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चढ़ावा चोरी : संगठित तरीके से चोरी ही नहीं, निवेश भी कर रहे थे आरोपित गणनाकर्मी; खातों में पैसे ना रखकर खरीदते थे जमीन

अयोध्या। राम मंदिर के दानपात्रों की नकदी की गणना करने वाले कर्मी संगठित गिरोह बना चोरी कर रहे थे। गिरोह में हर उस व्यक्ति को शामिल कर धन का बंटवारा होता था, जिससे किसी समस्या की स्थिति में मदद ली जा सके। चोरी का धन सिर्फ बैंक खातों में ही नहीं रखा जाता बल्कि उसका अन्यत्र निवेश भी कराया जा रहा था।

चढ़ावा चोरी प्रकरण: एसबीआई से करार खत्म कर सकता है राम मंदिर ट्रस्ट

बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गणना और बैंकिंग कार्यों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट का पूरा वित्तीय ढांचा पुनर्गठित किया जाएगा। इसके तहत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के साथ मौजूदा व्यवस्था समाप्त कर ट्रस्ट के खातों को किसी अन्य सरकारी अथवा निजी बैंक में स्थानांतरित करने के प्रस्ताव पर भी विचार चल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट अब चढ़ावे की गिनती, लेखा-जोखा और वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह पेशेवर व्यवस्था के तहत संचालित करना चाहता है। इसके लिए स्थायी चार्टर्ड अकाउंटेंट, मैनेजमेंट ग्रेजुएट, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और अनुभवी बैंक कर्मचारियों की नियुक्ति की जाएगी।  

बताया जा रहा है कि चढ़ावे की गणना और बैंकिंग कार्यों में आउटसोर्सिंग व्यवस्था पूरी तरह समाप्त करने की तैयारी है। अब यह जिम्मेदारी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की निगरानी में कराई जाएगी, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जा सके। छह जुलाई को होने वाली राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है।

बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच…लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं


चढ़ावा चोरी में एसबीआई बैंक के अधिकारियों व कर्मचारियों की बड़ी लापरवाही रही। वहीं, कई कर्मियों की मिलीभगत भी पुलिस जांच में सामने आई है। वहीं, इन सभी के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू हो गई है। हालांकि, अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यह उच्चाधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। पुलिस ने भी अभी शिकंजा नहीं कसा है। सवाल है कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों की जा रही है।

दान राशि की गणना करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी एसबीआई बैंक की थी। इसके लिए ट्रस्ट और बैंक के बीच बाकायदा लिखित करार हुआ था। लेकिन वर्षों से रकम पार होती रही और बैंक अधिकारी-कर्मचारी खामोश रहे। यहां तक कि कई कर्मी खुद इस गबन के खेल में शामिल हो गए। 

सूत्रों ने बताया कि मामले में एसबीआई के उच्चाधिकारियों ने एसबीआई अयोध्या धाम शाखा के मैनेजर समेत करीब आठ से दस कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। केवल जांच चल रही है।

बैंक प्रशासन ने साधी चुप्पी
मामले में एसबीआई बैंक के प्रबंधन की तरफ से सिर्फ एक आधिकारिक बयान जारी किया गया था। उसमें भी कोई तथ्य नहीं थे। सिर्फ इतना बताया गया था कि एसआईटी जांच में वह पूरा सहयोग कर रहे हैं। लेकिन, जब उनसे सवालों के जवाब जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई तो बताया गया कि वह इस पर कुछ भी नहीं बोलेंगे। एक तरह से अधिकारियों ने पूरी तरह चुप्पी साध ली है। इससे अंदेशा है कि बड़े पैमाने पर जिम्मेदारों ने इसमें खेल किया या कुछ की लापरवाही भी रही।

पुलिस क्यों कर रही देरी?
बैंक के दो कर्मचारियों रत्नेश व गगनदीप का नाम सामने आया है, जिनकी मिलीभगत के सबूत मिले हैं। पुलिस जांच कर रही है और एसआईटी भी बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है, लेकिन अब तक लिखापढ़ी में कोई कार्रवाई नहीं की गई है। सवाल है कि आखिर पुलिस अपनी कार्रवाई में देरी क्यों कर रही है। एक पुलिस अधिकारी का कहना था कि जो आरोपी अब तक जेल भेजे गए हैं, उनके खिलाफ कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद दूसरे चरण में बैंक कर्मियों व अन्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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