कौन हैं राजीव रंजन जो अमेरिका से टेंशन के बीच बने न्यू डेवलपमेंट बैंक के उपाध्यक्ष, इस नियुक्ति के मायने क्या?

नई दिल्ली: न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने डॉ. राजीव रंजन को वाइस प्रेसीडेंट (वीपी) और चीफ रिस्क ऑफिसर (सीआरओ) नियुक्त किया है। पांच साल के लिए उनकी नियुक्ति हुई है। यह ऐसे समय हुआ है जब भारत के अमेरिका के साथ रिश्तों में खटास आई है। न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) को पहले ब्रिक्स डेवलपमेंट बैंक के नाम से जाना जाता था। ब्रिक्स देशों की ओर से स्थापित यह एक बहुपक्षीय विकास बैंक है। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं में बुनियादी ढांचे और सतत विकास परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाना है।
एनडीबी को वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) जैसी पारंपरिक पश्चिमी-प्रधान वित्तीय संस्थाओं के पूरक के रूप में देखा जाता है। यह विकासशील देशों की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करता है। ब्रिक्स के पांच संस्थापक सदस्यों के अलावा एनडीबी ने बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), मिस्र, उरुग्वे, कोलंबिया और उज्बेकिस्तान जैसे अन्य देशों को भी सदस्य के रूप में शामिल किया है। इसके पांच संस्थापक सदस्यों में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं। इसका हेडक्वार्टर चीन के शंघाई में है। भारत, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में इसके क्षेत्रीय कार्यालय भी हैं। ब्रिक्स के नेतृत्व वाले बैंक ने बयान में कहा, ’23 अगस्त, 2025 को न्यू डेवलपमेंट बैंक के संचालन मंडल ने डॉ. राजीव रंजन को पांच साल के कार्यकाल के लिए एनडीबी का उपाध्यक्ष और मुख्य जोखिम अधिकारी नियुक्त किया है।’
कौन हैं राजीव रंजन?
डॉ. राजीव रंजन एक अनुभवी बैंकर हैं। उनके पास 35 सालों से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने 1989 में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ काम करना शुरू किया था। मई 2022 से वह कार्यकारी निदेशक और मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्य रहे हैं। पहले, मौद्रिक नीति विभाग के प्रमुख और एमपीसी के सचिव के रूप में डॉ. रंजन ने मौद्रिक नीति और लिक्विडिटी से जुड़े कामों में अहम भूमिका निभाई।
डॉ. रंजन आर्थिक और नीति अनुसंधान विभाग का नेतृत्व कर चुके हैं। उन्होंने 2012 से 2015 तक ओमान के सेंट्रल बैंक में इकनॉमिक पॉलिसी एक्सपर्ट के रूप में भी काम किया है। वह रिजर्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय विभाग और बाहरी निवेश और संचालन विभाग में भी रह चुके हैं।
कई क्षेत्रों में महारत
डॉ. रंजन को कई क्षेत्रों में महारत हासिल है। इनमें मैक्रोइकॉनॉमिक पॉलिसी, वित्तीय बाजार संचालन, जोखिम प्रबंधन, विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाजार शामिल हैं। उन्होंने भारत की आर्थिक व्यवस्था में बड़ा योगदान दिया है। डॉ. रंजन ने कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ भी काम किया है। इनमें G20, आईएमएफ, वर्ल्ड बैंक, बीआईएस, एफएसबी, ओईसीडी, SAARC और ग्लोबल साउथ के सेंट्रल बैंक भी हैं।
डॉ. रंजन ने कई किताबें और लेख लिखे हैं। ये लेख आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर हैं। उन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की है। वह मुंबई विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी भी हैं।
क्या है इस नियुक्ति का मतलब?
न्यू डेवलपमेंट बैंक (एनडीबी) में एक भारतीय का इतने ऊंचे पद पर नियुक्त होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है। इसका मतलब सिर्फ एक व्यक्ति की नियुक्ति नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और इसके रणनीतिक लक्ष्यों को दर्शाता है। भारतीय की नियुक्ति से यह साफ होता है कि भारत इस संस्था के निर्णयों और दिशानिर्देशों में एक मजबूत और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। यह भारत की सॉफ्ट पावर और वैश्विक नेतृत्व को भी मजबूत करता है।



