतों से इस वित्तीय वर्ष 2026-27 में जहां भारत के निर्यात तेजी से बढ़ेंगे, वहीं अर्थव्यवस्था की रफ्तार और तेज होगी। विगत एक जून को भारत और ओमान के बीच वृहद आर्थिक एवं साझेदारी समझौता (सीईपीए) लागू हो गया है। इससे आगामी पांच वर्षों में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 20 अरब डॉलर के पार पहुंचने का अनुमान है। ओमान में भारत के 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को शुल्क मुक्त प्रवेश मिलेगा। इसके जरिये ओमान में भारत के कृषि, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग सामान, कपड़ा, फुटवियर और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों को पूर्ण शुल्क समाप्ति और निर्यात विस्तार का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि यह समझौता दक्षिण एशिया, खाड़ी क्षेत्र और पूर्वी अफ्रीका को जोडऩे वाला एक रणनीतिक आर्थिक गलियारा स्थापित करेगा। इससे कारोबार बढऩे के साथ रोजगार मौके भी बढ़ेंगे। इसी परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों रोजगार मेले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि विभिन्न देशों के साथ भारत के तेजी से आकार ले रहे द्विपक्षीय व्यापार समझौते और मुक्त व्यापार समझौते तथा भारत में लागू किए जा रहे सरल कानूनों से देश के तेज विकास के साथ युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर निर्मित होंगे। यहां पर यह उल्लेखनीय है कि पिछले माह 15 से 20 मई तक प्रधानमंत्री मोदी ने पांच देशों- संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की आधिकारिक यात्रा के दौरान इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार के महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

इनमें सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, रक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स पर समझौते प्रमुख हैं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता के दौरान इन देशों की 50 बड़ी वैश्विक कंपनियों के मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के द्वारा भारत में अपनी व्यापार विस्तार योजनाओं के लिए लगभग 40 अरब डॉलर की राशि का निवेश संकल्प जताया गया है। यह भी महत्वपूर्ण है कि इस यात्रा के दौरान 19 मई को ओस्लो में संपन्न भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन यूरोप के नॉर्डिक क्षेत्र के साथ भारत के रिश्तों को व्यापक बनाने के मामले में अहम रहा है। नॉर्डिक देशों में उत्तरी यूरोप के डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन जैसे देश शामिल हैं। नार्डिक देशों ने अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर का निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है और इसके बदले में भारत ने इन देशों की रक्षा कंपनियों को रक्षा उद्योग गलियारे में 100 फीसदी विदेशी निवेश पहुंच प्रदान करना सुनिश्चित किया है। नि:संदेह भारत एफटीए की डगर पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। विगत 27 अप्रैल को भारत और न्यूजीलैंड के बीच एक ऐतिहासिक एफटीए पर हस्ताक्षर हुए हैं और यह जल्द ही पूर्णतया लागू होगा। न्यूजीलैंड के साथ किए गए इस एफटीए का अत्यधिक मजबूत पक्ष भारत से सेवा निर्यात बढ़ाना और भारत से पेशेवरों को न्यूजीलैंड में अच्छे अवसरों के लिए आगे बढ़ाना भी है। यह एफटीए भारत की प्रतिभाओं, स्टार्टअप्स और नवाचार के लिए एक मजबूत बुनियाद प्रदान करता है। यह भी महत्वपूर्ण है कि भारत-यूरोपीय संघ के बीच हुए एफटीए को सभी समझौतों की जननी कहा गया है। साथ ही अब मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया और चार यूरोपीय देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और लिकटेंस्टाइन के समूह यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (एफ्टा) के साथ सफलतापूर्वक कार्यान्वित हो रहे एफटीए के और अधिक लाभ मिलते हुए दिखाई देंगे। इतना ही नहीं, इस समय कनाडा, इजरायल, रूस, पेरू, चिली, दक्षिण अफ्रीका और मेक्सिको के साथ मुक्त व्यापार समझौतों पर काम में तेजी आ रही है। इस परिप्रेक्ष्य में यह बात महत्वपूर्ण है।

इन दिनों भारत की अर्थव्यवस्था से संबंधित वैश्विक आर्थिक संगठनों की रिपोर्टों में रेखांकित हो रहा है कि भारत के तेजी से बढ़ते द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और मुक्त व्यापार समझौतों को भारत के हित में अधिक लाभप्रद बनाने के मद्देनजर हाल ही में पूरे देश में जमीनी स्तर पर लागू की गई चार नई श्रम संहिताएं जान फूंकते हुए दिखाई दें सकेंगी। इन चार श्रम संहिताओं- मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता के तहत नए सरल श्रम कानून उद्योग-कारोबार को मजबूती और विकास की नई संभावनाओं को आकार देते हुए दिखाई दे सकेंगे। निश्चित रूप से भारत के बढ़ते हुए व्यापार समझौतों के अत्यधिक सकारात्मक परिदृश्य के बीच भारत में लागू नए सरल श्रम कानूनों की नई लाभप्रद अहमियत दिखाई दे रही है। नए श्रम कानूनों से व्यापार समझौतों का प्रभावी रूप से लाभप्रद क्रियान्वयन होगा। नए श्रम कानूनों से श्रमिकों की सुरक्षा में वृद्धि और बेहतर रोजगार ढांचे के लिए नियमों का आधुनिकीकरण उभर कर दिखाई दे रहा है। वहीं इनसे उद्योग-कारोबार को रफ्तार मिलेगी।-डा. जयंती लाल भंडारी

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