Harshvardhan Jain: लंदन की डिफेंस कंपनी को भी ठगने की कोशिश,

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने के मामले में गिरफ्तार हर्षवर्धन जैन को लेकर STF ने जांच में कई गंभीर खुलासे किए हैं। एजेंसी के अनुसार, आरोपी सिर्फ फर्जी दूतावास तक सीमित नहीं था, बल्कि वह खुद को भारत सरकार में प्रभावशाली व्यक्ति बताकर विदेशों में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था।
STF का दावा है कि हर्षवर्धन जैन ने लंदन की एक डिफेंस कंपनी की तकनीक और डील को भारत में आगे बढ़ाने के नाम पर एक योजनाबद्ध तरीके से प्रभाव और संपर्क बनाने का प्रयास किया। यह पूरा मामला डिजिटल सबूतों, चैट रिकॉर्ड और विदेशी संपर्कों के आधार पर और भी गंभीर होता दिखाई दे रहा है।
फर्जी दूतावास से शुरू हुआ मामला
STF के मुताबिक, 22 जुलाई 2025 को गिरफ्तारी के बाद हर्षवर्धन जैन के मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच की गई, जिसमें कई WhatsApp चैट, ई-मेल और अन्य डिजिटल साक्ष्य मिले। इन सबूतों से पता चला कि वह एक संगठित तरीके से खुद को सरकारी और राजनयिक तंत्र से जुड़ा हुआ दिखाने की कोशिश कर रहा था।
जांच एजेंसी ने यह भी बताया कि यह पूरा नेटवर्क गाजियाबाद स्थित एक आलीशान कोठी से संचालित हो रहा था, जहां से फर्जी दूतावास जैसी गतिविधियां चलाई जा रही थीं।
लंदन की डिफेंस कंपनी से संपर्क
STF की रिपोर्ट में सबसे अहम खुलासा यह है कि हर्षवर्धन जैन लंदन की एक डिफेंस कंपनी से संपर्क में था और उसे यह विश्वास दिलाने की कोशिश कर रहा था कि भारत सरकार और संबंधित संस्थानों में उसकी मजबूत पहुंच है।
एजेंसी के अनुसार, वह इस कंपनी की तकनीक को भारत के रक्षा क्षेत्र में लाने और उससे जुड़े डील को आगे बढ़ाने में मदद करने का दावा कर रहा था, लेकिन इसके पीछे उसका उद्देश्य प्रभाव बनाकर लाभ उठाना था।
डिजिटल सबूतों में सामने आई अंतरराष्ट्रीय बातचीत
फॉरेंसिक जांच में मिले डिजिटल सबूतों में WhatsApp चैट और ई-मेल के जरिए विदेशी संपर्कों की पुष्टि हुई है। इनमें बोटिम ऐप पर माइक्रोनेशन सेबोर्गा की कथित प्रिंसेस नीना मेनेगाट्टो से बातचीत भी शामिल है।
23 अप्रैल 2025 का एक दस्तावेज भी सामने आया, जिसमें अमेरिका के रक्षा विभाग के लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया था। इस दस्तावेज को लंदन की डिफेंस कंपनी से जुड़े एक प्रस्ताव से जोड़कर दिखाया गया था।
सरकारी प्रभाव का दावा कर बनाए गए संपर्क
चैट रिकॉर्ड के अनुसार, हर्षवर्धन ने विदेशी संपर्कों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि भारत सरकार और रक्षा संस्थानों में उसकी पहुंच है। उसने दावा किया कि वह रक्षा क्षेत्र की डील्स में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। जब STF ने नीना मेनेगाट्टो से ई-मेल के जरिए संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दस्तावेज इसलिए साझा किया क्योंकि हर्षवर्धन ने खुद को बेहद प्रभावशाली और सरकारी तंत्र से जुड़ा हुआ बताया था।
आलीशान कोठी से चल रहा था पूरा नेटवर्क
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी दूतावास और उससे जुड़ी गतिविधियां गाजियाबाद की एक लग्जरी कोठी से संचालित की जा रही थीं। यहां से कथित तौर पर डिप्लोमैटिक सेटअप तैयार कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
कोर्ट में बचाव पक्ष का दावा और जमानत
हर्षवर्धन के वकील ने अदालत में दलील दी कि पूर्व राष्ट्रपतियों और कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें असली हैं और उन्हें मॉर्फ नहीं किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया कि उसका पासपोर्ट वैध है और जिन कंपनियों का जिक्र किया गया है, वे निष्क्रिय थीं।
वकील ने यह भी दावा किया कि बरामद नकदी पारिवारिक ऋण से संबंधित थी। इन दलीलों के आधार पर अदालत ने हर्षवर्धन जैन को जमानत दे दी।



