स्पेस में तैरते क्यों रहते हैं एस्ट्रोनॉट, गिरते क्यों नहीं, क्या सही कारण जानते हैं आप?

कई सवाल सुनने में आसान लगते हैं लेकिन जवाब देने में नहीं. ऐसा ही एक सवाल कोरा पर पूछा गया जो सरल लगता है पर इसके अलग अलग जवाबों ने सोचने पर मजबूर कर दिया. तो क्या आप जानते हैं कि “स्पेस में एस्ट्रोनॉट तैरने क्यों लगते हैं? जब आप कोरा पर इसके जवाबों पड़ेंगे तो कुछ और ही बात लगेगी. तो आइए जानते हैं कि आखिर ऐसा क्यों होता है कि स्पेस में जाने पर एस्ट्रोनॉट्स तैरने लगते हैं.
इस सवाल का जबाव आसान सा है. स्पेस में ग्रैविटी नहीं होती है. पृथ्वी पर ग्रैविटी होती है जिससे हम हवा में नहीं रहते हैं बल्कि नीचे गिरते हैं. स्पेस में हम नीचे नहीं गिरते हैं और ग्रैविटी ना होने के कारण हम तैरने लगते हैं. लेकिन इसका कारण इतना भी सरल नहीं हैं.
दरअसल जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊंचाई पर जाते हैं, ग्रैविट की असर कम होता जाता है. एक जगह ऐसी आती है कि हम गिरने की जगह तैरने लगते हैं. लेकिन तब भी पृथ्वी की ग्रैविटी का असर बना रहता है. इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी आईएसएस, जहां हमारे एस्ट्रोनॉट्स होते हैं, यहीं पर जाते हैं और वे यहीं पर तैरते हैं.
इतना जानने का बाद हमें एक यूजर का जवाब समझ में आ सकता है, जो सुनने में अजीब लगता है. उस यूजर ने इस सवाल का जवाब रोचक अंदाज में शुरू किया. उसने कहा, “स्पेस में एस्ट्रोनॉट इसलिए नहीं तैरते क्योंकि वहां ग्रैविटी नहीं होती, बल्कि वे इसलिए तैरते हैं क्योंकि वहां ज्यादा ग्रैविटी नहीं होती है.”
दरअसल यूजर माइक्रोग्रैविटी की बात कर रहा था. इसी से जुड़ी बात यह है कि आईएसएस पर ग्रैविटी उतना ही असर देती है कि वह ना तो पृथ्वी पर गिरता है और ना ही उसके असर से मुक्त होता है. नतीजा ये है कि वह पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है.
यानी अगर हम एस्ट्रोनॉट पृथ्वी से और दूर गए तो अर्थ की ग्रैविटी से बेअसर हो जाएंगी और हम अंतरिक्ष में तैरने के साथ साथ भटकने भी लगेंगे. जबकि आईएसएस में रहते हुए हम केवल उसी के वातावरण में तैरते रहेंगे. सच यही है कि आईएसएस ना तो गिर रहा होता है और ना ही तैर रहा होता है. वह तो पृथ्वी का चक्कर लगा रहा है. पर इन जवाबों से कहीं आप तो चक्कर में नहीं आ गए?



