राजनीति

‘वंदे मातरम्’ से ‘सनातन’ विवाद तक, तलपति विजय की चुप्पी ने क्यों चौंकाया?

असम और बंगाल के मुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण समारोह बिना किसी विवाद के संपन्न हो गए, लेकिन तमिलनाडु में टीवीके के तलपति जोसेफ विजय को बहुमत के लिए जरूरी आंकड़ों का कई दिनों तक इंतजार करना पड़ा और जब अन्नाद्रमुक के तीस विधायकों के एक समूह ने ‘समर्थन’ का एलान कर दिया, तब नए मुख्यमंत्री के रूप में विजय का शपथ समारोह संपन्न हुआ।

समारोह में उनके ऐन बाजू में विराजे विपक्ष के नेता भी तलपति की चमक में खिले नजर आए। इस समारोह की नई बात थी- सबसे पहले राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ का गायन, उसके बाद राष्ट्रगान हुआ। फिर तमिलनाडु का ‘राज्य गीत’ गाया गया। शपथ लेने के बाद अपने बेहद संक्षिप्त वक्तव्य में मुख्यमंत्री विजय ने अपनी कलाई घड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा कि वक्त शुरू होता है अब..! उनकी इस शैली पर जम कर तालियां बजीं।

उधर, केरल के नए मुख्यमंत्री का चुनाव कई दिनों तक फंसा रहा। चर्चक कहें कि तीन गुट, तीन नाम। फिर तीन में से एक वीडी सतीशन का नाम तय हुआ, लेकिन इसके पीछे भी ऐसी अफवाहें रहीं कि उनके नाम के पीछे एक अल्पसंख्यक दल का दबाव रहा।

इसी बीच, प्रधानमंत्री ने अपने दो भाषणों के जरिए जनता से अपील की कि युद्ध के कारण तेल संकट से निपटने के लिए जनता तेल की खपत कम करे… एक साल सोना न खरीदे… प्राकृतिक खाद का उपयोग करे और लोग ‘घर से काम’ करें…।

प्रधानमंत्री की इस अपील ने अचानक तेल संकट को चर्चा में ला दिया। नतीजतन, एक ओर विपक्ष की ‘हाय-हाय’ शुरू, तो दूसरी ओर भाजपा शासित राज्य सरकारों ने प्रधानमंत्री की अपील पर अमल शुरू कर दिया। खबरें आने लगीं कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के काफिले में अब दो ही गाड़ियां होंगी। कई भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री कारों के काफिलों में पचास फीसद कटौती करेंगे।

उधर, विपक्ष गोलबंद कि जनता को नसीहत देने वाले ये कौन होते हैं? सत्ता प्रवक्ता कहते कि ये गलत बोल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपील की है, यह आदेश नहीं है। फिर खबर आई कि सरकार ने पेट्रोल के दाम तीन रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इसके बाद वही हुआ जो होना था। एक ओर विपक्ष की ‘हाय-हाय’, दूसरी ओर सत्ता प्रवक्ताओं की तुलनात्मक बहसें कि जब इनकी सरकार थी, तो तेल के दाम तब-तब इतने-इतने बढ़े… दुनिया के देशों ने बढ़ाए, हमने नहीं बढ़ाए। अब बढ़ाने पड़ रहे हैं!

अब संवाददाता पेट्रोल पंपों से सीधा प्रसारण करते हुए कि पेट्रोल के दाम बढ़े हैं, आप कैसा महसूस कर रहे हैं? ‘हां, महसूस तो हो रहा है।’ दुनिया में दाम बढ़े हैं, क्या आपको लगता था कि यहां भी बढ़ेंगे? अब आगे क्या करेंगे? जवाब- ‘एडजस्ट करेंगे। दुनिया भर के देशों ने बढ़ाए हैं। अब आकर सरकार ने यहां बढ़ाए हैं।’

इसी बीच साइकिल वाले एक नेताजी ने साइकिल की महिमा बतानी शुरू कर दी कि आगे बढ़ना है, तो साइकिल अपनाओ। सभी संवाददाताओं की एक-सी रिपोर्टिंग होने लगी। पहला सवाल यही कि कैसा लग रहा है और जवाब भी वही कि महसूस तो हो रहा है, लेकिन क्या करें मजबूरी है। बहुत कोंचने पर जवाब आता कि यह सब अमेरिका-ईरान के युद्ध का परिणाम है। इसमें भारत का क्या दोष? इधर महंगाई पर चर्चा, उधर प्रधानमंत्री की यूएई समेत पांच दिवसीय यात्रा की खबरें।

इस बीच ‘नीट’ का प्रश्नपत्र बाहर होने की खबर जैसे ही सामने आई, वैसे ही परीक्षार्थी सड़कों पर उतरते दिखे। परीक्षा कराने वाली संस्था एनटीए पर समाचार चैनलों पर धिक्कार बरसे। निदेशक के इस्तीफे की मांग हुई। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग हुई। सत्ता प्रवक्ता एकदम रक्षात्मक रहे। चर्चाओं में कई चर्चक कोचिंग सेंटरों के माफिया को जिम्मेदार बताते रहे। आखिरकार जांच सीबीआइ को सौंपी गई, लेकिन इस पर भी कई एंकर कहते रहे कि सीबीआइ हर बार लीक की जांच करती है, लेकिन जांच का क्या हुआ, पता नहीं चलता। पेपर लीक कराने वाला माफिया बड़ा मजबूत है। कोई जांच कर ले, छोटी मछलियां ही पकड़ी जाती हैं।

शुक्रवार की सुबह केंद्रीय शिक्षामंत्री संवाददाता सम्मेलन कर साफ करते हैं कि इक्कीस जून को नीट की परीक्षा फिर से होगी… छात्रों के आने-जाने की व्यवस्था होगी। उन पर किसी तरह का आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। उनको परीक्षा केंद्र चुनने का भी विकल्प मिलेगा। छात्रों को 15 मिनट अतिरिक्त दिए जाएंगे… पेपर लीक पर हमारी ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति है… लीक करने वालों में से किसी को छोड़ा नहीं जाएगा।

भले ही तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री तलपति जोसेफ विजय के शपथ समारोह के शुरू में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ गाया गया हो, लेकिन जैसे ही विधानसभा सत्र शुरू हुआ, वैसे ही ‘सनातन’ पर डीएमके नेता के वही ‘सुभाषित’ बरसे, जो अरसा पहले बरस चुके थे। एक ओर ‘वंदे मातरम्’ का गायन, दूसरी ओर ‘सनातन के नाश का आह्वान’ और तलपति जी की चुप्पी चकित करने वाली रही।

सनातन पर बयान, विवाद बढ़ने पर लिया यू-टर्न

तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सनातन धर्म को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। इस बार विवाद तब बढ़ा, जब डीएमके नेता और तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विधानसभा में सनातन धर्म को खत्म करने की बात दोहराई। उनके बयान पर भाजपा समेत कई दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद उन्होंने सफाई देते हुए अपने पुराने रुख को नए अंदाज में समझाने की कोशिश की।

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के बेटे और विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने एक बार फिर सनातन धर्म को खत्म करने की बात कही है। उन्होंने यह बात विधानसभा में मुख्यमंत्री जोसेफ के मौजूदगी में कही है। उदयनिधि ने सनातन को बांटने वाला भी कहा है।

पिछली सरकार में मंत्री रहते हुए उदयनिधि ने कई सनातन को खत्म करने संबंधी बयान दिए थे। नई विधानसभा में बतौर विपक्ष के नेता उदयनिधि फिर एक बार सनातन के खिलाफ यह बात कही है।

डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “सनातन, जिसने लोगों को बांटा, उसे खत्म कर देना चाहिए।”

पश्चिम बंगाल में वंदे मातरम नहीं बजाया गया- उदयनिधि

आगे उन्होंने कहा, “बीते दिन मुख्यमंत्री को हमारे नेताओं और अन्य नेताओं ने शुभकामनाएं दी। यह राजनीतिक शिष्टाचार सदन में जारी रहना चाहिए। भले ही हम सत्ताधारी सरकार और विपक्ष के तौर पर अलग-अलग कतारों में बैठते हों, लेकिन हम सभी को तमिलनाडु के विकास के लिए मिलकर काम करना चाहिए।”

आगे उदयनिधि ने तमिलनाडु राज्य गीत का मुद्दा उठाते हुए कहा, “विपक्षी दलों ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वंदे मातरम के बाद तमिलनाडु के राज्य गीत बजाया गया। लेकिन पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में वंदे मातरम नहीं बजाया गया था, जबकि यहां इसे बजाया गया। आप सभी जानते हैं कि वहां के राज्यपाल कौन हैं। सरकार को ऐसा दोबारा नहीं होने देना चाहिए। हमारे तमिलनाडु राज्य गीत को कभी दूसरे स्थान पर नहीं धकेलने देना चाहिए।”

आगे कहा, “मैंने और मुख्यमंत्री एक ही कॉलेज में पढ़ाई की है। हम अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करेंगे। मुख्यमंत्री को हमारे सुझावों को मानना चाहिए।”

पहले भी दे चुके सनातन को खत्म करने वाला बयान

इससे पहले मंत्री रहने के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने 2023 में सनातन विरोधी बयान दिया था। 2 सितंबर 2023 को तमिलनाडु में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, “सनातन धर्म लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने वाला विचार है, इसे खत्म करना मानवता और समानता को बढ़ावा देना है।”

आगे उदयनिधि ने कहा था, “जिस तरह हम मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना को खत्म करते हैं, उसी तरह सिर्फ सनातन धर्म का विरोध करना ही काफी नहीं है। इसे समाज से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए।”

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