
नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर की वह घटना शायद ही पाकिस्तान के जहन से कभी बाहर निकले. जिस HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम भरोसे वह खुद की सुरक्षा का खाका खींचकर बैठा था, उसे भारत के एक छुटकू से ड्रोन ने किसी खिलौने की तरफ तबाह कर दिया था. जी हां, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान की यह घटना पाकिस्तान के लाहौर की है. भारतीय मिसाइलों को रोकने के लिए पाकिस्तान ने लाहौर की सीमाओं पर चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किया था. लेकिन, असल में जब आमने-सामने वाली नौबत आई, तब भारत को मिसाइल की जरूरत ही नहीं पड़ी, सिर्फ छुटकू ड्रोन ने ही उसका काम तमाम कर दिया.
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हार्पी ड्रोन ने यह दिखा दिया कि छोटे से दिखने वाले ड्रोन कितने बड़े हथियार साबित हो सकते हैं. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तो सिर्फ शुरुआत थी. अब भारत ऐसे ‘छुटकू ब्रह्मास्त्र’ तैयार कर रहा है, जो दुश्मन के इलाके में घुसकर खुद अपने टारगेट को तलाशेंगे और फिर उसे तबाह कर देंगे. दरअसल, यहां बात हो रही है लोइटरिंग म्यूनिशन यानी आत्मघाती ड्रोन की. ये ऐसे हथियार हैं, जिसमें मिसाइल और ड्रोन दोनों की खूबियां मौजूद हैं. इन्हें लॉन्च करने के बाद ऑपरेटर किसी इलाके के ऊपर लंबे समय तक निगरानी कर सकता है. जैसे ही सही लक्ष्य दिखाई देता है, यह ड्रोन सीधे उस पर हमला कर खुद भी नष्ट हो जाता है.
भारत में बनेगा यूरोप का घातक ड्रोन
भारत की कंपनी एसएमपीपी ने यूरोप के बड़े डिफेंस ग्रुप केएनडीएस के साथ समझौता किया है. इस समझौते के तहत केएनडीएस के कई मॉर्डन लोइटरिंग म्यूनिशन भारत में बनाए जाएंगे, जो कोलिब्री, लैरिने, वेलोस और रोड्योर जैसे सिस्टम से लैस होंगे. इन ड्रोन की खासियत यह है कि ये 45 मिनट से लेकर 3 घंटे तक हवा में रह सकते हैं. यानी दुश्मन के इलाके में पहुंचने के बाद ये जल्दबाजी में हमला नहीं करते, बल्कि सही मौके का इंतजार करते हैं. जैसे ही एयर डिफेंस सिस्टम, रडार, टैंक या कोई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाना नजर आता है, ये सीधे हमला बोल देते हैं.
रूस-यूक्रेन से लेकर अमेरिका-ईरान युद्ध तक पूरी दुनिया ने देखा है कि छोटे ड्रोन बड़े हथियारों को भी चुनौती दे सकते हैं. लाखों डॉलर की कीमत वाले टैंक और एयर डिफेंस सिस्टम को कुछ लाख रुपये के ड्रोन्स ने मिट्टी में मिला दिया. इसी वजह से दुनिया की बड़ी सेनाएं अब बड़ी मिसाइलों के साथ-साथ लोइटरिंग म्यूनिशन पर भी तेजी से खर्च कर रही हैं. भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में ऐसे ड्रोन सीमाओं पर भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं.



