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मरकर दोबारा जिंदा हुई महिला, फिर बताई ‘दूसरी दुनिया’ का हैरान करने वाला सच, सुनकर उड़ जाएंगे होश!

वाशिंगटन. मरने के नाम से ही इंसानों के भीतर एक अनजाना डर पैदा हो जाता है. लेकिन इस सच्चाई से मुंह मोड़ना संभव नहीं है. अगर किसी का जन्म हुआ है तो उसकी मौत भी निश्चित है. लेकिन दुनियाभर में कई ऐसे लोग भी होते हैं, जो मरकर दोबारा जिंदा हो जाते हैं. इनमें से कोई चमकती हुई रोशनी का जिक्र करता है, तो कोई अपने मर चुके मां-बाप से मिलने का दावा करता है. लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो मौत के बाद की भयावह स्थिति के बारे में बतलाते हैं, तो कुछ लोग मौत के खौफ को पूरी तरह से निरर्थक और अनावश्यक बताते हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक ऐसा ही चौंकाने वाला वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें दो बार मौत के मुंह से वापस लौटकर आई हॉर्पर नाम की एक महिला ने दूसरी दुनिया के अपने अनुभवों को साझा किया है.

वाशिंगटन की रहने वाली हार्पर खुद को “टू-टाइम नियर-डेथ सर्वाइवर” बताती हैं. उनका कहना है कि वे इस धरती पर दोबारा सिर्फ इसलिए आईं, ताकि लोगों को याद दिला सकें कि वे यहां क्यों हैं और मौत को लेकर उनके मन में बैठा डर पूरी तरह से बेकार है. हॉर्पर ने अपने वीडियो में समझाया कि जब वे मौत के पार गईं, तो वहां कोई घबराहट, कोई पूर्वाग्रह या कोई सजा जैसी चीज नहीं थी. वहां सिर्फ एक गहरी शांति थी, एक पुराना अपनापन था और ऐसा लगा जैसे हम किसी बेहद जानी-पहचानी जगह पर लौट आए हैं. हॉर्पर के मुताबिक, वे वापस आकर दुनिया को यह बताना चाहती हैं कि हम अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ कुछ खोने के डर में बिता देते हैं और हर वक्त आने वाले झटकों के लिए खुद को तैयार करते रहते हैं, जबकि जिंदगी ऐसे जीने के लिए नहीं बनी है. उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अगर वे अब तक अपनी जिंदगी में डर के मारे सांसें रोककर जी रहे थे, तो अब चैन की सांस लें, क्योंकि मौत कोई दुश्मन नहीं है.

वीडियो पर दूसरे लोगों ने भी शेयर किया मौत के बाद का एक्सपीरिएंस
हार्पर के इस वीडियो पर कई लोगों ने कमेंट करके मौत और उसके बाद की दुनिया को लेकर बेहद हैरान करने वाले व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए. एक महिला ने बताया कि जब उन्होंने अपनी बेटी को जन्म दिया था, तो डिलीवरी के दौरान कुछ मिनटों के लिए उनके दिल की धड़कन रुक गई थी. उस वक्त उन्होंने जो महसूस किया, उसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है. महिला ने लिखा कि वह पूरी तरह से शांत और प्यार व कृतज्ञता से भरी हुई थीं. उन्हें बिना शब्दों के यह संदेश दिया गया कि उन्हें वापस जाना है और वे अपनी आत्मा को शरीर से बाहर निकलकर डॉक्टरों और नर्सों को अपने ही शरीर पर काम करते हुए देख रही थीं, जिसके बाद वे दोबारा अपने शरीर में लौट आईं. एक अन्य यूजर ने साल 2003 में इमरजेंसी सर्जरी के दौरान हुए नियर-डेथ एक्सपीरियंस का जिक्र करते हुए लिखा कि डॉक्टरों को उनका दिल दोबारा शुरू करने में लगभग 8 मिनट का समय लगा था.

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उन्होंने आगे लिखा है कि उन 8 मिनटों ने उनकी पूरी जिंदगी और सोचने का तरीका बदल दिया. इस घटना के बाद उन्होंने अपने पुराने इब्राहीमी धर्मों (यहूदी, ईसाई और इस्लाम) को पीछे छोड़ दिया और बौद्ध धर्म जैसे मान्यताओं की ओर कदम बढ़ा दिए, क्योंकि अब उनके मन से मरने का डर हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म हो चुका है. हालांकि, विज्ञान और डॉक्टरों का इस पूरे मामले पर एक अलग ही नजरिया है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब इंसान का दिल रुकता है या मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है, तो दिमाग के भीतर कुछ ऐसे रसायनों का स्राव होता है जो शांति, असीम प्रेम और भ्रम जैसी भावनाएं पैदा करते हैं. यही वजह है कि अलग-अलग धर्मों और संस्कृतियों के लोग लगभग एक जैसा ही अनुभव करते हैं. विज्ञान के मुताबिक, जो लोग वापस आ गए, उनकी मौत अंतिम या पूर्ण नहीं थी, बल्कि वह सिर्फ एक नियर-डेथ एक्सपीरियंस था.

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