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10 सेकेंड में 64 मिसाइल… 25 KM दूर तक दुश्मनों का खेल खत्म, पाकिस्तान का काल बनेगा छोटकू ‘भार्गवास्त्र’

Bhargavastra Anti Drone System: भारत का स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम भार्गवास्त्र अब सिर्फ ड्रोन मारने वाला हथियार नहीं रहेगा. इसे 2.5, 6 और 25 किलोमीटर की तीन-स्तरीय एयर डिफेंस शील्ड में बदल दिया जाएगा. यह दुनिया का पहला ऐसा सिस्टम है जो 10 सेकेंड में 64 माइक्रो-मिसाइलें दागकर ड्रोन स्वार्म को तबाह कर सकता है. कम लागत और उच्च मारक क्षमता वाला यह सिस्टम भविष्य में भारत की वायु सुरक्षा को नई ऊंचाई देने वाला साबित हो सकता है

जिस तरह इजरायल का आयरन डोम (Iron Dome) उसकी हवाई सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत माना जाता है, उसी तरह भारत भी अब अपने स्वदेशी ‘सुदर्शन चक्र’ की ओर तेजी से बढ़ रहा है. इस महत्वाकांक्षी एयर डिफेंस नेटवर्क की सबसे मजबूत नींव बनने जा रहा है ‘भार्गवास्त्र’, जो आने वाले चार वर्षों में सिर्फ ड्रोन मारने वाला सिस्टम नहीं, बल्कि दुश्मन के हर हवाई खतरे के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा कवच बन जाएगा.

इस छोटकु ब्रह्मास्त्र को बनाने वाली कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) के चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल ने बताया किया कि वर्ष 2030 तक भार्गवास्त्र 2.5 किलोमीटर, 6 किलोमीटर और 25 किलोमीटर की तीन अलग-अलग दूरी पर दुश्मन के ड्रोन और अन्य हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम होगा. उन्होंने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सुदर्शन चक्र’ विजन को साकार करने में यही तकनीक सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी.

क्यों खास है यह सिस्टम?

आज के युद्ध में सबसे बड़ा खतरा महंगी बैलिस्टिक मिसाइलें नहीं, बल्कि सैकड़ों सस्ते ड्रोन हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्षों ने दिखा दिया है कि छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं. ऐसे में हर ड्रोन पर करोड़ों रुपये की मिसाइल दागना व्यावहारिक नहीं है.

यहीं भार्गवास्त्र सबसे बड़ा गेमचेंजर बनकर सामने आता है. यह कम लागत में बड़ी संख्या में आने वाले ड्रोन को रोक सकता है और महंगी एयर डिफेंस मिसाइलों पर निर्भरता घटा सकता है.

दुनिया में पहली बार… 10 सेकेंड में 64 मिसाइलें

भार्गवास्त्र पहले ही दुनिया का ध्यान अपनी अनोखी क्षमता से खींच चुका है. यह दुनिया का पहला स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम है, जो महज 10 सेकेंड में 64 माइक्रो-मिसाइलें दाग सकता है. इसका मकसद एक साथ आने वाले ड्रोन स्वार्म को हवा में ही खत्म करना है. जहां दुनिया के कई सिस्टम सीमित संख्या में इंटरसेप्टर दागते हैं, भार्गवास्त्र एक साथ दर्जनों ड्रोन पर हमला करने की क्षमता रखता है.

2030 तक बनेगा तीन-लेयर सुरक्षा कवच

वहीं SDAL ने पहली बार बताया है कि भार्गवास्त्र को चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा.

पहला सुरक्षा घेरा – 2.5 KM

यह मौजूदा भारतीय सेना की जरूरत के मुताबिक तैयार किया गया है और नजदीक आने वाले ड्रोन को पलभर में मार गिरा सकता है.

दूसरा सुरक्षा घेरा – 6 KM

सिस्टम का इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम (EOTS) पहले ही 6 किलोमीटर तक लक्ष्य को पहचान सकता है. अब इसी दूरी तक मार करने वाली नई इंटरसेप्टर मिसाइल विकसित की जा रही है. इसका रडार इससे भी अधिक दूरी से छोटे हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है.

तीसरा सुरक्षा घेरा – 25 KM

यह भार्गवास्त्र का सबसे बड़ा अपग्रेड होगा. 25 किलोमीटर की दूरी तक पहुंचने के बाद यह सिर्फ ड्रोन ही नहीं, बल्कि बड़े यूएवी, लॉन्ग-रेंज हवाई प्लेटफॉर्म और अन्य उभरते खतरों से भी निपट सकेगा.

‘सुदर्शन चक्र’ की सबसे मजबूत कड़ी

भार्गवास्त्र भविष्य में भारत के बहु-स्तरीय एयर डिफेंस नेटवर्क ‘सुदर्शन चक्र’ का अहम हिस्सा बनेगा. इस नेटवर्क में अलग-अलग दूरी पर काम करने वाले कई स्वदेशी सिस्टम एक साथ मिलकर देश के आसमान की सुरक्षा करेंगे.

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर 2030 तक यह योजना पूरी तरह सफल होती है तो भारत न सिर्फ ड्रोन युद्ध में दुनिया की अग्रणी ताकतों में शामिल होगा, बल्कि स्वदेशी तकनीक के दम पर अपने संवेदनशील सैन्य ठिकानों, शहरों और रणनीतिक परिसंपत्तियों के लिए एक मजबूत हवाई सुरक्षा कवच भी तैयार कर लेगा.

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