अंतर्राष्ट्रीय

चीन की जिस लैब में बना था कोरोना वायरस, उसे अमरीका के टॉप साइंटिस्ट ने दिए थे पैसे

एजेंसियां — न्यूयार्क

पूरी दुनिया को झकझोर देने वाली कोरोना महामारी को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। कुछ दिनों पहले अमरीकी खुफिया विभाग के निदेशक का पद छोडऩे का ऐलान करने वाली तुलसी गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन एक ऐसा धमाका किया है, जिसने पूरी दुनिया में हडक़ंप मचा दिया है। गबार्ड ने कहा है कि अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के पूर्व चीफ मेडिकल एडवाइजर एंथनी फाउची ने चीन के वुहान में उस रिसर्च लैब को फंड दिया था, जहां से कोरोना वायरस फैला था। ऐसा माना जाता है कि इसी लैब से कोविड-19 महामारी फैली थी। गबार्ड ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन कभी न देखे गए उन गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक कर दिया है, जो सीधे तौर पर जो बाइडन के पूर्व मुख्य चिकित्सा सलाहकार डा. एंथनी फाउची को कटघरे में खड़ा करते हैं। बता दें कि फाउची ने 2020 की शुरुआत में अमरीका में कोविड वायरस का संक्रमण आने पर बाइडन सरकार की कोविड रणनीति का नेतृत्व किया था। गबार्ड द्वारा जारी दस्तावेजों के अनुसार, एंथनी फाउची ने अमरीकी टैक्सपेयर्स के लाखों डॉलर चीन की उसी वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी को दिए, जिसे कोरोना महामारी का केंद्र माना जाता है। गुप्त दस्तावेजों के मुताबिक, फाउची ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ़ वायरोलॉजी में चमगादड़ कोरोना वायरस पर खतरनाक गेन-ऑफ-फ़ंक्शन रिसर्च के लिए ये फंड दिए थे। तुलसी गबार्ड ने फाउची पर सीधा हमला किया है कि उन्होंने 2024 में अमरीकी कांग्रेस (संसद) के सामने शपथ लेकर झूठ बोला था। गबार्ड का आरोप है कि फाउची ने इंटेलिजेंस कम्युनिटी के साथ मिलकर लैब-लीक के सबूतों को दबाया और दुनिया के सामने वायरस के प्राकृतिक उत्पत्ति का फर्जी नैरेटिव पेश किया, ताकि उनके द्वारा फंड की गई खतरनाक रिसर्च छिपी रहे।

गबार्ड के ऑफि़स ने एक बयान में कहा कि फ़ाउची ने वायरस के लैब-लीक से फैलने की सच्चाई को दबाने के लिए राजनीति से प्रेरित अधिकारियों के साथ मिलकर काम किया। बयान में कहा गया है कि ये दस्तावेज़ कोविड-19 पर आईसी (इंटेलिजेंस कम्युनिटी) के आकलन को प्रभावित करने और उनमें हेरफेर करने में फाउची की सीधी भूमिका का पर्दाफाश करते हैं। साथ ही, यह बताते हैं कि कैसे फ़ाउची ने 2024 में कांग्रेस से झूठ बोला था, जब उन्होंने शपथ के तहत वायरल रिसर्च के बारे में इंटेलिजेंस अधिकारियों के साथ बातचीत की जानकारी या उसमें अपनी भागीदारी से इनकार किया था। गबार्ड ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी, अमरीकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा। सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमरीकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. फाउची जैसे राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने अपने गलत कामों और सत्ता के दुरुपयोग को छुपाया, खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सूचानाओं तक निर्वाचित राष्ट्रपति की पहुंच सीमित करके उनकी छवि को कमजोर किया।

सच बोलने वालों का गला घोंटा गया

खुलासे में यह भी सामने आया है कि जिन व्हिसलब्लोअर्स या विशेषज्ञों ने फाउची के झूठ को चुनौती देने की कोशिश की, उन्हें डराया-धमकाया गया और उनके करियर बर्बाद कर दिए गए। गबार्ड ने इसे डीप स्टेट प्लेबुक का हिस्सा बताते हुए कहा कि फाउची जैसे लोगों ने अपनी गलतियों को छिपाने के लिए न केवल जनता को गुमराह किया, बल्कि निर्वाचित राष्ट्रपति तक को महत्त्वपूर्ण तथ्यों से दूर रखा। 85 वर्षीय फाउची जिन्होंने लगभग 38 वर्षों तक अमरीकी स्वास्थ्य एजेंसी पर राज किया, अब इन गंभीर आरोपों के घेरे में हैं।

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