अंतर्राष्ट्रीय

अमेरिकी विश्वविद्यालयों में एक जैसे टेंट और महंगा खाना, क्यों जॉर्ज सोरोस पर लगा एंटी-इजरायल मुहिम की फंडिंग का आरोप?

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में बुधवार, 17 अप्रैल को स्टूडेंट्स के कुछ ग्रुप आए, इजरायल के विरोध में नारेबाजियां की, और फिर अपने घर या हॉस्टल जाने की बजाए कैंपस में ही टेंट गाड़कर बैठ गए. ये टेंट कोलंबिया से होते हुए कई यूनिवर्सिटीज, कई राज्यों में दिखने लगे. टेंटों के अलावा दो और चीजें समान हैं- स्टूडेंट्स और उनकी गाजा के सपोर्ट में नारेबाजियां. पुलिस अब प्रदर्शनकारियों को अरेस्ट कर रही है. इस बीच ये आरोप भी लग रहे हैं कि एंटी-इजरायल प्रोटेस्ट की फंडिंग व्यावसायी जॉर्ज सोरोस की तरफ से आ रही है. ये वही शख्स है, जो भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी बोलता रहा.

क्या हो रहा है अमेरिका में

कोलंबिया से शुरू प्रदर्शन कई राज्यों तक जा चुका. अब पुलिस धरना दे रहे स्टूडेंट्स को हिरासत में लेने लगी है. सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस उनपर केमिकल्स का भी इस्तेमाल कर रही है ताकि प्रदर्शन रुक जाएं. अकेले कोलंबिया यूनिवर्सिटी से अब तक 120 से ज्यादा छात्रों समेत पूरे अमेरिका से साढ़े 5 सौ स्टूडेंट्स गिरफ्तार हो चुके.

इन बड़े विश्वविद्यालयों में धरना

कोलंबिया के अलावा येल, न्यूयॉर्क, हार्वर्ड, बर्कले, ओहायो और ब्राउन यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन काफी उग्र रूप ले चुका.

क्या है स्टूडेंट्स की डिमांड

बच्चों की मांग है कि यूनिवर्सिटी उन प्रोडक्ट्स या कंपनियों से अलग हो जाएं, जो इजरायल से जुड़ी हुई हैं. न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के छात्रों की मांग ये तक है कि उनकी यूनिवर्सिटी का कैंपस, जो कि इजरायल के तेल अवीव में है, वो बंद कर दिया जाए. साथ ही गाजा में लड़ाई रोकने की डिमांड हो रही है.

इन प्रोटेस्ट्स को जॉर्ज सोरोस से जोड़ा जा रहा है

कोलंबिया विश्वविद्यालय में विरोध प्रदर्शन के लिए उन स्वयंसेवी संगठनों से पैसे या खाना-पीना आ रहा है, जिनकी बड़ी फंडिंग सोरोस करते हैं. इन सभी यूनिवर्सिटी में एक खास किस्म के टेंट लगे हुए हैं. न्यूयॉर्क सिटी के मेयर ने आरोप लगाया कि टेंट इतने ज्यादा एक जैसे हैं, या बैनर-पोस्टर इतने एक-से हैं कि साफ है कि इनके पीछे एक सेंट्रल ग्रुप काम कर रहा होगा.

मीडिया हाउस एबीसी न्यूज ने रिपोर्ट किया कि भले ही यूनिवर्सिटी प्रशासन इसे शांत प्रदर्शन कह रहा हो लेकिन ये हिंसक हो रहा है. यहां तक कि बाहर से लोग आकर इनमें शामिल हो रहे हैं. कथित तौर पर यूनिवर्सिटी स्टूडेंट पेड एक्टिविस्ट हैं. जिन्हें फिलिस्तीन के पक्ष में बोलने के लिए 2,880 से लेकर 7,800 डॉलर मिल रहे हैं.

स्वयंसेवी संस्थाओं के जरिए फंडिंग!

कोलंबिया की बात करें तो तीन ग्रुप सामने आ रहे हैं. स्टूडेंट्स फॉर जस्टिस इन पेलेस्टाइन (SJP), ज्यूइश वॉइस फॉर पीस और विदिन आर लाइफटाइम. SJP ने 7 अक्टूबर को हमास के इजरायल पर हमले को ‘ऐतिहासिक जीत’ तक बता दिया, जिस घटना में हजारों लोग मारे गए थे और सैकड़ों लोग बंधक बना लिए गए.

कथित तौर पर इस संगठन को सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन से साल 2017 से अब तक 3 लाख डॉलर से ज्यादा मिले. साथ ही रॉकफेलर ब्रदर्स से साढ़े 3 लाख डॉलर से ज्यादा मिल चुके.

यूएन तक पहुंच चुका मामला

जॉर्ज सोरोस पर चार महीने पहले से ही एंटी-इजरायल कैंपेन की फंडिंग के आरोप लगते रहे. यूनाइटेड नेशन्स में इजरायली राजदूत गिलाद मेनाशे अर्दान ने आरोप लगाया कि अक्टूबर 2023 में हमास और उनके बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से सोरोस ने इजरायल के खिलाफ 15 मिलियन डॉलर खर्च कर डाले. लेकिन राजदूत का आगे का बयान और चौंकाता है.

फॉक्स न्यूज में छपी रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सोरोस पर बीडीए कैंपेन को अरबों रुपए की फंडिंग का आरोप लगा दिया. बता दें कि बहिष्कार, विनिवेश और प्रतिबंध मूवमेंट प्रो-फिलिस्तीनी मुहिम है, जो इजरायल के उत्पादों के बहिष्कार और उनपर बैन की बात करती है.

क्यों लगते रहे सोरोस पर आरोप

इतने सारे आरोप हवाहवाई नहीं है. खुद सोरोस ने साल 2007 में अमेरिका के फाइनेंशियल टाइम्स में एक एडिटोरियल लिखा था. इसमें उन्होंने अमेरिका समेत इजरायल को लानतें भेजी थीं कि वे गाजा पट्टी में हमास को आधिकारिक मान्यता नहीं दे रहे. सोरोस पर हमेशा से ही एंटी-इजरायल होने के आरोप लगते रहे. वे चुन-चुनकर ऐसे एनजीओज को सपोर्ट करते रहे, जो हमास की मान्यता और इजरायली प्राइड को तोड़ने की बात करते हैं. इनकी लिस्ट लंबी है

अपनी जन्मस्थली ने भी सोरोस को छोड़ा

सबसे दिलचस्प ये है कि सोरोस खुद यहूदी और होलोकास्ट सर्वाइवर भी हैं. इसके बाद भी वे कथित तौर पर यहूदी देश इजरायल और दक्षिणपंथ के खिलाफ रहते आए. यहां तक कि उनके अपने देश हंगरी में भी एंटी-सोरोस पोस्टरों का लगना आम है. इसके पीछे वजह ये मानी जाती है कि सोरोस लेफ्ट लॉबी से ज्यादा से ज्यादा बिजनेस लेना चाहते हैं, साथ ही खुद को व्यावसायी के अलावा विचारक की तरह भी स्थापित करना चाहते हैं. वे अक्सर इंटरनेशनल मीडिया में राइट विंग या इससे जुड़े नेताओं पर लिखते या बोलते रहे.

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