जरा हट के

संस्कृत विद्वानों से भरा है यह गांव, यही है बोलचाल की भाषा, आज भी संस्कृत में करते हैं शास्त्रार्थ

मधुबनी. सुनकर यकीन नहीं होगा. लेकिन ये बिलकुल सच है. बिहार के मधुबनी जिले में एक ऐसा गांव है जहां के लोग अब भी संस्कृत में बात करते हैं. सिर्फ बात ही नहीं करते बल्कि शास्त्रार्थ तक करते हैं. वो इसे अपनी प्राथमिक भाषा मानते हैं. हर साल यहां संपूर्ण मिथिला और देश के संस्कृत के विद्वान दो दिन के लिए आते हैं और संस्कृत में वाद विवाद करते हैं.

ये है मधुबनी जिले का ठाडी गांव. इस गांव में 12 वर्ण के लोग रहते हैं. इनमें सबसे ज्यादा ब्राह्मण परिवार हैं. यहां के लोग अभी भी अपनी पहली भाषा के तौर पर संस्कृत को ही चुनते हैं. इनकी संस्कृत इतनी अच्छी है कई लोग संस्कृत के शिक्षक के तौर पर भी विश्वविधालय, विधालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं. वो नयी पीढ़ी यानि अपने बच्चों को संस्कृत से जोड़े हुए हैं.

संस्कृत में शास्त्रार्थ
ठाडी गांव के लोगों की संस्कृत इतनी समृद्ध है कि हर साल ये लोग संस्कृत का राजकीय समारोह करते हैं. इस आयोजन में पूरे मिथिलांचल के साथ साथ पूरे भारत देश से विद्वान शिरकत करने आते हैं. हर वर्ष 16 और 17 मार्च को देश के आये विद्वान संस्कृत में वाद विवाद ( शास्त्रार्थ) करते हैं. गांव के सभी संस्कृत भाषी इसमें भाग लेते हैं.

कैसे हैं यहां के लोग
गांव के लोगों का रहन सहन भी बिलकुल परंपरागत है. ये अपनी पुरातन सनातन संस्कृति से जुड़े हुए हैं. यहां के लोग पुरानी मिथिला संस्कृति अपनाकर धोती, पाग और दोपटा को अपना परमुख वस्त्र मानकर उसे धारण करते हैं. इससे कहीं ना कहीं मिथिलांचल की अनुभूति होती है. ग्रामीण बताते हैं कि यहां के लोग यूपीएससी,बीपीएससी की परीक्षा में भी संस्कृत विषय लेकर शामिल होते हैं.

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