चीन टेक देगा घुटने या बिगाड़ेगा खेल, ट्रंप को शॉक देने के लिए अभी तरकश में कौन से तीर?

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के ट्रेड पार्टनर्स पर भारी टैक्स लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन, नाटकीय तौर पर इसमें अचानक बदलाव कर दिया। जहां बाकी देशों को नए टैरिफ से 90 दिनों की राहत मिली, वहीं चीन को इससे छूट नहीं मिली। मंशा चीन पर और दबाव बढ़ाने की है। ट्रंप ने 9 अप्रैल, 2025 को चीनी सामानों पर टैक्स बढ़ाकर 125% कर दिया। ट्रंप का कहना था कि चीन वैश्विक बाजार का सम्मान नहीं कर रहा है। शायद ट्रंप को यह बात पसंद नहीं आई कि चीन अमेरिकी टैक्स का सीधा सामना करने को तैयार है। कई देशों ने ट्रंप के टैक्स बढ़ाने के फैसले के खिलाफ तुरंत कार्रवाई नहीं की। उन्होंने बातचीत करने का फैसला किया। लेकिन, चीन ने अलग रास्ता चुना। चीन ने तुरंत जवाब दिया। अमेरिका पर 125% टैक्स लगा दिया। अब दोनों देशों के बीच व्यापार को लेकर बहुत तनाव है। चीन पीछे हटने को तैयार नहीं है। अमेरिका-चीन संबंधों के एक जानकारों के अनुसार, ड्रैगन से यही उम्मीद थी। पहले जब ट्रंप ने चीन के साथ व्यापार युद्ध शुरू किया था तब चीन बातचीत करना चाहता था। लेकिन, अब चीन ज्यादा मजबूत स्थिति में है। चीन को लगता है कि वह अमेरिका को उतना ही नुकसान पहुंचा सकता है, जितना अमेरिका उसे पहुंचा सकता है। चीन यह भी सोचता है कि वह इस स्थिति में दुनिया में अपनी ताकत बढ़ा सकता है।
चीन के लिए अब हालात बदल गए हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि टैरिफ लगने से चीन के उन निर्माताओं को नुकसान हुआ है जो दूसरे देशों को सामान भेजते हैं। खासकर उन निर्माताओं को जो अमेरिका के लिए फर्नीचर, कपड़े, खिलौने और घरेलू चीजें बनाते हैं। ट्रंप ने पहली बार 2018 में चीन पर टैक्स बढ़ाया था। इसके बाद से कई आर्थिक कारणों से चीन के लिए हालात बदल गए हैं।
अमेरिकी बाजार अब उतना महत्वपूर्ण नहीं
सबसे जरूरी बात यह है कि चीन की अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिकी बाजार अब उतना महत्वपूर्ण नहीं रहा। 2018 में जब व्यापार युद्ध शुरू हुआ था तब चीन जितना सामान दूसरे देशों को भेजता था, उसका 19.8% अमेरिका को जाता था। 2023 में यह घटकर 12.8% रह गया। टैरिफ लगने से चीन अपनी घरेलू मांग को बढ़ाने पर ध्यान दे सकता है। इससे लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे होंगे और चीन की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
2018 में जब व्यापार युद्ध हुआ था, तब चीन की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही थी। लेकिन, अब हालात अलग हैं। रियल एस्टेट बाजार में मंदी है। लोग अपना पैसा देश से बाहर निकाल रहे हैं और पश्चिमी देश चीन से दूरी बना रहे हैं। इससे चीन की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है। चीन के खिलाफ ट्रंप की टैक्स नीति से दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था को एक बहाना मिल सकता है। वह लोगों को बता सकता है कि अमेरिका की वजह से अर्थव्यवस्था खराब हो रही है।
चीन यह भी जानता है कि अमेरिका आसानी से चीनी सामानों पर निर्भरता खत्म नहीं कर सकता। खासकर सप्लाई चेन के मामले में। भले ही अमेरिका चीन से कम सामान खरीद रहा है, लेकिन वह अभी भी कई चीजों के लिए चीन पर निर्भर है। जैसे कि चीन में बने सामान और कच्चा माल। 2022 तक अमेरिका 532 तरह के सामानों के लिए चीन पर निर्भर था। यह 2000 के मुकाबले लगभग चार गुना ज्यादा है। वहीं, चीन की अमेरिका पर निर्भरता आधी रह गई है।
माना जा रहा है कि टैक्स बढ़ने से कीमतें बढ़ेंगी। इससे अमेरिकी, खासकर गरीब नाराज हो सकते हैं। चीन को लगता है कि ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी अर्थव्यवस्था मंदी की ओर जा सकती है।
चीन के पास तरकश में कई तीर
चीन के पास अमेरिका के खिलाफ कार्रवाई करने के कई तरीके हैं। वह अपनी मुद्रा युआन को और कमजोर होने दे सकता है ताकि उसका निर्यात सस्ता रहे। वह दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर भी रोक लगा सकता है। इसके अलावा, चीन में ‘अविश्वसनीय संस्थाओं’ की सूची में शामिल अमेरिकी कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
चीन के पास दुर्लभ खनिजों की सप्लाई चेन का कंट्रोल है। यह सैन्य और उच्च तकनीक उद्योगों के लिए बहुत जरूरी है। माना जाता है कि अमेरिका जितने रेयर अर्थ एलीमेंट्स आयात करता है, उसका लगभग 72% चीन से आता है।



