महाराष्ट्र

मनोरी प्रोजेक्ट बुझाएगा मुंबई की प्यास, समुद्र से दो टनलों के जरिए आएगा पानी

मुंबई: मुंबई की बढ़ती आबादी की पानी की मांग को पूरा करने के लिए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मलाड-मनोरी में एक डिसेलिनेशन प्लांट बनाने जा रहा है। जो समुद्र के पानी को पीने लायक पानी में बदलेगा। केंद्र सरकार ने आखिरकार इस प्रोजेक्ट के लिए जरूरी कोस्टल रेगुलेशन जोन (CRZ ) मंजूरी दे दी है। इस बात की पुष्टि करने वाला एक आधिकारिक पत्र 11 मई को जारी किया गया। इसके चलते इस बड़े प्रोजेक्ट का असली निर्माण कार्य आने वाले मॉनसून के बाद जोर पकड़ सकता है। कोस्टल रेगुलेशन जोन मंजूरी मिलने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मैरीटाइम बोर्ड से मंजूरी मिलना अभी बाकी है। हालांकि नगर निगम को अगले आठ से दस दिनों के भीतर ये मंजूरियां मिल जाने की उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट पांच नगर निगम वार्डों के लोगों की प्यास बुझाने के लिए तैयार है।

समुद्र के पानी को ताजे पानी में बदलना
मुंबई को अभी सात जलाशयों—तानसा, मोदक सागर, मिडिल वैतरणा, अपर वैतरणा, भातसा, विहार और तुलसी से रोजाना 4,000 मिलियन लीटर (400 करोड़ लीटर) पानी की सप्लाई मिलती है। मुंबई की लगातार बढ़ती पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए बीएमसी ने मनोरी में एक डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट लागू करने का फैसला किया था, ताकि समुद्र के पानी को ताजे पानी में बदला जा सके। हालांकि पिछले तीन से चार सालों से यह प्रोजेक्ट टेंडर प्रक्रिया में ही अटका हुआ था। आखिरकार प्रोजेक्ट को फिर से पटरी पर लाने के लिए और काम को पूरा करने के लिए GVPR कंपनी को चुना गया है। चयन प्रक्रिया के साथ-साथ, अलग-अलग नियामक मंजूरियां हासिल करना भी एक जरूरी शर्त थी।

बाकी मंजूरी कब तक?
जब CRZ, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मैरीटाइम बोर्ड से मंजूरी हासिल करने की कोशिशें चल रही थीं, तभी 11 मई को नगर निगम को CRZ मंजूरी देने वाला आधिकारिक पत्र मिल गया। इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और मैरीटाइम बोर्ड के अधिकारियों का प्रोजेक्ट वाली जगह का दौरा करके निरीक्षण करने और जानकारी इकट्ठा करने का कार्यक्रम तय है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया है कि इसके बाद इन दोनों संस्थाओं से भी मंजूरी आठ से दस दिनों के भीतर मिल जाने की उम्मीद है।

पहले चरण में 200 मिलियन लीटर पानी
मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट के हिस्से के तौर पर समुद्र के अंदर दो सुरंगें बनानी होंगी। इनमें से हर एक की लंबाई दो किलोमीटर होगी। ताकि समुद्र का कच्चा पानी अंदर लिया जा सके और साफ किया हुआ पानी बाहर छोड़ा जा सके। इस प्रोजेक्ट के जरिए समुद्र के पानी को ट्रीट करके मुंबई के निवासियों को कुल 400 मिलियन लीटर पानी दिया जाएगा। पहले चरण में 200 मिलियन लीटर और दूसरे चरण में 200 मिलियन लीटर। मनोरी डिसेलिनेशन प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत शुरू में ₹3,520 करोड़ आंकी गई थी। हालांकि अब यह लागत लगभग 1,000 करोड़ रुपये बढ़ गई है। इस प्रोजेक्ट को चार साल के अंदर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रोजेक्ट के फ़ायदे
प्रोजेक्ट पूरा होने पर इन वार्डों को इस सुविधा से पानी मिलेगा। ‘P North’ (मलाड), ‘P South’ (गोरेगांव), ‘R Central’ (बोरीवली पश्चिम), ‘R North’ (दहिसर), और ‘R South’ (कांदिवली)। अभी, मुंबई शहर और पश्चिमी उपनगरों को भांडुप कॉम्प्लेक्स में स्थित वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से पानी की सप्लाई की जाती है। जब मनोरी प्रोजेक्ट चालू हो जाएगा, तो भांडुप कॉम्प्लेक्स से इन पांच वार्डों के लिए तय पानी का कोटा अतिरिक्त हो जाएगा। नतीजतन, कॉम्प्लेक्स से मिलने वाले इस अतिरिक्त पानी को उन दूसरे इलाकों में भेजा जा सकेगा जहां इसकी जरूरत है।

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