योगी का तीसरा कार्यकाल सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ने कसी कमर

2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही, भाजपा एक जीवंत विपक्ष के कारण केंद्र में सत्ता विरोधी लहर का सामना करने के बावजूद योगी आदित्यनाथ सरकार का तीसरा कार्यकाल सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। भाजपा समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के हाई-वोल्टेज पी.डी.ए. (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) जनसंपर्क का मुकाबला करने के लिए एक रणनीतिक योजना पर जोर दे रही है। चुनावी विमर्श को जातिगत समीकरणों के वर्चस्व से बचाने के लिए, भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार सुशासन, विकास, कानून-व्यवस्था और जमीनी स्तर पर लामबंदी पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी का उद्देश्य समाजवादी पार्टी के पिछले कार्यकालों को फिर से सुर्खियों में लाना है, ताकि मतदाताओं को उसके शासन से जुड़े विवादों और संवेदनशील मुद्दों की याद दिलाई जा सके। यह काम विशाल रैलियों और क्षेत्रीय आऊटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से किया जाएगा। हालांकि, पार्टी नेताओं ने कहा कि महिला मतदाताओं पर पार्टी की निर्भरता और मुख्यमंत्री की छवि कुछ ऐसे प्रमुख कारक हैं, जो पार्टी को जीत दिलाएंगे। जमीनी स्तर पर, पार्टी अपनी बूथ-स्तरीय मशीनरी को सशक्त बनाने की कोशिश कर रही है। मतदाता संपर्क को बढ़ाने, निर्वाचन क्षेत्र-स्तरीय फीडबैक की निगरानी करने और मतदाताओं के साथ नियमित बातचीत सुनिश्चित करने के लिए इसके पन्ना-प्रमुख नैटवर्क और स्थानीय बूथ समितियों को फिर से सक्रिय किया जा रहा है।
यू.पी. के लिए ओवैसी की रणनीति : 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने के साथ, ए.आई.एम.आई.एम. अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अमरीका में मिशिगन सीनेट दौड़ में अब्दुल एल-सैयद की जीत को उत्तर प्रदेश के मुसलमानों से जोडऩे का प्रयास किया है। ओवैसी ने सैयद की जीत पर टिप्पणी की थी कि ‘‘अगर अब्दुल अमरीका में जीत सकते हैं तो यू.पी. के मुसलमानों को भी अपनी राजनीतिक ताकत का एहसास होना चाहिए।’’ उत्तर प्रदेश में अपनी हालिया सभाओं में, ओवैसी ने मुसलमानों से नेहरू-गांधी या यादवों पर निर्भर रहना बंद करने और समुदाय के भीतर से नेतृत्व तैयार करने का आग्रह किया है। उनके इन बयानों के लिए तेलंगाना कांग्रेस ने उनकी आलोचना की है। ‘‘ओवैसी एक ऐसा नेतृत्व फॉर्मूला निर्यात कर रहे हैं जिसे उन्होंने हैदराबाद या तेलंगाना में कभी लागू नहीं किया।’’ दूसरी ओर, सपा नेता अपनी प्रतिक्रिया में अधिक मुखर थे और उन्होंने कहा कि ओवैसी ने मिस्र मूल के सैयद का उदाहरण केवल राज्य में मुसलमानों को विभाजित करने और चुनावों में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए दिया है। ए.आई.एम.आई.एम. ने मुख्य रूप से उन विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बनाई है, जहां मुस्लिम बड़ी संख्या में हैं।
बसपा ने भी कीं चुनावी तैयारियां तेज : बी.एस.पी. (बसपा) ने 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। बसपा प्रमुख मायावती की योजना 6 दिसम्बर को, जो कि दलित प्रतीक बी.आर. आंबेडकर की पुण्यतिथि का दिन है, राज्य में एक विशाल रैली आयोजित करने की है, ताकि अपने आलोचकों को यह संदेश दिया जा सके कि उनका मूल वोट बैंक (दलित) अभी भी बरकरार है। यह रैली लखनऊ के आंबेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल पर आयोजित की जाएगी। यह निर्णय गुरुवार को लखनऊ में आयोजित बसपा पदाधिकारियों की बैठक में लिया गया। इस बीच बैठक में उम्मीदवार चयन और समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर आॢथक रूप से कमजोर समूहों के बीच पहुंच का विस्तार करने के प्रयासों सहित चुनावों के लिए संगठनात्मक तैयारी पर जोर दिया गया। पार्टी नेताओं को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा कि बसपा का उद्देश्य बहुजन समाज के स्वाभिमान व सम्मान को मजबूत करना और लोकतांत्रिक माध्यमों से ‘हमारा वोट, हमारा राज’ के मिशन को आगे बढ़ाना बना हुआ है। पिछले एक दशक में राज्य में हर चुनाव के साथ बसपा का वोट प्रतिशत घटता जा रहा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी राज्य में अपना खाता भी नहीं खोल सकी।
चुनावों को लेकर चिराग पासवान भी सक्रिय : लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि यदि भाजपा के साथ गठबंधन की बातचीत विफल होती है तो उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लडऩे के लिए पूरी तरह तैयार है। वाराणसी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए चिराग ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों ने संविधान और सामाजिक न्याय की बात तो की लेकिन लोगों के अधिकारों को सुरक्षित करने की बात आने पर वे चुप रहे। लोजपा (आर.वी.) को बिहार में अपना मूल समर्थन दलित पासवान समुदाय से मिलता है।
उत्तर प्रदेश में, इसका प्रयास अतीत में जाटव समुदाय से इतर दलित मतदाताओं पर केंद्रित रहा है, जिसमें पासी समुदाय पर विशेष ध्यान दिया गया है। जाटव पारंपरिक रूप से मायावती की बहुजन समाज पार्टी का समर्थन करते रहे हैं। इस बीच, ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) ने संकेत दिया कि वह उत्तर प्रदेश में बिहार स्थित दलों के विस्तार के प्रयासों का विरोध करेगी।-राहिल नोरा चोपड़ा



