मध्यप्रदेश

 मौलाना बरकतउल्लाह ने अफगानिस्तान में भारत की पहली सरकार बनाई थी, जानिए क्यों हट रहा है यूनिवर्सिटी से नाम

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रतिष्ठित बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदल दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्य परिषद की बैठक में इस ऐतिहासिक शिक्षण संस्थान का नाम बदलकर अब आधिकारिक तौर पर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से मुहर लगा दी गई है। लंबे समय से विभिन्न संगठनों द्वारा इस नाम को बदलने की मांग उठ रही थी। कार्य परिषद से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव को राजभवन की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

आखिर कौन थे मौलाना बरकतउल्लाह?

इस विश्वविद्यालय का पुराना नाम देश के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह भोपाली के नाम पर था। 7 जुलाई 1854 को भोपाल में जन्मे मौलाना बरकतउल्लाह एक प्रखर राष्ट्रवादी, महान क्रांतिकारी, विद्वान और निर्भीक पत्रकार थे। वे 8 भाषाओं के जानकार और बेहद प्रभावशाली वक्ता थे। उन्होंने भारत की आजादी के लिए विदेशों में रहकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी थी।

मौलाना बरकतउल्लाह के नाम सबसे बड़ा ऐतिहासिक रिकॉर्ड यह है कि साल 1915 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में जब भारत की पहली अस्थायी (निर्वासित) सरकार का गठन हुआ, तो उन्हें इस सरकार का ‘प्रधानमंत्री’ बनाया गया था।

1988 में मिला था ‘बरकतउल्लाह’ नाम

भोपाल के इस प्रमुख उच्च शिक्षा केंद्र की स्थापना साल 1970 में ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ के रूप में हुई थी। इसके बाद, मौलाना बरकतउल्लाह के देश की आजादी में दिए गए अद्वितीय योगदान को सम्मान देने के लिए साल 1988 में इसका नाम बदलकर ‘बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय’ किया गया था।

1854भोपाल में महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह का जन्म हुआ।
1915काबुल (अफगानिस्तान) में बनी भारत की पहली अस्थायी सरकार में मौलाना बरकतउल्लाह प्रधानमंत्री बने।
1970भोपाल में इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय की स्थापना ‘भोपाल विश्वविद्यालय’ के नाम से हुई।
1988विश्वविद्यालय का नाम बदलकर क्रांतिकारी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम पर रखा गया।
2026 (अब)कार्य परिषद की बैठक में नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ करने का प्रस्ताव पास हुआ।

क्या है नए नाम ‘वाग्देवी भोजपाल’ का मतलब?

विश्वविद्यालय को दिया गया नया नाम ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ इसके ऐतिहासिक और प्राचीन स्वरूप को दर्शाता है। इसमें शामिल ‘वाग्देवी’ शब्द ज्ञान, कला और बुद्धि की देवी मां सरस्वती का प्रतीक है। वहीं ‘भोजपाल’ शब्द भोपाल के प्राचीन इतिहास और राजा भोज के काल से सीधा संबंध जोड़ता है।

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