संपादकीय

‘जहरीली शराब से हो रही मौतें’ ‘उजड़ रहे परिवार

शराब एक ऐसी बुराई है जिस पर रोक लगाई जानी चाहिए परंतु हमारी सरकारों ने इस ओर से आंखें मूंद रखी हैं। इसका कारण यह है कि हमारे शासक इसकी बिक्री से होने वाली भारी-भरकम आय को खोना नहीं चाहते क्योंकि सरकारें इसी के सहारे ही चलती हैं। आज देश में शराब का सेवन लगातार बढ़ रहा है और अब तो समाज विरोधी तत्वों द्वारा नकली जहरीली शराब भी बनाई जाने लगी है जिसके इस्तेमाल से होने वाली मौतों के कारण बड़ी संख्या में महिलाओं के सुहाग उजड़ रहे हैं और बच्चे अनाथ हो रहे हैं जो निम्न घटनाओं से स्पष्ट है : 

* 26 जुलाई, 2022 को गुजरात के ‘बोटाद’ जिले में जहरीली शराब पीने से 18 लोगों की मौत और 45 लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए।
* 24 सितम्बर, 2023 को बिहार के मुजफ्फरपुर में जहरीली शराब पीने से 2 लोगों की मौत तथा 3 लोगों की आंखों की रोशनी चली गई।
* 11 नवम्बर, 2023 को हरियाणा के यमुनानगर और अम्बाला में जहरीली शराब पीकर मरने वालों की संख्या 20 तक पहुंच गई।
* 19 नवम्बर, 2023 को बिहार के सीतामढ़ी में जहरीली शराब पीने से 3 लोगों की मौत तथा 1 गंभीर रूप से बीमार हो गया। 

* 22 मार्च, 2024 को संगरूर में जहरीली शराब पीने से 20 लोगों की मौत हो गई जबकि कुछ लोग अंधे हो गए। 
* 18 जून, 2024 को छत्तीसगढ़ में कोरबा जिले के ‘कोटमेर’ गांव में जहरीली शराब पीने से एक महिला सहित 3 लोगों की मौत हो गई। 
* 18 जून, 2024 को ही तमिलनाडु के ‘कल्लाकुरिची’ जिले में ‘पैकेट’ और ‘सैशे’ के रूप में खरीदी जहरीली शराब पीने के कुछ ही समय बाद बड़ी संख्या में लोगों को दस्त, उल्टी आने, पेट दर्द और आंखों में जलन की शिकायत शुरू हो गई और फिर उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई। 

20 जून के आते-आते जहरीली शराब पीने से मरने वालों की संख्या 47 तक पहुंच गई, जबकि 100 से अधिक लोग अभी भी अस्पतालों में पड़े हैं जिनमें से 30 की हालत गंभीर है। इस मामले में 49 वर्षीय अवैध शराब विक्रेता ‘कन्नुकुट्टी’ सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ‘कन्नुकुट्टी’ के पास से जब्त की गई 200 लिटर अवैध शराब की जांच में सामने आया कि उसमें घातक ‘मेथेनाल’ मौजूद था। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष भी राज्य के ‘विल्लूपुरम’ तथा ‘चेंगलपट्टू’ जिलों में अवैध शराब पीने से 22 लोगों की मौत हो गई थी। 

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने इस मामले की जांच के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश बी.गोकुलदास के नेतृत्व में एक सदस्यीय आयोग गठित करने का निर्देश देने के अलावा जिले के एस.पी. को बर्खास्त तथा जिला कलैक्टर का तबादला कर दिया है। शराब के ऐसे दुष्प्रभावों को देखते हुए ही राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने पराधीनता के युग में यह घोषणा की थी कि यदि भारत का शासन आधे घंटे के लिए भी उनके हाथ में आ जाए तो वह शराब की सभी डिस्टिलरियों और दुकानों को बिना मुआवजा दिए ही बंद कर देंगे। यही नहीं, गांधी जी ने महिलाओं को भी स्वाधीनता आंदोलन से जोड़ा और देश के कोने-कोने में महिलाओं ने छोटे दूध पीते बच्चों तक को गोद में लेकर शराबबंदी की मांग के साथ-साथ विदेशी कपड़ों की होली जलाई और अनेक महिलाओं ने 2-2, 3-3 वर्ष की कैद भी काटी थी। उक्त दुखद घटनाओं से स्पष्ट है कि शराब किस कदर तबाही लाती है। अत: इसके सेवन पर अंकुश लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने और दोषियों को

कठोरतम दंड देने की जरूरत है ताकि परिवार न उजड़ें। हम स्वयंसेवी संगठनों और संत समाज से आग्रह करेंगे कि वे उक्त घटनाओं का संज्ञान लेकर शराब की लानत पर प्रतिबंध लगवाने की दिशा में प्रयास शुरू करें।

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