रेड फ्लैग के बावजूद बाघों के जंगल में पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी, 411 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत, बच पाएगा कॉरिडोर?

पन्ना. मध्य प्रदेश के पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर में पनारी पंप भंडारण परियोजना को लेकर नया विवाद सामने आया है. पर्यावरण से जुड़े कई विशेषज्ञों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े अधिकारियों की आपत्तियों के बावजूद परियोजना को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (SC-NBWL) की स्थायी समिति से इस परियोजना को मंजूरी मिल गई है.
प्रस्तावित परियोजना पन्ना जिले के भगवां रिजर्वायर क्षेत्र में विकसित की जानी है. इसके तहत ऊपरी और निचले जलाशय बनाकर बिजली उत्पादन की योजना है. यह क्षेत्र पन्ना टाइगर रिजर्व और रानीपुर टाइगर रिजर्व के बीच स्थित महत्वपूर्ण वन्यजीव कॉरिडोर का हिस्सा माना जाता है. यही कारण है कि वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस परियोजना पर गंभीर चिंता व्यक्त की है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 1880 MW (मेगावाट) क्षमता का प्रस्ताव रखा गया. इसके लिए वाइल्डलाइफ मंजूरी मांगी गई थी, क्योंकि इसके लिए 411.48 हेक्टेयर वन भूमि की जरूरत होगी. यह जमीन पन्ना टाइगर रिजर्व के अहम टाइगर कॉरिडोर और सैटेलाइट कोर एरिया में आती है. यह कॉरिडोर सतना और पन्ना जिलों में पन्ना रिजर्व के आस-पास के जंगलों को चित्रकूट, यूपी में रानीपुर टाइगर रिजर्व से जोड़ता है.
मंजूरी से पहले किया गया निरीक्षण
परियोजना को मंजूरी देने से पहले 9 जुलाई 2026 को हुई राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (SC-NBWL) की बैठक में जनवरी में इसके असर का पता लगाने के लिए साइट का निरीक्षण करने का आदेश दिया था. इसके बाद चार सदस्यीय विशेषज्ञ दल, जिसमें पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA), भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के एक वैज्ञानिक तथा मध्य प्रदेश वन विभाग के एक डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) शामिल थे. निरीक्षण के बाद टीम ने कुछ शर्तों और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के पालन की सिफारिश के साथ परियोजना को मंजूरी देने की अनुशंसा की.
क्या है योजना पनारी पंप भंडारण परियोजना
पनारी पंप भंडारण परियोजना एक बिजली बनाने और बिजली को स्टोर करने की योजना है. इस योजना के तहत दो जलाशय एक ऊंचाई पर और दूसरा नीचे बनाए जाएंगे. जिनमें निचला जलाशय बघैन नदी की एक मौसमी सहायक धारा पर प्रस्तावित है. जब बिजली की जरूरत ज्यादा होगी तब ऊपर वाले जलाशय का पानी छोड़ा जाएगा. पानी के तेज बहाव से टरबाइन घूमेंगी और बिजली बनेगी.
विवाद क्यों है?
यह परियोजना पन्ना-रानीपुर टाइगर कॉरिडोर में बन रही है. यह वह रास्ता है, जिससे पन्ना टाइगर रिजर्व और रानीपुर टाइगर रिजर्व (उत्तर प्रदेश) के बीच बाघ और दूसरे जंगली जानवर आते-जाते हैं. यहां बाघ, तेंदुआ, भेड़िया, जंगली कुत्ता (ढोल), स्लॉथ भालू, गौर, सांभर और चीतल जैसे वन्यजीव रहते हैं और इसी रास्ते का उपयोग करते हैं.



