… यूक्रेन में ड्रोन हमले के बाद से लापता है प्रयागराज का ‘लाल’, पूर्व सैनिक पिता ने PM से मांगी मदद

प्रयागराज : प्रयागराज के गंगानगर जोन के झूंसी के नीबी गांव निवासी रामचंद्र दुबे यूक्रेन के उड़ीसा बंदरगाह के पास हुए ड्रोन हमले के बाद 25 जुलाई से लापता हैं. हमले के 7 दिन बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला है. घर के कमाऊ पूत का कोई पता नहीं चलने से परिवार परेशान है. उसकी सलामती के लिए परिजन प्रार्थना कर रहे हैं. सेना के हवलदार पद से रिटायर रामचंद्र के पिता रमेश चंद्र दुबे बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए देश के प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह से गुहार लगा रहे हैं.
24 जुलाई को हुई थी आखिरी बार बात
रुसी ड्रोन हमले के बाद लापता रामचंद्र दुबे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. बेटे के लापता होने से परिवार सदमे में है. परिवार यही उम्मीद लगाए बैठा है कि कहीं से कोई अच्छी खबर आ जाए कि उनका बेटा सलामत है. पिता रमेश चंद्र दुबे ने बताया कि 24 जुलाई की रात आखिरी बार बेटे से उनकी बात हुई थी. उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हो पाया है. उन्होंने जीवन भर देश की सेवा की है, इसलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि केंद्र सरकार उनके बेटे को खोजने के लिए हर संभव प्रयास करेगी.
भाई ने रक्षाबंधन पर आने का किया था वादा
उन्होंने कहा कि उनके छोटे भाई विपिन चंद्र दुबे ने मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सांसद संजय सिंह से मुलाकात की थी और मामले में दखल देने का अनुरोध किया है. परिवार लगातार भारतीय दूतावास, रक्षा मंत्रालय शिपिंग कंपनी और अन्य संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है. मगर, 7 दिन बाद भी अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है. बहन कामाक्षी दुबे का कहना है कि रामचंद्र ने अगस्त में रक्षाबंधन पर घर आने का वादा किया था. किसे पता था कि कुछ दिनों बाद ही यूक्रेन में हुए ड्रोन हमले के बाद वह लापता हो जाएगा. केंद्र सरकार से गुहार है कि जल्द मेरे भाई को सुरक्षित वापस घर ले आएं.
गौरतलब है कि इस हमले में रामचंद्र दुबे और बरेली के दीपक गुप्ता लापता हैं. दोनों शिप पर नाविक के रूप में तैनात थे. जहाज जब यूक्रेन के उड़ीसा बंदरगाह के पास पहुंचा इस समय रूसी ड्रोन का हमला हो गया. जहाज पर जान का खतरा पड़ने पर रामचंद्र दुबे समेत चार भारतीय चालक दल के सदस्यों ने समुद्र में छलांग लगा दी. जिसमें से दो भारतीयों को सुरक्षित बचा लिया गया था.



