राष्ट्रीय

मैं ना मानूं…

मैं ट्रंप हूं। मैं नहीं मानूंगा। मैं पंगे खड़े करता हूं और फिर चौधरी बनकर दुनिया के आगे तन जाता हूं। मेरा एजेंडा दादागिरी का है। मेरा एजेंडा बिजनेस का है। मैं व्यापारी हूं, राजनीतिक व्यापारी। सौदेबाजी करना मेरी रग-रग में है। मैं दो देशों की लड़ाई में अपने आप बीच में कूद पड़ता हूं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेकता हूं। दो देश एक-दूसरे पर गोली बरसाते हैं, मैं बयानों के गोले दागता हूं। दुनिया मुझे ट्रंप कहती है। मैं किसी को भी हडक़ा देता हूं। मेरा मुल्क जिस आतंकवादी पर हजारों डॉलर का इनाम रखता है, मैं गिरगिट की तरह रंग बदलकर उस आतंकवादी को गले लगा लेता हूं और उसे चाय पेश करता हूं। दुनिया दंग रह जाती है। दुनिया को दंग रखना मेरे व्यक्तित्व की फितरत है। मैं हिटलर की तरह तानाशाह हूं। मैं दुनिया का सबसे जबरदस्त व्यापारी भी हूं। मैं माल बेचने में यकीन रखता हूं, मैं फुस्स पटाखे भी मिसाइल के नाम पर बेच देता हूं। खरीदने वाले उन पटाखों को खरीदते हैं और फिर अपने स्टोर में जमा कर देते हैं। मैं जमाखोरी को बढ़ावा देता हूं। मैं किसी की नहीं सुनता। दुनिया मुझे दादा भी कहती है। क्योंकि मैं दुनिया का बॉस हूं और बॉस वही जो सब को हडक़ाए। ईश्वर ने दुनिया को हडक़ाने के लिए धरती पर भेजा है। मैं ईश्वर को खुश करने में लगा हूं। मैंने जाकर ईश्वर को हिसाब-किताब भी देना है। अभी ईश्वर ने मुझसे पूछा नहीं है, क्योंकि ईश्वर की भी हिम्मत नहीं हो रही। मेरी आउटपुट ने ईश्वर को भी सकते में डाल रखा है। मैं ट्रंप हूं और मेरे भीतर नीरो की आत्मा भी है। रोम जलता है तो जलता रहे, मेरा काम बंसी बजाना है। मैं अपनी एक टांग पर दूसरी टांग रखकर बंसी बजाता हूं और दुनिया मेरा हुकम बजाती है। मेरी आंखें छोटी-छोटी हैं, लेकिन उनमें साजिशों, षड्यंत्रों के सैटेलाइट घूमते रहते हैं। उन सैटेलाइट का कंट्रोल मेरे दिमाग में रहता है। मैं दिमाग से काम लेता हूं, लेकिन कभी-कभी मेरा दिमाग खराब भी हो जाता है।

मैं उल्टे-सीधे डिसीजन लेता हूं। लेकिन दुनिया खुलकर हंस नहीं पाती। दुनिया में मेरा जलवा है। खौफ है। क्योंकि मैं ट्रंप हूं। मैं वोट मांगता नहीं, वोट हथिया लेता हूं। मैं हार मानता नहीं, हार को फाड़ देता हूं। मुझे लोकतंत्र से एलर्जी है, लेकिन मैं लोकतंत्र का मुखौटा पहनकर तानाशाही करता हूं। मेरे भाषणों में तथ्य नहीं, धमकी होती है। मेरे ट्वीट्स हथियार होते हैं। मैं ट्विटर को भी अपनी जागीर समझता था, जब तक उसने मुझे ही ब्लॉक नहीं कर दिया। लेकिन मैं फिर भी नहीं मानता। क्योंकि मैं ट्रंप हूं, और मैं ना मानूं! मैं दीवारें खड़ी करता हूं, देशों के बीच, दिलों के बीच। मैं लोकतंत्र को दीवार के पीछे छुपा देता हूं। मैं सच्चाई से नहीं, स्क्रीनप्ले से काम लेता हूं। मेरे लिए चुनाव एक रियलिटी शो है, जिसमें मैं हमेशा हीरो हूं। मैं अदालतों को सर्कस बना देता हूं और संविधान को खिलौना। मैं दुनिया के नक्शे को शतरंज समझता हूं और नेताओं को प्यादे। मेरे हाथ में पेंसिल नहीं, परमाणु बटन होता है, और मैं उंगलियां चला देता हूं। मीडिया मुझसे सवाल नहीं करता, क्योंकि मैं कैमरे से घूरता हूं। मैं इतिहास को अपनी किताब में एडिट करता हूं, और भविष्य को धमका देता हूं। क्योंकि मैं ट्रंप हूं, और मैं हर सुबह खुद को भगवान मानकर उठता हूं, और कहता हूं, मैं ना मानूं! और दुनिया मुझे मानने लगी है, क्योंकि मेरा जलवा ही ऐसा है।

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