‘PoK में मुनीर ने बंद कराए अस्पताल, पाकिस्तान आर्मी कर रही ओपेन फायर’, चश्मदीदों ने सुनाई दर्दनाक असलियत, दर्जनों लोगों की मौत

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के Rawalakot Election विरोधी प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना ने कत्लेआम मचाया है. ‘फेल्ड मार्शल’ असीम मुनीर के इशारे पर सेना, पंजाब रेंजर्स और स्नाइपर्स ने निहत्थे नागरिकों पर सीधी अंधाधुंध गोलियां बरसाई हैं. इस बर्बरता में दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है और सौ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं. सोशल मीडिया पर #MassacreInPoK ट्रेंड कर रहा है, जिसके जरिए चश्मदीदों ने सड़कों पर लाशों के ढेर, सील किए गए अस्पतालों और महिलाओं हैवानियत की हकीकत बयां की है.
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में बेकसूरों का खून पानी की तरह बह रहा है. जबरन थोपे जा रहे चुनावों का विरोध करने पर पाकिस्तानी आर्मी चीफ असीम मुनीर ने जुल्म की सारी हदें तोड़ दी हैं. सोशल मीडिया पर #MassacreInPoK तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसके जरिए खौफनाक मंजर देखने वाले लोग वहां की जमीनी सच्चाई बयां कर रहे हैं. सड़कों पर बिछी लाशें, खून से लाल गलियां और पाकिस्तानी फौज की हैवानियत से अपनी इज्जत बचाकर भागती छोटी-छोटी बच्चियां… वहां के हालात ऐसे हैं कि सुनकर ही किसी की भी रूह कांप जाए!
Pok की सड़कों पर लाशों का ढेर, एंबुलेंस भी पड़ी कम
पाकिस्तानी ‘फेल्ड मार्शल’ असीम मुनीर के इशारे पर सेना ने अपने बुनियादी हक और आजादी के लिए आवाज उठा रहे निहत्थे लोगों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई हैं. इस हैवानियत में दर्जनों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है और सौ से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं. सोशल मीडिया पर Massacre in PoK के जरिए वहां के लोग रो-रोकर दुनिया से मदद की गुहार लगा रहे हैं.
रावलकोट के द्रेक ईदगाह इलाके में स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि वहां चारों तरफ खून के धब्बे नजर आ रहे हैं. स्थानीय लोगों ने पाकिस्तान द्वारा थोपे जा रहे विधानसभा चुनाव प्रक्रिया का पूरी तरह से बहिष्कार किया था और वो अपनी बुनियादी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन पाकिस्तानी हुक्मरानों को जनता का ये विरोध बर्दाश्त नहीं हुआ.
आसिम मुनीर ने सील करवाए अस्पताल
फेसबुक पर 4 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले एक लोकल व्लॉगर अकील ने वहां का दर्दनाक मंजर बयां किया है. उन्होंने बताया कि सड़कों पर इंसानों की लाशें बिछी हुई हैं, घायल लोग तड़प रहे हैं और एंबुलेंस कम पड़ने की वजह से लोग अपनों को कंधों पर उठाकर ले जाने को मजबूर हैं. अकील ने बिलखते हुए कहा, ‘कश्मीरियों का खून सड़कों पर पानी की तरह बह रहा है. मैं अंतरराष्ट्रीय मीडिया से हाथ जोड़कर अपील करता हूं कि इस खौफनाक मंजर को दुनिया के सामने लाएं’.
एक अन्य शख्स ने रोते हुए सोशल मीडिया पर अपील की, ‘हर जगह लाशें पड़ी हुई हैं. दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं और सेना ने अस्पतालों को सील कर दिया है. कोई हमारी आवाज सुनने वाला नहीं है’.
मुनीर सेना ने असॉल्ट राइफलों और स्नाइपर्स से बरसाईं गोलियां
ये हिंसा ‘अवामी हकूक लॉन्ग मार्च’ के दौरान भड़की, जब हजारों लोग रावलकोट से मुजफ्फराबाद की ओर बढ़ने की तैयारी कर रहे थे. जब लोग अपनी बुनियादी अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे तो पाकिस्तानी हुक्मरानों के पेट में दर्द शुरू हो गया. जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) और स्थानीय कार्यकर्ताओं के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना, पंजाब रेंजर्स और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बेरहमी की सारी हदें पार कर दीं.
चश्मदीदों का आरोप है कि असीम मुनीर की सेना ने शांतिपूर्ण भीड़ पर सीधी असॉल्ट राइफलों से अंधाधुंध फायरिंग की, लॉन्ग-रेंज आंसू गैस के गोले छोड़े और ऊंची इमारतों की छतों पर स्नाइपर्स (निशानेबाज) तैनात कर दिए. जो भी शख्स आगे बढ़ा, उसे स्नाइपर्स ने सीधे सिर और छाती में गोली मार दी.
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक अब तक 19 मरने वालों की पहचान की जा चुकी है, जबकि मरने वालों का असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है क्योंकि दर्जनों लोग गायब हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है, ‘हम बिल्कुल शांतिपूर्ण ढंग से रास्ता मांग रहे थे लेकिन हम पर गोलियां बरसाई गईं और जब हम घायलों को अस्पताल ले जाने लगे तो सुरक्षा बलों ने अस्पतालों को भी सील कर दिया ताकि कोई जिंदा न बच सके’.
महिलाओं के साथ बदसलूकी और कत्ल का आरोप
पाकिस्तानी सेना की हैवानियत यहीं नहीं थमी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक स्थानीय कश्मीरी महिला ने पाकिस्तानी फौज पर बेहद गंभीर और दिल दहलाने वाले आरोप लगाए हैं. महिला का दावा है कि पाकिस्तानी सैनिक घर-घर में घुसकर पीओके की महिलाओं और बच्चियों के साथ खुलेआम बदसलूकी, छेड़छाड़ और उनका कत्ल कर रहे हैं.
इलाके में डर का माहौल इतना ज्यादा है कि लोग अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हैं. अस्पतालों पर सेना के कब्जे की वजह से घायलों को फर्स्ट एड तक नहीं मिल पा रहा है. एक सोशल मीडिया यूजर ने लिखा कि पाकिस्तानी सेना ने निर्दोष कश्मीरियों का कत्लेआम किया है और घायल नागरिकों को तड़प-तड़पकर मरने के लिए सड़कों पर छोड़ दिया है.
अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी
पीओके के आम नागरिक इस बात से सबसे ज्यादा आहत हैं कि जहां दुनिया के बाकी हिस्सों में छोटी सी घटना पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठन हंगामा मचा देते हैं, वहीं पीओके में बह रहे मासूमों के खून पर सबने आंखें मूंद ली हैं.
स्थानीय प्रदर्शनकारियों और कार्यकर्ताओं ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से तुरंत दखल देने की गुहार लगाई है. एक प्रत्यक्षदर्शी ने भारी दिल से सवाल उठाया, ‘पाकिस्तानी नेता चुनावों के ड्रामे में व्यस्त हैं और दुनिया का मीडिया चुप है. क्या पीओके के आम इंसानों की जिंदगी की कोई कीमत नहीं है?’
भारत ने चुनाव को बताया ‘दिखावा’, कहा- जुल्म छिपाने का नाटक
इस बीच, भारत सरकार ने PoK में कराए जा रहे विधानसभा चुनावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इसे एक ‘दिखावटी कसरत’ करार दिया है. विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ये चुनाव कुछ और नहीं, बल्कि पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे को सही ठहराने और इलाके में हो रहे गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों पर पर्दा डालने का एक नाकाम प्रयास है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि पीओके में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन असल में पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक शोषण, लोगों के बुनियादी अधिकारों के हनन और प्रशासनिक तानाशाही का सीधा नतीजा हैं. जनता अब अपने हक के लिए खड़ी हो चुकी है और पाकिस्तान बंदूक के दम पर उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रहा है.



