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राष्ट्रपति मुर्मु ने वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के आध्यात्मिक जागृति कार्यक्रम का किया शुभारंभ

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागृति’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया और ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने ब्रह्माकुमारीज नडियाद के ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का भी वर्चुअल रूप से शुभारंभ किया।

आर्थिक विकास के साथ मानवीय विकास जरूरी

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि मानवीय विकास की भी आवश्यकता है। ऐसी शिक्षा की जरूरत है जो केवल बुद्धि का विकास न करे, बल्कि विवेक को भी जागृत करे। उन्होंने कहा कि प्रगति ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो और शक्ति ऐसी हो जो दूसरों पर नियंत्रण करने के बजाय स्वयं पर नियंत्रण करना सिखाए।

आध्यात्मिकता मनुष्य को मनुष्य से जोड़े

राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी आध्यात्मिकता की आवश्यकता है जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़े। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि ब्रह्माकुमारीज संस्था ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत परिवर्तन और विश्व नवीनीकरण का संदेश भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के अनेक देशों तक पहुंचा रही है।

व्यक्ति के बदलाव से समाज में आता है सकारात्मक परिवर्तन

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि मनुष्य के भीतर परिवर्तन की संभावना हमेशा रहती है। यदि किसी व्यक्ति के भीतर यह विश्वास जागे कि विचारों और कर्मों को बदलकर जीवन बदला जा सकता है और उसके जीवन में आशा व आत्मसम्मान वापस आए, तो वह केवल स्वयं में ही नहीं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

शांति और सद्भाव का केंद्र बने ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि शुभारंभ के बाद ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ ऐसा स्थान बनेगा, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक-दूसरे से शांति और सद्भाव के साथ जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे केंद्र व्यक्तिगत आत्मचिंतन के साथ सामाजिक जुड़ाव और सकारात्मक संवाद को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

युवाओं में आंतरिक शक्ति का जागरण जरूरी

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल की जन्मस्थली नडियाद में ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का वर्चुअल रूप से उद्घाटन करके उन्हें प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तो उसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, समुदाय और अंततः पूरे राष्ट्र पर पड़ता है।

युवा सशक्तिकरण राष्ट्र निर्माण का आधार

राष्ट्रपति ने कहा कि ‘आंतरिक शक्ति का जागरण’ केवल व्यक्तिगत विकास का संदेश नहीं है, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक गहरी प्रक्रिया है। उन्होंने जोर दिया कि युवाओं को सशक्त बनाना सभी की जिम्मेदारी है। युवाओं को आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार बनाने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

आत्म-परिवर्तन से समाज परिवर्तन की ओर

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि आत्म-परिवर्तन को समाज परिवर्तन का आधार माना गया है। आज आवश्यकता इस बात की है कि इस महान विरासत को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य ऐसा राष्ट्र बनाना होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध, वैज्ञानिक रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो। 

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