राष्ट्रीय

लुटियंस का जाल, गुस्सा और गरिमा… PM मोदी ने 45 NDA सांसदों को दी सलाह

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के हंगामेदार मानसून सत्र के बीच आज शुक्रवार को नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के 45 सांसदों के साथ नाश्ते पर बातचीत की।

पीएम मोदी ने NDA सांसदों को सलाह देते हुए कहा, ‘वे सदन के अंदर की चिंता को बाहर न ले जाएं और लुटियंस दिल्ली के जाल से बचें।’

प्रधानमंत्री ने सांसदों को सलाह देते हुए लुटियंस के जाल से बचने के लिए कहा। उन्होंने किसी भी परिस्थिति में सांसदों से गुस्सा न करने की सलाह दी और कहा कि सभी सांसद गरिमा में रहते हुए अपनी बात रखें। 

पीएम मोदी ने NDA सांसदों को दी सलाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नाश्ते पर इस चर्चा में उद्धव ठाकरे की शिवसेना और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट भी शामिल हुए।

पीएम मोदी ने सांसदों से कहा, ‘किसी को भी टीवी पर कोई फालतू बात नहीं करनी चाहिए। हर समय पूरी गरिमा बनाए रखें।’

पीएम ने युवाओं से जुड़ने के सलाह देते हुए कहा, ‘Facebook, Instagram और X के जरिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहें। युवाओं से जुड़ें, सरकार के कल्याणकारी कामों के बारे में बताएं और युवाओं को खेल गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।’

प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को हर मुद्दे पर शांति से अपनी बात रखने की सलाह देते हुए कहा, ‘गुस्से में बोलने या सदन में गुस्से में चिल्लाने की कोई जरूरत नहीं है।’

‘गुस्से में चिल्लाने की जरूरत नहीं है’

न्यूज एजेंसी एएनआइ को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने कहा, ‘सदन के अंदर की चिंता को बाहर न ले जाएं। क्योंकि कभी-कभी सदन में ऐसा माहौल बन जाता है जिससे चिंता होती है, आपको उसे अपने साथ नहीं ले जाना चाहिए।’

‘चिंता की बात नहीं, मैं आपके साथ हूं’, TMC और उद्धव सेना के बागी सांसदों से बोले पीएम मोदी

संसद के मानसून सत्र के बीच दिल्ली में शुक्रवार की सुबह विपक्ष से अलग होकर NDA के साथ आए सांसदों के लिए खास रही. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन सांसदों के साथ नाश्ते पर मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने उन सांसदों की चिंता दूर करने की कोशिश की, जो अपने पुराने राजनीतिक साथियों से अलग होने के बाद अब नए खेमे में आए हैं. सूत्रों के मुताबिक पीएम मोदी ने उनसे साफ कहा, ‘जो आपके बारे में कहा जा रहा है, उसकी चिंता मत कीजिए. परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं.’ माना जा रहा है कि यह संदेश खास तौर पर TMC और उद्धव ठाकरे गुट से अलग हुए सांसदों के लिए अहम था. बैठक का मकसद इन नए साथियों को NDA में सहज महसूस कराना और आगे की राजनीतिक रणनीति को मजबूत करना भी था.

करीब 45 सांसद इस खास नाश्ते की बैठक में शामिल हुए. इनमें TMC से अलग होकर हाल में नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI में शामिल हुए 20 सांसद, उद्धव सेना से अलग हुए सात सांसद, NPP के 20 सांसद और अजित पवार गुट वाली NCP के दो सांसद शामिल थे. उद्धव ठाकरे की शिवसेना से अलग हुए सात में से छह सांसद आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में जा चुके हैं. बैठक में पीएम मोदी ने खास तौर पर पश्चिम बंगाल के सांसदों से जनता के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने को कहा. सांसदों को उनके सोशल मीडिया एंगेजमेंट की जानकारी वाला प्रिंटआउट भी दिया गया और डिजिटल कनेक्ट मजबूत करने की सलाह दी गई.

बंगाल को लेकर PM मोदी का बड़ा संदेश

  • पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के सांसदों से कहा कि राज्य का विकास देश की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि ‘जब बंगाल आगे बढ़ता है, तो भारत आगे बढ़ता है.’ प्रधानमंत्री मोदी ने सांसदों को संकेत दिया कि राज्य में अभी काफी काम किया जाना बाकी है. उन्होंने सिर्फ बंगाल की बात नहीं की, बल्कि पूर्वोत्तर राज्यों में बेहतर कनेक्टिविटी और तेज विकास की जरूरत पर भी जोर दिया. यानी बैठक में राजनीतिक समीकरणों के साथ विकास का एजेंडा भी सामने रहा.
  • इस दौरान सांसदों को जनता से लगातार संपर्क बनाए रखने की सलाह दी गई. खासकर सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने पर जोर रहा. बैठक में मौजूद सांसदों को उनके डिजिटल प्रदर्शन की जानकारी भी दी गई. पीएम मोदी का संदेश साफ था कि नए राजनीतिक समीकरणों के बीच जनता से कनेक्शन कमजोर नहीं होना चाहिए. सांसदों को अपने-अपने इलाकों में सक्रिय रहने और लोगों के बीच पहुंच बढ़ाने की जरूरत है.

सांसदों की सेहत पर भी पीएम मोदी की सलाह

बैठक में राजनीति के अलावा सांसदों की सेहत पर भी बात हुई. पीएम मोदी ने सांसदों को हर साल मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की जांच कराने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि आगे काम का दायरा बड़ा है और इसके लिए फिट रहना जरूरी है. लंबे राजनीतिक और संसदीय कामकाज के बीच स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. बैठक के इस हिस्से ने माहौल को थोड़ा हल्का भी किया. नाश्ते के दौरान चाय पर भी एक दिलचस्प पल आया. जब मैचा चाय परोसी गई तो बीजेपी सांसद शताब्दी रॉय ने प्रधानमंत्री को बताया कि यह किस तरह की चाय है और पश्चिम बंगाल में भी उपलब्ध है. इसके बाद पीएम मोदी ने फिर बंगाल की पुरानी भूमिका का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि बंगाल को एक बार फिर भारत की प्रगति का इंजन बनना चाहिए. उनका कहना था कि जब बंगाल पहले समृद्ध हुआ करता था, तब देश भी समृद्ध हुआ करता था.

जब सांसदों ने पीएम मोदी से किया मजाक

बैठक में एक हल्का-फुल्का पल भी देखने को मिला. वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री के आसपास मौजूद कई अभिनेता से नेता बने सांसदों का जिक्र किया. इनमें शताब्दी रॉय, सयानी घोष, जून मालिया और रचना बनर्जी शामिल थीं. उन्होंने मजाक में कहा कि पीएम मोदी को इनके साथ तालमेल बनाए रखने के लिए खुद भी फिट रहना पड़ेगा. इस पर बैठक का माहौल कुछ देर के लिए हंसी-मजाक में बदल गया.

उद्धव गुट के सांसदों से मराठी में संवाद

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना यानी शिवसेना (UBT) से अलग हुए सांसदों से मराठी में बातचीत की. वहीं, TMC से अलग हुए सांसदों के साथ भी उन्होंने गर्मजोशी से संवाद किया. इन सांसदों के सामने अयोग्यता की कार्रवाई और अपने-अपने लोकसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की प्रतिक्रिया जैसी चिंताएं हैं. पीएम मोदी की बातचीत को इन चिंताओं को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. बैठक में NCPI की अध्यक्ष और चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार को भी अहम जगह मिली. वह कभी ममता बनर्जी की करीबी सहयोगी मानी जाती थीं. बैठक में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ पहली पंक्ति में जगह साझा की. इससे नए राजनीतिक समीकरणों में उनके महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है.

BJP क्यों बढ़ा रही है गठबंधन का नंबर गेम?

इस पूरी कवायद के पीछे संसद का नंबर गेम भी अहम है. बीजेपी अपने गठबंधन के आंकड़े मजबूत करने की कोशिश कर रही है. लक्ष्य संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का है. यह संख्या अहम विधेयकों को पारित कराने के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है. इनमें परिसीमन और महिलाओं के आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े प्रस्ताव भी शामिल हैं. यही वजह है कि विपक्षी खेमे से अलग होकर NDA के साथ आए सांसदों को राजनीतिक तौर पर साधना महत्वपूर्ण हो जाता है. हालांकि सिर्फ संख्या बढ़ना ही पर्याप्त नहीं है. इन सांसदों को अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक आधार और मतदाताओं के भरोसे को भी संभालना होगा. खासकर उन इलाकों में जहां दल बदलने के बाद स्थानीय समीकरण बदल सकते हैं.

तीन मुस्लिम सांसदों ने क्यों बनाई दूरी?

हालांकि NCPI के टूटे हुए धड़े के ज्यादातर सांसद NDA की बैठकों में शामिल हुए, लेकिन मुर्शिदाबाद से जुड़े तीन सांसदों ने व्यापक NDA बैठकों से दूरी बनाए रखी. इनमें अबू ताहेर खान, खलीलुर रहमान और यूसुफ पठान शामिल हैं. मुर्शिदाबाद में मुस्लिम आबादी बड़ी संख्या में है. ऐसे में इन सांसदों के सामने स्थानीय मतदाताओं की प्रतिक्रिया और राजनीतिक समीकरणों की चिंता बनी हुई है.

हालांकि इन तीनों सांसदों ने नेतृत्व के साथ अलग से विकास से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की है. यानी दूरी पूरी तरह राजनीतिक संवाद से नहीं है. वे स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए कदम उठा रहे हैं. ऐसे में शुक्रवार की बैठक ने एक तरफ NDA के बढ़ते कुनबे की तस्वीर दिखाई, तो दूसरी तरफ यह भी साफ किया कि नए राजनीतिक साथियों के सामने अपने-अपने क्षेत्रों में कई चुनौतियां हैं.

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button