FSSAI ने ज्यादा नमक, चीनी और फैट वाले पैक्ड फ़ूड पर लाल चेतावनी लेबल लगाने का दिया प्रस्ताव

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने ‘फ़्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग’ (FoPL) को एक ही चरण में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत, ज्यादा नमक, चीनी या फैट वाले पैक्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स पर साफ तौर पर दिखने वाले वॉर्निंग लेबल लगाए जाएंगे।
यह प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट में दायर एक हलफनामे के जरिए दिया गया था। कोर्ट ने फूड रेगुलेटर और सरकार से फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल लागू करने के लिए एक साफ समय-सीमा मांगी थी। प्रस्तावित फ्रेमवर्क के तहत, जिन पैक्ड फ़ूड प्रोडक्ट्स में चिंता वाले न्यूट्रिएंट्स (पोषक तत्व) तय सीमा से ज्यादा होंगे, उनके पैक के सामने सफेद चौकोर बैकग्राउंड पर लाल रंग का हेक्सागन (छह कोनों वाली आकृति) दिखाना जरूरी होगा।
इस वॉर्निंग लेबल का मकसद ग्राहकों को खरीदारी के समय साफ और आसानी से समझ आने वाली न्यूट्रिशनल जानकारी देना है, ताकि वे खाने-पीने की चीज़ों के बारे में सही फैसला ले सकें। FSSAI ने कहा कि वह FoPL को चरणों में लागू करने के बजाय एक ही चरण में लागू करने की योजना बना रहा है। रेगुलेटर ने बताया कि वॉर्निंग का यह फ़ॉर्मेट कनाडा में अपनाए गए मॉडल जैसा ही है और इसे ऐसे न्यूट्रिएंट्स को उजागर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिनके ज़्यादा सेवन से सेहत को जोखिम हो सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार, अगर किसी फ़ूड प्रोडक्ट में चिंता वाले न्यूट्रिएंट्स (जैसे नमक, चीनी या फैट) में से सिर्फ़ एक भी तय सीमा से ज़्यादा होता है, तो भी उस पर वॉर्निंग लेबल लगाना होगा। ऐसे मामलों में, उस खास न्यूट्रिएंट को लाल हेक्सागन के अंदर दिखाया जाएगा। अगर दो या तीन न्यूट्रिएंट्स तय सीमा से ज़्यादा होते हैं, तो उन सभी न्यूट्रिएंट्स का ज़िक्र एक ही वॉर्निंग सिंबल के अंदर किया जाएगा।
रेगुलेटर ने साफ किया कि लेबलिंग की ज़रूरत सिर्फ़ उन प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं होगी जिनमें चिंता वाले कई न्यूट्रिएंट्स हों। इसके बजाय, कोई भी पैक्ड फूड आइटम जिसमें तय न्यूट्रिएंट्स में से कोई एक भी ज़्यादा मात्रा में पाया जाता है, वह प्रस्तावित वॉर्निंग सिस्टम के दायरे में आएगा।
FSSAI ने कहा कि प्रस्तावित फॉर्मेट का मकसद ग्राहकों को पैक्ड फ़ूड के न्यूट्रिशनल प्रोफ़ाइल के बारे में साफ़ और खास जानकारी देना है। रेगुलेटर ने आगे कहा कि नियमों को अंतिम रूप देने से पहले इस फ्रेमवर्क पर जनता और इंडस्ट्री से सलाह-मशविरा किया जाएगा।
फूड सेफ्टी अथॉरिटी का अनुमान है कि सलाह-मशविरे की प्रक्रिया और ‘फ़ूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट’ व संबंधित नियमों के तहत ज़रूरी अन्य रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ड्राफ्ट नियमों को जारी करने और अंतिम रूप देने में लगभग चार महीने लगेंगे।



