मध्यप्रदेश

‘चांदी की 200 ईंटें राम मंदिर निर्माण के लिए दान दी लेकिन कोई रसीद नहीं मिला’, सिंधी समाज ने मांगा हिसाब

भोपाल: आयोध्या राम मंदिर में दिए गए दान में कथित गड़बड़ियों की खबरों का बीच सिंधी समुदाय का एक प्रमुख संगठन सामने आया है। इसके सदस्य भोपाल शहर में भी बड़ी संख्या में हैं। विश्व सिंधी सेवा संगम नाम की संगठन उन 200 चांदी की ईंटों के बारे में जानकारी मांगी है, जिसे 2021 में मंदिर निर्माण के लिए दान की थी। संगठन ने मांग की है कि उसका उपयोग कहां किया गया है।

पांच करोड़ से अधिक है आज की तारीख में कीमत

विश्व सिंधी सेवा संगम ने कहा कि हमने चांदी की ईंटें दान करने के लिए देश और विदेशों में बसे सिंधी समुदाय के लोगों से चंदा एकत्रित किया था। उस समय 200 ईंटें की कीमत करीब डेढ़ करोड़ रुपए थी। आज की तारीख में उसकी कीमत पांच करोड़ रुपए हैं। संगठन ने कहा कि चांदी की ईंटें राम मंदिर के ट्रस्टी चंपत राय को सौंपी गई थीं लेकिन इसके लिए कोई आधिकारिक रसीद नहीं है।

जब हमने समुदाय के सदस्यों के बीच संदेश फैलाया तो बहुत अच्छा रिस्पॉन्स मिला और लगभग 200 किलो चांदी के बारे में योगदान मिला।

राजू मनवानी, अध्यक्ष विश्व सिंधी सेवा संगम

अयोध्या जाकर दी दान

उन्होंने कहा कि हम दिल्ली में चंपत राय से उनके घर पर मिले और बाद में अयोध्या में औपचारिक रूप से सौंपने के लिए तारीख तय की गई। राजू मनवानी ने बताया कि दान समारोह राम मंदिर परिसर के अंदर एक हॉल में हुआ था, जहां विश्व सिंधी सेवा संगम के सदस्यों ने लगभग 200 ईंटें सौंपी।

एक किलो की थी एक ईंट

राजू मनवानी ने कहा कि हर ईंट एक किलो की थी। उस पर हमारे पूजनीय देवता साईं झूलेलाल की तस्वीरें उकेरी गई थी। इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो भी रिकॉर्ड किए गए हैं। मंदिर ट्रस्ट की तरफ से बताया गया था कि चांदी की ईंटों की असलियत और क्वालिटी की जांच की जाएगी। बाद में हमें बताया जाएगा कि उनका इस्तेमाल कहां किया जाएगा। पिछले पांच-छह सालों में, न तो हमें कोई जानकारी मिली और न ही किसी ने हमारी कॉल्स का जवाब दिया।

श्रद्धा के साथ की थी दान

उन्होंने कहा कि हमने दान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ दिया था। इसलिए किसी ने कभी नहीं सोचा था कि इस बात पर सवाल उठेंगे कि हमारी चांदी का सही इस्तेमाल हुआ है।

हमारी चांदी का क्या हुआ

मीडिया में खबरें आने के बाद हम सोचने पर मजबूर हो गए। राजू मनवानी ने कहा कि क्या हमारी चांदी का भी गलत इस्तेमाल हुआ है। हम बस यह जानना चाहते हैं कि उस 200 किलो चांदी का क्या हुआ, जिसकी कीमत उस समय लगभग डेढ़ करोड़ रुपए थी। आज छह से सात करोड़ पहुंच गई। मनवानी ने कहा कि हम यह जानना चाहते हैं कि क्या चांदी को पिघलाकर राम मंदिर में इस्तेमाल किया गया या कहीं और। हम बस यही पूछ रहे हैं।

सच आएगा सामने

उन्होंने एसआईटी जांच को लेकर कहा कि हमें पूरा भरोसा है कि सच सामने आएगा। जो लोग किसी पवित्र संस्थान में बैठकर ऐसी हरकतें करते हैं, वे भक्तों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाते हैं। हमने कभी ऐसी उम्मीद नहीं की थी।

सिंधी समुदाय के सदस्यों की मौजूदगी में चांदी दान की गई थी। चंपत राय और ट्रस्ट के दूसरे अधिकारी भी वहां मौजूद थे। हाल की खबरों को देखे हुए यह जानना जरूरी है कि उन चांदी की ईंटों का इस्तेमाल कहां हुआ है।

विजय पाहुजा, अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष, विश्व सिंधी सेवा संगम

कोई रसीद नहीं मिली

विजय पाहुजा ने बताया कि हमें कहा गया था कि चांदी की ईंटों की असलियत और शुद्धता की जांच के बाद एक ऑफिशियल रसीद दी जाएगी। लेकिन हमें कभी कोई रसीद नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि मुंबई में हमारे संगठन के सदस्य, जो इस पहल को आगे बढ़ा रहे थे, उन्होंने रसीद को लेकर कई बार फोन किया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने कहा कि भोपाल और दूसरी जगहों पर हमसे जुड़े लोग दान का दस्तावेजी सबूत मांगते रहें।

हमारे पास सिर्फ तस्वीरें

उन्होंने कहा कि हमारे पास सिर्फ वो तस्वीरें थीं, जिनसे पता चलता है कि चांदी सौंप दी गई थी। कोई ऑफिशियल जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि इस दान के लिए भारत और विदेशों से लगभग 300 लोगों ने अपनी क्षमता के अनुसार योगदान दिया था।

मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाई जाएंगी ईंटें

भोपाल के रहने वाले वीएसएसएस की यूथ विंग प्रेसिडेंट आनंद सबधानी ने कहा कि उन्होंने मंदिर के अधिकारियों से खास तौर पर यह पूछा कि चांदी की ईंटों का इस्तेमाल कहां किया जाएगा। उन्होंने हमें बताया ता कि चांदी की ईंटों को मंदिर के मुख्य प्रवेस द्वार के ऊपर लगाया जाएगा। लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। हमने मान लिया कि चांदी को पिघलाकर निर्माण कार्य में इस्तेमाल कर लिया गया होगा।

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