संसद का मानसून सत्रः महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का क्या होगा? मोदी सरकार की लिस्ट में कौन-कौन सा विधेयक शामिल

नई दिल्लीः केंद्र सरकार 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसूत्र में कई विधेयक पेश कर सकती है। सरकार ने संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किए जाने के लिए कुछ विधेयकों को सूचीबद्ध किया है जिनमें से एक विधेयक राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने से संबंधित है जबकि एक अन्य विधेयक जन्म और मृत्यु ‘पंजीकरण में देरी’ के विरूद्ध कठोर प्रावधान से संबंधित है।
माना जा रहा है कि सरकार परिसीमन और 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने वाला बिल फिर से ला सकती है। खासकर तब, जब पिछले सत्र में एकजुट विपक्ष ने इसे गिरा दिया था। हालांकि, लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश किए जाने वाले बिलों की सूची में इसका कोई जिक्र नहीं था। संसद का मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई से आरंभ होगा और इसके 13 अगस्त तक चलने की संभावना है।
1. विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026
- लोकसभा सचिवालय ने एक बुलेटिन जारी कर बताया कि सरकार ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (एफसआरए) को विचार और पारित कराने के लिए भी सूचीबद्ध किया है।
- यह विधेयक बजट सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया गया था लेकिन उस समय इस पर विचार और पारित नहीं कराया गया। माना जा रहा है कि उस समय केरल में विधानसभा चुनाव होने के कारण कुछ वर्गों, खासकर ईसाई परमार्थ संगठनों के विरोध के चलते इस विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया।
2.राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026
- लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पेश करने, उस पर विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
- यह विधेयक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में संशोधन का प्रावधान करता है। सूत्रों के अनुसार, इसके माध्यम से सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ का अपमान करने या उसके गायन में बाधा डालने को दंडनीय अपराध बनाना चाहती है।
3. जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी पेश करने, विचार करने और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। मंगलवार को कैबिनेट से मंजूरी पाने वाले ‘जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल’ में प्रस्ताव है कि दो साल बाद रिपोर्ट किए गए जन्म और मृत्यु का पंजीकरण केवल ‘फर्स्ट-क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट’ के आदेश पर ही हो सकेगा।
- यह मौजूदा प्रावधान की जगह लेगा, जिसके तहत DM, SDM या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की मंजूरी ही काफी होती थी। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन कर जन्म एवं मृत्यु के विलंबित पंजीकरण से संबंधित प्रावधानों को और अधिक सख्त बनाना है।
4. सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक
‘सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक’ उस अध्यादेश पर संसद की मंजूरी की मुहर लगाएगा, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 कर दी गई है।
5. विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025
- यह विधेयक पिछले वर्ष दिसंबर में लोकसभा में पेश किया गया था जिसके बाद इसे संसद की संयुक्त समिति के पास भेज दिया गया।
- विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (वीबीएसए) विधेयक, 2025 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को समाप्त कर एक एकीकृत नियामक आयोग बनाने का प्रस्ताव रखा गया है ताकि देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव किए जा सकें।
- सरकार ने गुरुवार को समिति की रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद विधेयक को विचार और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया।
6. आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026
- सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने की योजना बना रही है।
- यह विधेयक उस अध्यादेश का स्थान लेगा, जिसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों (जी-सेक) में निवेश से मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर विदेशी निवेशकों को आयकर से छूट दी गई थी।
- पश्चिम एशिया संकट के कारण रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से सरकार ने पिछले महीने यह अध्यादेश जारी किया था।
- मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले नए विधेयकों की सूची के अनुसार, आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026, आयकर (संशोधन) अध्यादेश, 2026 का स्थान लेगा।
7. सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026
- इस विधेयक का मकसद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 को MSME के बदलते माहौल के अनुरूप बनाना है। साथ ही, इसका उद्देश्य ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना और MSME इकोसिस्टम में भरोसे पर आधारित नियम लागू करना है।
- यह विधेयक देर से होने वाले भुगतान की समस्या को हल करने के सिस्टम को मजबूत करने और MSEs के लिए मध्यस्थता फैसलों (arbitral awards) को लागू करने का प्रावधान करता है।
- साथ ही, यह राज्यों को सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC) के गठन के बारे में फैसला लेने के लिए लचीलापन और अनुकूल प्रावधान देता है, जिससे और अधिक MSEFCs बन सकें।
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का क्या होगा?
माना जा रहा है कि सरकार परिसीमन और 2029 से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने वाला बिल फिर से ला सकती है। खासकर तब, जब पिछले सत्र में एकजुट विपक्ष ने इसे गिरा दिया था। हालांकि, लोकसभा सचिवालय की ओर से पेश किए जाने वाले बिलों की सूची में इसका कोई जिक्र नहीं था। यह बिल कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही पेश किया जा सकता है; सरकारी सूत्रों का कहना है कि सत्र शुरू होने के बाद ही इसके समय पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।



