व्यापार

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर मुहर अभी बाकी, लेकिन परिस्थितियों का रखना होगा खयाल

नई दिल्ली: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने वह करने और कहने का साहस दिखाया, जिसके बारे में वॉशिंगटन के व्यापारिक सहयोगी देश बस सोच ही सकते थे। डॉनल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को गैर-कानूनी ठहराने की खबर ने दुनियाभर के निर्यातकों को राहत दी है। हालांकि इससे वह अनिश्चितता कम नहीं हो जाती, जो ट्रंप की नीतियों के चलते पैदा हुई है। अब एक दूसरे कानून के जरिये नए टैरिफ थोप देना बताता है कि ट्रंप जिद पर अड़े हुए हैं।

24 घंटे में ही बदल दिए टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले इंटरनैशनल इमरजेंसी इकॉनमिक पावर्स एक्ट का उपयोग करके मनमाने टैरिफ लगाए थे। अब उन्होंने ट्रेड एक्ट 1974 के सेक्शन 122 का इस्तेमाल किया है। करीब 50 साल पहले इस एक्ट को पास किया गया था और अब पहली बार इसे इस्तेमाल में लाया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप ने एक समान 10% टैरिफ लगाए थे, लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते और उसे रिवाइज करके 15% कर दिया।

प्रेसिडेंट के लिए नए कानूनी रास्ते

अमेरिका में जितनी तेजी से फैसलों में बदलाव हो रहा है, उसने पूरी ग्लोबल इकॉनमी को आशंका में डाल दिया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हालिया व्यापार समझौतों पर क्या असर पड़ेगा, इसका सही अंदाजा किसी को नहीं। ट्रेड एक्ट 1974 से राष्ट्रपति को 150 दिनों के लिए अधिकतम 15% टैरिफ लगाने का अधिकार मिलता है। इसके बाद कांग्रेस की मंजूरी चाहिए। लेकिन, ट्रंप का ऐसा मिजाज नहीं कि वह अपने किसी फैसले के लिए कांग्रेस की सहमति मांगें। उनकी टीम नए कानूनी रास्ते तलाश रही है।

ट्रंप के निशाने पर न्यायपालिका

ट्रंप अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से खफा हैं, खासकर उन जजों से जिनकी नियुक्ति रिपब्लिकन दौर में हुई। उन्होंने जिस भाषा में आलोचना की है, उसे अमेरिका में लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा के लिए सही नहीं माना जा रहा। ट्रंप पर यह आरोप बहुत पुराना है कि उन्हें संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा व स्वतंत्रता का ख्याल नहीं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को नीचा दिखाने और खुद को सही साबित करने के लिए वह कुछ और भी चौंकाने वाले कदम उठा सकते हैं। भारत और दुनिया को याद रखना चाहिए कि बस रेसिप्रोकल टैरिफ खत्म हुआ है, वाइट हाउस के काम करने का तरीका नहीं बदला।

भारत पर कितना होगा असर?

नई दिल्ली में स्थिति का आकलन चल रहा है। हाल में अमेरिका के साथ FTA पर सहमति बनी, जिससे 50% टैरिफ 18% पर आ गया। 18 की तुलना में 15 कम है, पर अब ज्यादातर देश इसी कैटिगरी में होंगे। ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ डील पर असर नहीं पड़ेगा। डील पर मुहर लगनी बाकी है, लेकिन भारत को सौदेबाजी में बदली हुई परिस्थितियों का खयाल रखना चाहिए।

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