राजनीति

रोम-रोम में अंतर्मुखी राम को पहचानें लोग

मनु द्वारा स्थापित अयोध्या को साकेत और राम नगरी भी कहा जाता है। अथर्ववेद के अनुसार धर्मनगरी अयोध्या को देवताओं का स्वर्ग माना गया है। स्कन्द पुराण के अनुसार सरयू नदी के तट पर बसी प्रभु राम की नगरी अयोध्या को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का पवित्र स्थान माना गया है। अयोध्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की जन्म भूमि है। भगवान राम की दिव्यता, भद्रता, सभ्यता तथा भव्यता को प्रतिबिंबित करने वाला 22 जनवरी 2024 का दिन भारतवर्ष के इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाला है। करोड़ों देशवासी बहुत ही उत्सुकता तथा बेसब्री से इस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं। भारतीय संस्कृति, सभ्यता एवं धर्म की दृष्टि से यह दिन ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व होगा। श्री राम तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की देखरेख में राम जन्मभूमि पर निर्माणाधीन 2.7 एकड़ जमीन पर श्री राम मन्दिर बनाया गया है। यह निर्माणाधीन तीर्थस्थल लार्सन एंड टूब्रो कम्पनी द्वारा मन्दिर के डिजाइन तथा नि:शुल्क देखरेख में पूर्ण चुका है। इस परियोजना में चार वर्षों से लगभग 1600 कर्मचारी, इंजीनियर तथा कारीगर हर रोज चौबीस घण्टे कार्य कर रहे थे। इस भव्य राम मंदिर के निर्माण में लगभग 1800 करोड़ रुपए का अनुमान है। लगभग 500 वर्षों की प्रतीक्षा तथा वर्षों से अपने अधिकार एवं न्याय की लड़ाई के बाद बन चुका यह अयोध्या धाम दुनिया में करोड़ों हिंदुओं की आस्था तथा भावनात्मकता का प्रतीक होगा। इस परिसर में मुख्य राम मन्दिर की ऊंचाई 162 फीट होगी। मुख्य मन्दिर के साथ छह और मन्दिर बनाए गए हैं।


मन्दिर के मुख्य द्वार को ‘सिंह द्वार’ के नाम से जाना जाएगा। इस मन्दिर में 392 पिल्लर, 44 गेट तथा मुख्य मन्दिर तक 32 सीढिय़ां होंगी। देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाले भगवान राम की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा के लिए 26 जनवरी 2024 से प्राण प्रतिष्ठा विधियों के लिए 12 आधिवासों का 16 जनवरी से कार्यक्रम शुरू हो चुका है। 22 जनवरी 2024 को 12 बजकर 20 मिनट पर अभिजीत मुहूर्त में मुख्य अनुष्ठान शुरू होगा तथा चालीस मिनट की विशेष पूजा के पश्चात नवनिर्मित मंदिर के गर्भगृह में भगवान राम की मूर्ति स्थापित होगी। देश के प्रधानमंत्री को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों द्वारा निमंत्रित किया जा चुका है। प्रधानमंत्री स्वयं भी इस विशाल आयोजन में भाग लेने के लिए उत्साहित हैं। सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने पूरा वातावरण परिवर्तित कर दिया है। पूरा देश राममय हो चुका है। भारतीय सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक तथा राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में भी यह ऐतिहासिक घटना महत्वपूर्ण है। 30 दिसम्बर 2023 को प्रधानमंत्री ने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि हवाई अड्डे तथा अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन का उद्घाटन करने के पश्चात लोगों से आग्रह किया कि 22 जनवरी को केवल आमन्त्रित व्यक्ति ही अयोध्या पहुंचें। प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग अयोध्या नगरी का रुख न करें। इससे प्रशासन तथा कानून व्यवस्था प्रभावित होगी। अत्यधिक भीड़ से जनजीवन प्रभावित होगा। उन्होंने 22 जनवरी 2024 को देशवासियों से अपने घर पर ही रहकर श्री राम ज्योति जलाने तथा दीपावली मनाने का आग्रह किया। 26 जनवरी 2024 से यह मन्दिर सार्वजनिक दर्शनों के लिए आम जनता के लिए खोल दिया जाएगा। भगवान राम को श्री हरि विष्णु अवतार माना जाता है। भगवान राम आदर्श पुरुष हैं जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए उदाहरणीय एवं अनुकरणीय है, इसलिए उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है।

भगवान राम संस्कृति, सभ्यता, आदर्श, दया, धर्म, करुणा, सत्य, प्रेम, त्याग, समर्पण और मर्यादा के प्रतीक हैं। अपने कत्र्तव्य निर्वहन, साहस, निष्ठा, भक्ति दृढ़ता, त्याग तथा न्याय व मर्यादित आचरण के कारण भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उन्होंने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए राजपाठ छोडक़र 14 वर्ष वनों में बिताए, फिर भी अपने आचरण से जीवन के शाश्वत मूल्यों तथा सिद्धान्तों का पालन करते हुए एक श्रेष्ठ राजा कहलाए। भारतीय संस्कृति तथा जनमानस में राम एक सभ्यता है, राम एक दृष्टि है, राम एक दर्शन है तथा एक श्रेष्ठ जीवन पद्धति है। वर्तमान में नई पीढ़ी द्वारा भगवान राम के चरित्र, आदर्श, संस्कार, विचार को आत्मसात किए जाने की नितांत आवश्यकता है तथा मन नायक तथा जननायक प्रभु राम के सूक्ष्म रूप को आत्मा की दृष्टि से अनुभूत करने की आवश्यकता है। निश्चित रूप से भारतवर्ष के इतिहास में 22 जनवरी 2024 का दिन एक ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व दिन होगा। राम जन-जन के प्राण हैं। राम सभी के प्राण आधार हैं। राम सभी के आदर्श हैं। राम सभी व्यक्तियों, जातियों, पंथों, मतों, समुदायों, सम्प्रदायों तथा धर्मों से श्रेष्ठ हैं। इस अवसर को बहुत ही श्रद्धा, विश्वास, उल्लास तथा उत्साह के साथ मनाया जाना चाहिए। इस मन्दिर के निर्माण का श्रेय भी सभी करोड़ों भारतवासियों को है और सभी देशवासी बधाई के पात्र भी हैं। राम सभी प्राणियों को आत्मा से जोड़ते हैं। हालांकि इस आयोजन के परिप्रेक्ष्य में देश के शहरों, गांवों, गली, मुहल्लों, नगरों तथा महानगरों में चुपके से राजनीतिक तथा चुनावी ब्यार भी बह रही है। व्यावहारिक दृष्टिकोण यह है कि इस ऐतिहासिक आयोजन में कोई भी तथा किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।

धर्म तथा संस्कृति को सक्रिय राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। हालांकि भारत के संविधान की मूल प्रति में मौलिक अधिकारों से जुड़े अध्याय के आरम्भ में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता सीता तथा भाई लक्ष्मण का स्कैच अंकित है। देश के प्रधान न्यायाधीश की सीट पर मूल सिद्धांत के रूप में धर्म की व्याख्या करते हुए ‘यतो धर्मस्ततो जय:’, (अर्थात जहां धर्म है वहां जय यानी जीत है) से व्याख्या की गई है। इसलिए भारतीय परिप्रेक्ष्य में भगवान राम, लोकतन्त्र, नैतिकता, न्याय तथा राजनीति को भी अलग नहीं किया जा सकता। राम केवल हिंदुओं के राम नहीं बल्कि विश्व में कण-कण तथा जन-जन में राम व्याप्त हैं। बहरहाल यह अवसर किसी धर्म, जाति, मत, पंथ, दल, मजहब, समाज या संप्रदाय का विषय नहीं है। इस भव्य आयोजन के साथ देश तथा दुनिया में समभाव, सद्भाव, प्रेम तथा शान्ति की प्रार्थना की जानी चाहिए। इस भारतीय विशाल ऐतिहासिक महोत्सव को अगाध श्रद्धा, उत्साह तथा उल्लास से मनाया जाना चाहिए। इसी में प्रभु श्री राम तथा राम मंदिर की सार्थकता है। लोग रोम-रोम में अंतर्मुखी राम को पहचानें, तो कल्याण होगा।

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