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सेना के हाथ में नेपाल, Gen-Z का प्रस्ताव- हिंदू राष्ट्र और सुशीला कार्की को पीएम से कम कुछ नहीं

नेपाल में भ्रष्टाचार और इंटरनेट मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ Gen-Z के हिंसक प्रदर्शनों के बाद सेना ने सुरक्षा संभाली है। कर्फ्यू लगा दिया गया है और सड़कों पर सेना गश्त कर रही है। Gen-Z प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों के बीच अंतरिम सरकार के गठन पर सहमति बनी है जिसमें सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव है। Gen-Z ने नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने का भी प्रस्ताव रखा है।

 नई दिल्ली। नेपाल में भ्रष्टाचार, प्रभावशाली हस्तियों की विलासितापूर्ण जीवन शैली और इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रतिबंध के कारण Gen-Z युवाओं के दो दिनों तक चले हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सेना ने देश की सुरक्षा संभाल ली है। पूरे देश में कर्फ्यू लगा दिया गया है, सेना सड़कों पर गश्त कर रही है और हालात सामान्य होते दिख रहे हैं।

नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव

जेन-जी की वर्चुअल बैठक में नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के साथ कई प्रस्ताव पास किए गए है। इसमें नेपाल की वर्तमान संसद भंग करना, दो महीने में नया संविधान तैयार करके छह माह में संसदीय चुनाव कराना प्रमुख है। यह प्रस्ताव सेना अथवा अंतरिम सरकार के प्रतिनिधियों के पास पहुंचा है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

सुशीला कार्की को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने के प्रस्ताव के बाद Gen-Z का एक गुट बालेंद्र शाह को अंतरिम प्रधानमंत्री बनाने की मांग लेकर सेना मुख्यालय पहुंचा, लेकिन सेना ने उन्हें गुरुवार को आने को कहा। बिजली बोर्ड के पूर्व प्रमुख कुलमन घीसिंग भी अंतरिम प्रधानमंत्री पद की दौड़ में हैं।

प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन फूंका

गौरतलब है कि मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, राष्ट्रपति कार्यालय, प्रधानमंत्री आवास, सरकारी भवनों, सुप्रीम कोर्ट, राजनीतिक दलों के कार्यालयों और वरिष्ठ नेताओं के घरों में आग लगा दी थी। इसके चलते प्रधानमंत्री ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। फिर भी हालात नहीं सुधरे। बुधवार दोपहर तक हिंसा होती रही और मरने वालों की संख्या 19 से बढ़कर 30 हो गई। इस्तीफे के बाद से ओली सामने नहीं आए हैं।

सुरक्षाकर्मियों ने काठमांडू के विभिन्न हिस्सों से लूटपाट, आगजनी और तोड़फोड़ में शामिल 27 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस दौरान काठमांडू में पकड़े गए लोगों के पास से 3.37 लाख रुपये नकद, 31 हथियार, मैगजीन और गोलियां बरामद की गई हैं।

सेना ने प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठक की

जागरण संवाददाता ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नेपाल सेना ने बुधवार को अंतरिम सरकार के गठन के प्रस्ताव के साथ प्रदर्शनकारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठक की। जेन-जी के 7,800 सदस्यों ने भी वर्चुअल बैठक की। लगभग पांच घंटे तक चली इस बैठक में नेपाल की संसदीय व्यवस्था में बदलाव और नया संविधान व हिंदू राष्ट्र बनाने का प्रस्ताव पारित हुआ।

बैठक में सदस्यों ने कहा कि नेपाल की सांस्कृतिक विरासत हिंदू राष्ट्र से है, इसलिए नए संविधान में यह जरूर होना चाहिए। Gen-Z सदस्यों ने संसद भवन में नरसंहार का आरोप लगाते हुए आदेश देने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की।

सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति की जांच कराई जाए

बैठक में कहा गया कि नेपाल की जनता के पैसे से अपनी तिजोरी भरने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। पहले चरण में 46 वर्षों से सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की संपत्ति की जांच कराई जाए और उनके विरुद्ध कार्रवाई हो। नेपाल में हुए सभी भ्रष्टाचार की स्वतंत्र और न्यायिक जांच कराकर कठोरतम कार्रवाई की जाए।

बैठक में Gen-Z को राजनीति में लाने, प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख की व्यवस्था करने, सांसदों को मंत्री नहीं बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किया गया। प्रस्ताव किया गया कि प्रांतीय संरचना समाप्त कर केवल स्थानीय और संघीय व्यवस्था ही रहे। किसी भी व्यक्ति को प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल से अधिक न मिलें।

राष्ट्रीय सभा और स्थानीय निकाय को गैर-दलीय बनाया जाए। पत्रकार, चिकित्सक, शिक्षक, विद्यार्थी और कर्मचारियों के दलगत संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे। बैठक में प्रस्ताव पास किया गया कि सभी संवैधानिक परिषदों में दलगत नियुक्ति को तत्काल रद कर मेरिट के आधार पर नियुक्तियां हो। आंदोलन के पीछे यह भी एक प्रमुख कारण रहा। युवाओं का आरोप था कि जिस दल का शासन होता है, वह अपने-अपने लोगों को सरकारी नौकरियां दे देते हैं और पात्र युवा बेरोजगार रह जाते हैं।

सेना ने हथियार लौटाने का किया आग्रह

सुरक्षा की कमान संभालने के बाद नेपाली सेना ने लोगों से कहा है कि वे अत्यंत आवश्यक होने तक घर से बाहर न निकलें। सेना ने प्रदर्शनों के दौरान लूटी गई या मिली बंदूकें, हथियार और गोलियां नजदीकी पुलिस चौकी या सुरक्षाकर्मियों को लौटाने का भी आग्रह किया है।

सेना ने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, तोड़फोड़, आगजनी या व्यक्तियों और संपत्ति पर हमले को आपराधिक कृत्य माना जाएगा। उसने फंसे हुए विदेशी नागरिकों से निकटतम सुरक्षा चौकी या कर्मियों से मदद लेने को कहा है।

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