कमर के नीचे दर्द और मवाद को न समझें मामूली, हो सकता है पाइलोनाइडल साइनस

मऊ: जिले में इन दिनों एक ऐसी बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं, जो रीढ़ की हड्डी के सबसे निचले हिस्से (टेलबोन) के पास, दोनों नितंबों के बीच त्वचा के अंदर एक छोटी सुरंग (साइनस) बनाकर गांठ का रूप ले लेती है. समय पर इलाज न कराने पर यह समस्या गंभीर हो सकती है और कई मामलों में सर्जरी ही इसका प्रभावी इलाज रह जाता है. आइए जानते हैं क्या है यह बीमारी, इसके लक्षण, बचाव और उपचार.
पाइलोनाइडल साइनस बढ़ा रही लोगों की परेशानी
लोकल 18 से बातचीत में प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सर्जन डॉ. मोहम्मद अरशद ने बताया कि पाइलोनाइडल साइनस (Pilonidal Sinus) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें त्वचा के नीचे एक साइनस ट्रैक (सुरंग) बन जाता है. इसमें घाव बन जाता है और उस स्थान से बार-बार मवाद (पस) निकलता रहता है.
उन्होंने बताया कि यह समस्या अधिकतर उन लोगों में देखी जाती है, जिनकी कमर या पीठ के निचले हिस्से पर बाल अधिक होते हैं और जो लंबे समय तक लगातार कुर्सी पर बैठे रहते हैं. ऐसे लोगों में बाल त्वचा के भीतर चले जाते हैं और धीरे-धीरे संक्रमण पैदा कर देते हैं, जिससे साइनस बन जाता है.
बार-बार होने की रहती है आशंका
डॉ. अरशद के अनुसार, लंबे समय तक बैठने के कारण नुकीले बाल त्वचा के अंदर प्रवेश कर जाते हैं और धीरे-धीरे एक ट्रैक (सुरंग) बना लेते हैं. यदि इस बीमारी का सही तरीके से इलाज नहीं किया जाए, तो इसके दोबारा होने (रिकरेंस) की संभावना अधिक रहती है.
उन्होंने बताया कि सर्जरी के दौरान रॉम्बॉइड (Rhomboid) फ्लैप तकनीक का इस्तेमाल करने से बीमारी दोबारा होने का खतरा काफी कम हो जाता है. यह एक विशेष प्रकार की सर्जरी है, जिसे अनुभवी सर्जन द्वारा ही किया जाना चाहिए. सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को काफी राहत मिलती है और लगातार मवाद निकलने की समस्या भी खत्म हो जाती है.
छोटी सी लापरवाही बन सकती है बड़ी परेशानी
डॉक्टर का कहना है कि यदि पाइलोनाइडल साइनस के लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से इलाज कराना चाहिए. समय पर उपचार न मिलने पर संक्रमण बढ़ सकता है, मवाद लगातार निकलता रहता है, कपड़े खराब होते हैं और बैठने-उठने के साथ-साथ चलने-फिरने में भी दिक्कत होती है.
यदि बीमारी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए, तो साइनस ट्रैक बड़ा हो सकता है और संक्रमण आसपास के ऊतकों तक फैल सकता है. ऐसी स्थिति में बड़ी सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है और रिकवरी में भी अधिक समय लग सकता है. इसलिए शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से परामर्श लेकर समय पर उपचार कराना सबसे बेहतर विकल्प है.



