जरा हट के

मुर्गी खाती है पत्थर इसलिए कड़ा होता है अंडे का छिलका? जवाब सुनकर होंगे हैरान

जहानाबाद: बिहार में अब धीरे-धीरे उद्योग धंधे पनपते जा रहे हैं. कृषि क्षेत्र से लेकर पशुपालन का दायरा बढ़ने लगा है. क्योंकि हर एक युवा को अब ऐसा एहसास होने लगा है कि नौकरी का दायरा सीमित है. ऐसे में हर हाथ को नौकरी मिल पाना मुश्किल है. इन्हीं कारणों से हमारे यहां पशुपालन में मुर्गी पालन, बकरी पालन और गो पालन जैसी कंपनी सेट अप हो रही है. साथ ही लेयर फार्मिंग का भी व्यवसाय धीरे-धीरे बढ़ने लगा है. पोल्ट्री फार्म लेयर फार्मिंग से युवा अच्छी कमाई कर रहे हैं. यह सबको पता है कि मुर्गियां से अंडे तैयार होते हैं.

अंडे का उजला भाग कैसे तैयार होता है?
उस अंडे का उजला भाग कैसे तैयार होता है? इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को होती है. यदि आप भी यह सच्चाई नहीं जानते हैं तो चलिए आज हम आपको एक ऐसे शख्स से जो आपको बताएंगे कि मुर्गियों से प्राप्त होने वाले अंडे का उजला हिस्सा कैसे तैयार होता है? जहानाबाद के शुकुलचक गांव के रहने वाले सुबोध कुमार एक बड़े स्तर पर चल रहे लेयर फार्मिंग के केयर टेकर है. वह सुबह 8:00 से लेकर रात 8:00 बजे तक इसी कार्य में लगे रहते हैं. मुर्गियों के पानी खाना से लेकर दाना बनाने तक अंडा निकालने तक का कार्य निष्पादन करते हैं. वह पिछले 5 सालों से इसी कार्य में लगे हुए हैं.

बढ़ता ही जा रहा पोल्ट्री का दायरा
लोकल 18 से सुबोध कुमार ने बताया कि हमारे यहां मुर्गियों का चारा बाहर से मंगवाने की जरूरत नहीं पड़ती है. क्योंकि खुद हम इसका दाना तैयार करते हैं. मुर्गियों के दानों को बनाने के लिए कुछ जरूरी आइटम्स उपयोग में आते हैं. जिसमें नीम का खली, सोया खली, राजस्थानी पत्थर का चूर्ण के साथ कई अन्य वस्तुओं का इस्तेमाल किया जाता है. इन सबको मिक्स करके 1 घंटे में मिक्सर मशीन के सहयोग से मुर्गियों का दाना तैयार करने का काम किया जाता है. हालांकि सबसे खास बात यह है की जो दाना तैयार हो रहा है, उसमें पत्थर का भी इस्तेमाल हो रहा है.

ऐसे तैयार होता है अंडे का उजला हिस्सा  
वो आगे बताते हैं कि मुर्गियां ही पत्थर खाती है. यदि वह पत्थर नहीं खाएगी तो अंडे का उजला भाग तैयार नहीं होगा. इस पत्थर की वजह से ही अंडे का हार्ड सेल तैयार होता है. यही कारण है कि हम लोग जब दाना बनाते हैं तो उसमें राजस्थानी पत्थर का इस्तेमाल करते हैं, ताकि मुर्गियां वह भी खाए और सही तरीके से अंडे बाहर दे. यह पूरी प्रक्रिया काफी जटिल होती है. हालांकि, हम लोग पूरे दिन मिलकर इस काम को करते हैं.

ऐसे तैयार होता है अंडे का उजला हिस्सा  
वो आगे बताते हैं कि मुर्गियां ही पत्थर खाती है. यदि वह पत्थर नहीं खाएगी तो अंडे का उजला भाग तैयार नहीं होगा. इस पत्थर की वजह से ही अंडे का हार्ड सेल तैयार होता है. यही कारण है कि हम लोग जब दाना बनाते हैं तो उसमें राजस्थानी पत्थर का इस्तेमाल करते हैं, ताकि मुर्गियां वह भी खाए और सही तरीके से अंडे बाहर दे. यह पूरी प्रक्रिया काफी जटिल होती है. हालांकि, हम लोग पूरे दिन मिलकर इस काम को करते हैं.

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