कामगार आंदोलन में पाकिस्तान भाजपा की विकृति

भाजपा के जन्म का पालना शायद पाकिस्तान में ही हिला होगा। क्योंकि हर जगह उन्हें पाकिस्तान का ही हाथ दिखाई देता है। दिल्ली के पास ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में हजारों मजदूर अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरे। महंगाई से झुलसने के बावजूद इन मजदूरों का वेतन १२,००० से १५,००० के ऊपर नहीं जाता। किराया, अनाज, शिक्षा, दवाएं, यात्रा, गैस सिलेंडर सबकुछ महंगा हो गया है, फिर भी वार्षिक वेतन वृद्धि केवल ३०० रुपए। यह क्रूर है। जीने लायक वेतन दो, इस मांग के लिए मजदूर सड़कों पर उतरे। उनकी भावनाओं का विस्फोट हुआ। हिंसा की चिंगारी भड़की। उग्र प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियां जलार्इं, कहीं पत्थरबाजी हुई। ये बहुसंख्यक मजदूर, कामगार हिंदू ही थे, लेकिन उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार को मजदूरों के इस आंदोलन में पाकिस्तानी एजेंटों का हाथ दिखाई देने लगा है। उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने तो इस बहाने पाकिस्तान के नाम पर खूब स्यापा किया। मजदूरों का आंदोलन एक सुनियोजित साजिश है और इसके पीछे के पाकिस्तानी लिंक की जांच की जा रही है, ऐसा इन महाशय ने घोषित किया। शायद देश के गृहमंत्री अमित शाह को भी ऐसा ही लगता होगा। अगर पाकिस्तान का अस्तित्व न हो, तो ‘भाजपा’ राजनीतिक कुपोषण से मर जाएगी। पाकिस्तान, मुसलमान ही भाजपा का राजनीतिक दाना-पानी और दवा-दौलत है। मजदूरों के आंदोलन में भी इन्हें पाकिस्तान का ‘हाथ’ दिख रहा है तो यह मोदी सरकार की विफलता है। बारह साल इनका राज केंद्र और उत्तर प्रदेश में होते हुए भी ये लोग पाक एजेंटों का बंदोबस्त नहीं कर सके और उसका ठीकरा
मजदूर और किसान
वर्ग पर फोड़ रहे हैं। किसानों ने दिल्ली में आंदोलन किया था। तब भी किसानों के आंदोलन में पाकिस्तानी और आतंकवादी घुस आए हैं, ऐसा शोध इन लोगों ने लगाया था। पश्चिम बंगाल, असम में भी बांग्लादेशी घुस आए, ऐसा वे चुनाव प्रचार में बोल रहे हैं, लेकिन पिछले बारह वर्षों से देश की सीमाओं के चौकीदार यही भाजपा वाले हैं। बारह साल हो गए फिर भी ये बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोक नहीं पाए। इसका अर्थ है कि आप शासक के रूप में नालायक साबित हुए हैं। देश से ‘माओवाद’, नक्सलवाद खत्म किया, इसका श्रेय गृहमंत्री अमित शाह ले रहे हैं। फिर पाकिस्तानी एजेंटों या हैंडलर्स को क्यों खत्म नहीं कर पाए? मूलत: सच्चाई यह है कि आपको शासन करना नहीं आता और जब मेहनतकश गुस्सा हो जाए तो पाकिस्तानियों को दोष देना, यह राजनीतिक लंपटगीरी है। किसान, मजदूरों के श्रम की कद्र मोदी-शाह को नहीं है। नोएडा दिल्ली की उपनगरीय औद्योगिक राजधानी है। यहां इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में लाखों मजदूर काम करते हैं और वे बहुसंख्यक हिंदू हैं। उनके आर्थिक प्रश्न हैं और वे वेतन से जुड़े हैं। वर्तमान भीषण महंगाई के दौर में वे जिएं वैâसे, यह गंभीर प्रश्न है। उनका एक प्रकार से आर्थिक शोषण शुरू है। मालिक और सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं हैं इसलिए आंदोलन का रास्ता चुनना ही उनके सामने एकमात्र विकल्प बचा था। अब इस आंदोलन में हिंसा हुई तो सरकार निंदा करे, कानून के तहत कार्रवाई करे, लेकिन ऐसे हर आंदोलन को ‘पाकिस्तानी साजिश’ करार देना
सरकार की विफलता
तो है ही, लेकिन मजदूर वर्ग का अपमान भी है। मजदूरों के शोषण की स्थिति पूरे भारत में है। मजदूरों को, असंगठित श्रमिक वर्ग को आज किसी का भी संरक्षण नहीं रहा है। कानून मजदूरों के खिलाफ हैं और अडानी जैसे पूंजीपतियों की सुविधा के लिए हैं। ऐसे में क्या किसान, मजदूरों को अपने बच्चों के साथ आत्महत्या कर लेनी चाहिए? विदेशी निवेश आ रहा है और उससे आर्थिक एवं औद्योगिक क्षेत्र की उन्नति हो रही है, ये केवल छलावे ही दिखते हैं। मेहनतकश, शिक्षक, महाराष्ट्र में एम.पी.एस.सी. के छात्र, आंगनवाड़ी कर्मचारी अपनी मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन क्या मुख्यमंत्री ने एक बार भी इसकी सुध ली? मेहनतकशों के हक नकारना एक अपराध है। इन्हीं मेहनतकशों के त्याग और बलिदान से देश को आजादी मिली और महाराष्ट्र को मुंबई मिली, लेकिन यह आजादी मेहनतकशों के काम नहीं आई और मुंबई पर मजदूरों का हक नहीं रहा। इसके विपरीत, संघर्ष करनेवालों को पाकिस्तानी ठहराकर भाजपा वालों ने अपने हाथ झाड़ लिए। पाकिस्तानियों ने पुलवामा और पहलगाम में असंख्य हिंदुओं को मार डाला। उन आतंकियों को न ढूंढ पाने वाले शासक ग्रेटर नोएडा के मजदूर आंदोलन में पाकिस्तानियों के घुसने का स्यापा मचाते हैं, यह उनकी डरपोक मानसिकता का लक्षण है। ये लोग पाकिस्तान को खत्म करने निकले थे। हमेशा ऐसी डींगें हांकने वाले किसान, मजदूर, छात्र, विश्वविद्यालयों में पाकिस्तानी घुस गए, इस विचार से ये चौंककर जाग जाते हैं। नोएडा के मजदूर आंदोलन में पाकिस्तानियों के घुसने का आरोप सत्ताधारियों द्वारा लगाना भारत की श्रमशक्ति का भयंकर अपमान है। वास्तव में जब उनके मन, पेट, दिमाग, होंठ और नस-नस में पाकिस्तान ही है। तो ये क्या पाकिस्तानियों को सबक सिखाएंगे?



