जिनेवा मिशन फंड हेराफेरी केस, 2 करोड़ घोटाले के आरोपी मोहित को राउज एवेन्यू कोर्ट से जमानत

दिल्ली के रॉउज एवन्यू कोर्ट ने भारत के जिनेवा स्थित स्थायी मिशन से करीब 2 लाख स्विस फ्रैंक लगभग 2 करोड़ की कथित हेराफेरी के आरोपी पूर्व अकाउंट्स अधिकारी मोहित को जमानत दे दी. यह फैसला स्पेशल जज विजेता सिंह रावत ने सुनाया जो आरोपी मोहित की तीसरी नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थीं. मोहित 17 दिसंबर 2024 को जिनेवा मिशन में असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर के तौर पर नियुक्त हुआ था.
कोर्ट ने माना कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर हैं और यह एक सोची-समझी, लगातार और तकनीकी तरीके से की गई हेराफेरी का मामला है. इससे पहले 22 जनवरी 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज की जा चुकी थी.
25 अक्टूबर से हिरासत में है मोहित
हालांकि अदालत ने यह भी कहा कि जांच कई महीनों से चल रही है और अभी भी कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब जांच अधिकारी को देना है.जिसमें समय लगेगा, वहीं मोहित 25 अक्टूबर 2025 से हिरासत में है. कोर्ट ने कहा कि इस समय आरोपों पर अंतिम राय देना जल्दबाजी होगी और इस पर फैसला चार्ज तय होने के समय किया जाएगा. अदालत ने यह भी माना कि जांच पूरी हो चुकी है. आरोपी से अब पूछताछ की जरूरत नहीं है और सभी सबूत दस्तावेजी हैं. साथ ही ज्यादातर गवाह सरकारी अधिकारी हैं..जो आरोपी से वरिष्ठ पद पर हैं.
कोर्ट ने कहा जांच पूरी हो चुकी है लिहाजा जेल में रखने का कोई आधार नहीं
कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई ठोस कारण सामने नहीं आया जिससे लगे कि आरोपी सबूतों से छेड़छाड़ करेगा, गवाहों को प्रभावित करेगा या न्यायिक प्रक्रिया से भागेगा. इन सभी बातों को देखते हुए कोर्ट ने मोहित को 75 हजार के बेल बॉन्ड और इतनी ही राशि के एक जमानती पर राहत दे दी. साथ ही उसे देश छोड़कर बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी.
आरोपी ने कुछ वेंडर केQRकोड बदलकर अपनी खुद कीQRकोड लगा दी
प्रॉसिक्यूशन के मुताबिक मोहित ने चालाकी से कुछ वेंडर के QR कोड बदलकर अपनी खुद की QR कोड लगा दी थी. जिससे पेमेंट सीधे उसके UBS बैंक खाते में जाने लगी. इतना ही नहीं उसने बैंक स्टेटमेंट में भी हेराफेरी कर अपने नाम की जगह वेंडर का नाम डाल दिया ताकि जांच में यह गड़बड़ी पकड़ में न आए. यह पूरा मामला तब सामने आया जब ऑडिट के दौरान एक ही वेंडर को डुप्लीकेट पेमेंट होने की बात सामने आई जिसके बाद गहराई से जांच शुरू की गई.



