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एनडीए की नई टीम की आहट: मंत्रालय फेंटे जाएंगे, शिक्षा मंत्रालय हॉट सीट; 70 पार वाले निशाने पर?

केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलें तेज हैं। छह-सात सितंबर की तारीख पर नजर है। कई मंत्रियों के विभाग बदल सकते हैं। 70 पार नेताओं की जिम्मेदारी घट सकती है। सहयोगी दलों को भी जगह मिलने की अटकलें हैं। क्या पीएम नरेंद्र मोदी की टीम में बड़े बदलाव होंगे?

राजनीति में कई बार जो होता है, उससे ज्यादा वह बोलता है जो नहीं होता। बुधवार, दो सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिन पहले ही बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन से लौट चुके थे। दिल्ली में थे, जल संसाधन मंत्रालय के कार्यक्रम में भी गए। इसके बावजूद बुधवार खाली गुजर गया। इस सन्नाटे को समझना हो तो पिछले बुधवार पर लौटना होगा।

26 अगस्त..! मंत्रिमंडल की बैठक हुई और बाद में कोई फैसला नहीं बताया गया। यानी मेज पर ऐसा कुछ रखा ही नहीं गया था, जिसकी घोषणा होनी हो। लेकिन उसी बैठक में प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों से जो कहा, वही सबसे बड़ा संकेत है। उन्होंने कहा, अगली मंत्रिमंडल बैठक में नए साथी जुड़ेंगे। यह बात पहली बार अमर उजाला बता रहा है। और यही बात बताती है कि मंत्रिमंडल की अगली बैठक अब उसी दिन होगी, जिस दिन मेज के चारों तरफ कुछ नए चेहरे बैठे होंगे।

अब सारा हिसाब कैलेंडर का है…और कैलेंडर बहुत तंग है
विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन से पांच सितंबर तक यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा पर रहेंगे। 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन है, जिसकी मेजबानी भारत कर रहा है और जिसमें दुनियाभर के नेता जुटेंगे। उसके बाद 17 सितंबर से भाजपा का महीने भर चलने वाला सेवा संकल्प अभियान शुरू हो जाएगा। इन तारीखों के बीच छह और सात सितंबर यानी रविवार और सोमवार की िखड़की बचती है। सत्ता के गलियारों में यही अनुमान है कि इसी खिड़की में मोदी की टीम नए कलेवर में सामने आ सकती है।

  • फेंटे जाएंगे मंत्रालय : मंत्रालय बड़े पैमाने पर फेंटे जाएंगे। तीन, चार विभागों वाले मंत्रियों से कुछ जिम्मेदारियां लेकर नए चेहरों को दी जा सकती हैं। एक चौंकाने वाला नाम सामने आ सकता है। युवा पीढ़ी से संवाद की क्षमता भी तौली जा रही है। शिक्षा मंत्रालय में बौद्धिक चेहरा दिख सकता है।
  • उम्र सबसे बड़ी कसौटी: कैबिनेट में 70 वर्ष से अधिक के 14 मंत्री हैं और इनमें कटौती तय है। इनमें से कुछ को संगठन जबकि कुछ को राज्यों में भूमिका दिए जाने की उम्मीद है।  
  • गठबंधन का भी दबाव : तृणमूल कांग्रेस से टूटकर बना 20 सांसदों का गुट अब एनडीए में है। उन्हें जगह देनी होगी।  शिंदे वाली शिवसेना के सांसद भी जेडी (यू) से ज्यादा हो चुके हैं। एनसीपी भी ज्यादा सीटें मांग रही है। डीएमके को साधने में भी मंत्रिपद काम आएगा।
  • यूपी : सांसद रवि किशन पर फोकस
    अभी फोकस उत्तर प्रदेश पर है और वहां से भी रवि किशन का नाम सबसे चर्चा में है। जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान सबसे अधिक मीम उनपर ही बने। वह ब्राह्मण समुदाय से आते हैं और भाजपा राज्य में इस जाति के वोट किसी भी हाल में साधना चाहती है। जाहिर है, फेरबदल में उन्हें मौका मिल सकता है।
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