संपादकीय

‘शिक्षण संस्थानों में’ बढ़ रही रैगिंग की घटनाएं!

इन दिनों उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने वाले नए छात्रों की सीनियर छात्रों द्वारा ‘रैगिंग’ (उत्पीडऩ) की बुराई बहुत बढ़ गई है। इसमें उनके साथ अपमानजनक छेड़छाड़, मारपीट, उत्पीडऩ आदि अमानवीय कृत्य शामिल हैं जिनकी इसी वर्ष की चंद घटनाएं निम्न में दर्ज हैं : 

*  12 जनवरी को ‘देहरादून’ (उत्तराखंड) स्थित ‘दून मैडीकल कालेज’ में एम.बी.बी.एस. के 9 छात्रों द्वारा प्रथम वर्ष के एक छात्र को कैम्पस से बाहर सोने के लिए मजबूर करने, उसे बैल्ट और चप्पलों से पीटने तथा जबरन उसके बाल काट देने का मामला सामने आया। इसके अंतर्गत 2 मुख्य आरोपियों को 2 महीने के लिए कक्षाओं से सस्पैंड और होस्टल से निष्कासित करने और पूरे मैडीकल कोर्स के दौरान उनके इंटर्नशिप करने पर प्रतिबंध लगाने के अलावा 7 अन्य छात्रों को 1 महीने के लिए सस्पैंड किया गया।
* 16 जनवरी को ‘बेंगलुरु’ (कर्नाटक) में एक प्राइवेट शिक्षा संस्थान के ‘देवनहल्ली’ स्थित केंद्र में सीनियर छात्रों ने जूनियर छात्रों को सिगरेट और शराब लाने के लिए मजबूर किया। कालेज स्टाफ द्वारा इसका विरोध करने और बीच-बचाव करने पर उन्हें लोहे की छड़ों, लाठियों और पत्थरों से जानलेवा हमला करके घायल करने के आरोप में 23 आरोपी छात्रों को गिरफ्तार किया गया। 

* 28 अप्रैल को ‘पुणे’ (महाराष्ट्र) स्थित ‘इंडियन लॉ सोसायटी (आई.एल.एस.) लॉ कालेज के  एल.एल.बी. के दूसरे वर्ष के छात्र ने कुछ सीनियर छात्रों के विरुद्ध बिना वजह ही उसकी पिटाई करने, उसके कमरे की खिड़कियों के शीशे तोड़ देने, उसके कमरे में अंडे फैंक कर और गुटखे का थूक  उगल कर गंद डालने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई ।
* 7 मई को ‘ग्रेटर नोएडा’ (उत्तर प्रदेश) स्थित एक निजी यूनिवॢसटी के होस्टल में एक जूनियर छात्रा को घेर कर बिना वजह गालियां देने, थप्पड़ मारने (जिससे उसके मुंह से खून निकलने लगा) तथा उसके बाल खींचने के आरोप में यूनिवॢसटी की 4 सीनियर छात्राओं को तुरंत सस्पैंड किया गया और होस्टल से भी निष्कासित किया गया। 
* 12 जून को ‘बरेली’ (उत्तर प्रदेश) स्थित ‘मैडीकल कालेज’ में एक जूनियर छात्र ने सीनियर्स द्वारा की जा रही उसकी रैगिंग और मानसिक उत्पीडऩ से तंग आकर कालेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगा दी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित छात्र की शिकायत पर पुलिस ने 4 सीनियर डाक्टरों के विरुद्ध केस दर्ज किया।

* 17 जून को ‘हैदराबाद’ (तेलंगाना) स्थित ‘गवर्नमैंट डैंटल कालेज’ में बी.डी.एस. अंतिम वर्ष के 12 सीनियर्स द्वारा अपने होस्टल में रहने वाले बी.डी.एस. के पहले वर्ष के छात्रों को उनके लिए जबरन बाहर से शराब, सिगरेट और खाना लाने के लिए मजबूर करने पर कालेज प्रशासन ने आरोपी छात्रों को 6 महीने के लिए सस्पैंड कर दिया।
*  18 जून को ‘ïअहमदाबाद’ (गुजरात) स्थित बी.जे. मैडीकल कालेज, के ऑर्थोपैडिक विभाग में पोस्ट ग्रैजुएशन के दूसरे वर्ष के छात्रों द्वारा प्रथम वर्ष के रैजिडैंट डाक्टरों को प्रताडि़त करने, जबरन ‘मुर्गा’ बनाने, सोने नहीं देने और 2 लाख तक का खाने और शराब का खर्च उठाने के लिए मजबूर करने के आरोप में कालेज की एंटी-रैगिंग कमेटी द्वारा दोषी पाए गए 6 सीनियर डाक्टरों को 6 महीने से लेकर 1 वर्ष तक के लिए सस्पैंड कर दिया।

देश में रैगिंग पर प्रतिबंध है और कालेजों में एंटी रैगिंग कमेटियां भी बनी हुई हैं परंतु इसके बावजूद रैगिंग की घटनाएं सामने आती रहती हैं। गैर-सरकारी संगठन Society Against Violence in Education द्वारा जारी रिपोर्ट ‘स्टेट आफ रैगिंग इन इंडिया’ तथा ‘नैशनल एंटी-रैगिंग हैल्पलाइन’ के अनुसार देश की शिक्षण संस्थाओं में आने वाली रैगिंग की कुल शिकायतों की लगभग 38.6 प्रतिशत अकेले मैडीकल कालेजों से ही आती हैं। हालांकि सभी छात्र ऐसे नहीं हैं परंतु इस तरह की घटनाएं निश्चित रूप से दुखद हैं और इनके लिए जिम्मेदार लोगों को कठोरतम शिक्षाप्रद सजा मिलनी ही चाहिए ताकि इस बुराई पर स्थायी रोक लग सके।

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