दुनिया का वो गांव, जो बसा है सूरज के सबसे करीब, फिर भी यहां ठंड से ठिठुर जाते हैं लोग!

जब भी दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ की बात होती है, तो सबसे पहले माउंट एवरेस्ट का ही नाम लोगों के जेहन में आता है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि एवरेस्ट ही धरती का वह स्थान है, जो अंतरिक्ष और सूरज के सबसे करीब है. लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है. दुनिया में एक ऐसा पहाड़ भी मौजूद है, जिसकी चोटी पृथ्वी के केंद्र से मापने पर एवरेस्ट से भी ज्यादा अंतरिक्ष और सूरज के करीब पहुंचती है. यह पहाड़ है दक्षिण अमेरिका के इक्वाडोर में स्थित माउंट चिम्बोराजो (Mount Chimborazo). यही वजह है कि वैज्ञानिक इसे धरती के सबसे खास पर्वतों में से एक मानते हैं. इस पहाड़ की एक और अनोखी बात यह है कि इसकी ऊंची ढलानों पर आज भी कई गांव बसे हुए हैं, जहां लोग बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद सामान्य जीवन जीते हैं. हैरानी की बात यह है कि सूरज के अपेक्षाकृत ज्यादा करीब होने के बावजूद यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है और इसकी ऊंची चोटियां सालभर बर्फ से ढकी रहती हैं.
समुद्र तल से देखा जाए तो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8,848 मीटर है, जबकि माउंट चिम्बोराजो की ऊंचाई करीब 6,268 मीटर है. फिर भी चिम्बोराजो की चोटी अंतरिक्ष के ज्यादा करीब मानी जाती है. इसकी वजह पृथ्वी का आकार है. पृथ्वी पूरी तरह गोल नहीं है, बल्कि भूमध्य रेखा (Equator) के आसपास थोड़ी उभरी हुई है. चूंकि चिम्बोराजो भूमध्य रेखा के बेहद करीब है, इसलिए पृथ्वी के केंद्र से इसकी दूरी एवरेस्ट से अधिक हो जाती है. इसी कारण इसे धरती का वह बिंदु माना जाता है, जो अंतरिक्ष और सुरज के बेहद करीब माना जाता है.
बर्फीली चोटी के नीचे बसे हैं छोटे-छोटे गांव
चिम्बोराजो की ऊंची चोटी सालभर बर्फ और ग्लेशियर से ढकी रहती है. लेकिन इसकी ढलानों पर करीब 3,500 से 4,200 मीटर की ऊंचाई के बीच कई छोटे गांव बसे हुए हैं. इन गांवों में क्वेशुआ और पुरुहा आदिवासी समुदाय के लोग पीढ़ियों से रह रहे हैं. कठिन मौसम, कम सुविधाएं और ऊंचाई की चुनौतियों के बावजूद उन्होंने इस इलाके को अपना स्थायी घर बना लिया है. आज भी उनकी संस्कृति और परंपराएं काफी हद तक वैसी ही हैं जैसी कई पीढ़ियों पहले थीं. इतनी ऊंचाई पर हवा में ऑक्सीजन की मात्रा काफी कम होती है. जो लोग पहली बार यहां पहुंचते हैं, उन्हें सांस लेने में तकलीफ, सिरदर्द और चक्कर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लेकिन यहां रहने वाले लोगों का शरीर पीढ़ियों से यहां के वातावरण के अनुसार ढल चुका है, वो बिना किसी खास परेशानी के खेती, पशुपालन और रोजमर्रा के दूसरे काम करते हैं. कड़ाके की ठंड और तेज हवाओं के बावजूद उनका जीवन सामान्य तरीके से चलता रहता है.



