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बेहतर मुनाफे के लिए वैल्यू चेन में आगे बढ़ रहीं डेयरी कंपनियां

भारत का डेयरी उद्योग अपने पारंपरिक वॉल्यूम इंजन (तरल दूध) से आगे देखना शुरू कर रहा है, क्योंकि कंपनियां पनीर, दही, घी, आइसक्रीम और प्रोटीन आधारित उत्पादों से बेहतर मार्जिनतलाश रही हैं। बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता, शहरीकरण और सुविधा आधारित अर्थव्यवस्था (कन्वीनियंस इकोनॉमी) इस बदलाव को गति दे रहे हैं, जबकि कड़ा मूल्य मुकाबला सादे दूध को अपेक्षाकृत कम मुनाफे वाला व्यवसाय बनाए रखता है। अवसर बिल्कुल सीधा है-उसी दूध को ऐसे उत्पादों में प्रोसैस करना, जो अधिक कीमत दिलाते हैं और जिनकी शैल्फ लाइफ (उपयोग अवधि) लंबी होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि डेयरी कंपनियों के लिए डीपर प्रोसैसिंग सीजनल अतिरिक्त आपूर्ति और खरीद-मूल्य की अस्थिरता के खिलाफ एक सुरक्षा भी प्रदान करती है।

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के सी.ई.ओ. और पूर्णकालिक निदेशक के. रत्नम ने कहा, ‘‘हम 100 प्रतिशत वैल्यू-एडेड कंपनी हैं, बाजार में हमारा कोई तरल दूध नहीं है।’’ पिछले सप्ताह 18 प्रतिशत प्रीमियम पर लिस्ट हुई इस कंपनी ने अपना पोर्टफोलियो पनीर, चीज, ग्रीक योगर्ट और हाई-प्रोटीन उत्पादों के इर्द-गिर्द तैयार किया। हाल ही में इसके 1,553 करोड़ रुपए के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आई.पी.ओ.) के दौरान यह रणनीति पूरी तरह चर्चा में रही। मिल्की मिस्ट की वैल्यू-एडेड रणनीति ने मजबूत वित्तीय प्रदर्शन भी सुनिश्चित किया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 26 में राजस्व में 34 प्रतिशत की साल-दर-साल वृद्धि के साथ 3,138 करोड़ रुपए और शुद्ध लाभ में 175.7 प्रतिशत की छलांग के साथ 127.01 करोड़ रुपए दर्ज किए। रत्नम ने कहा कि समग्र डेयरी उद्योग मूल्य के संदर्भ में लगभग 12-20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा था, जबकि मिल्की मिस्ट 30 प्रतिशत से अधिक की दर से बढ़ रही थी, जिसमें वॉल्यूम वृद्धि लगभग 25-30 प्रतिशत और वैल्यू वृद्धि 30 प्रतिशत से अधिक थी।

अर्थशास्त्र इस आकर्षण को स्पष्ट करता है। तरल दूध एक उच्च-वॉल्यूम और मूल्य-संवेदनशील व्यवसाय है, जबकि चीज, पनीर, व्हे (मट्ठा प्रोटीन) और विशेष डेयरी उत्पाद समान अंतॢनहित मिल्क सॉलिड्स से काफी अधिक मूल्य उत्पन्न कर सकते हैं। पराग मिल्क फूड्स की कार्यकारी निदेशक अक्षली शाह के अनुसार, दूध को प्रोटीन डैरिवेटिव्स में बदलने से लगभग 1.5 से 3 गुना अधिक मूल्य मिल सकता है, जबकि चीज और व्हे से लगभग 25-45 प्रतिशत तक का माॢजन प्राप्त हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘प्रोटीन युक्त, वैल्यू-एडेड उत्पादों की ओर बढऩे से प्रति लीटर दूध पर अधिक मूल्य प्राप्ति सक्षम होकर लाभप्रदता में सुधार होता है। साथ ही, उत्पाद का विभेदन (डिफ्रैंसिएशन) भी अधिक मजबूत होता है।’’

पराग इस विचार पर पूंजी लगा रही है। कंपनी वित्त वर्ष 28 तक अपनी चीज बनाने की क्षमता दोगुनी करके 120 टन प्रतिदिन करने की योजना बना रही है, साथ ही व्हे उत्पादन और अपने अवतार स्पोट्र्स-न्यूट्रिशन व्यवसाय का विस्तार भी कर रही है। अवतार और ‘प्राइड ऑफ काउज’ सहित इसका नया पोर्टफोलियो, वित्त वर्ष 27 की जून तिमाही में 59 प्रतिशत साल-दर-साल बढ़कर 118 करोड़ रुपए हो गया। हैरिटेज फूड्स अधिक पोर्टफोलियो-उन्मुख दृष्टिकोण अपना रही है। डेयरी कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि दूध खरीद, उपभोक्ता पहुंच और वितरण का आधार बना हुआ है, जबकि वैल्यू-एडेड उत्पाद माॢजन का मुख्य जरिया (इंजन) प्रदान करते हैं। यह अंतर सहकारी समितियों और निजी डेयरियों, दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।-कृष्ण भनोट

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