छत्तीसगढ़

नवा रायपुर का श्री सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल बना बच्चों के दिल का सहारा,

रायपुर। राजधानी के नवा रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल बच्चों के जन्मजात हृदय रोगों के निःशुल्क इलाज के लिए देशभर में मिसाल बन गया है। यहां जहां सामान्य अस्पतालों में दिल की सर्जरी का खर्च 3 लाख से 25 लाख तक होता है, वहीं यहां ऑपरेशन, जांच, दवा, रहना-खाना सब कुछ पूरी तरह मुफ्त है। यही वजह है कि इसे “द हॉस्पिटल विद ए हार्ट एंड विदाउट ए कैश काउंटर” कहा जाता है। अस्पताल लगभग 35 एकड़ में फैला है, जहां 200 बेड, 20 से अधिक डॉक्टर और 100 से अधिक नर्सें सेवा दे रही हैं।

इसके साथ ही यहां नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च सेंटर भी संचालित है, जहां लगभग 240 बच्चों को निःशुल्क नर्सिंग की पढ़ाई कराई जा रही है। साथ ही श्री सत्य साईं संजीवनी मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल में गर्भवती माताओं और शिशुओं को भी मुफ्त विशेष स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों और उनके परिजनों ने अपनी कहानी साझा की।अस्पताल प्रबंधक का कहना है कि इस अस्पताल का उद्देश्य ऐसे क्षेत्र में सेवा प्रदान करना है जो भौगोलिक दृष्टि से और बीमारियों के लिहाज से काफी पिछड़ा हुआ हो।’ सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो’ के दिव्य सिद्धांत के तहत, साई संजीवनी ने जन्मजात हृदय रोग के क्षेत्र में देश के एकमात्र अस्पताल के रूप में अपनी यात्रा शुरू की, जो विशेष रूप से बाल हृदय देखभाल प्रदान करता है।

2012 में हुई थी शुरुआत, हर महीने 170 से ज्यादा सर्जरी
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार श्री सत्य साईं संजीवनी की शुरुआत नवंबर 2012 में अटल नगर, नया रायपुर में हुई थी। ‘सभी से प्रेम करो, सभी की सेवा करो’ के सिद्धांत पर चलने वाला यह देश का एकमात्र विशेष बाल हृदय अस्पताल है। यहां प्रतिदिन 100 बच्चों की जांच और हर महीने 150 से 170 से अधिक सर्जरी निःशुल्क की जाती हैं। अब तक देशभर में 45 हजार से ज्यादा सर्जरी और 21 देशों के बच्चों का इलाज हो चुका है।

बिहार से आए परिजन बोले – 20 दिन से रुके हैं, इलाज फ्री मिला
मरीज के परिजन ओम प्रकाश कुमार ने बताया कि वह बिहार के रहने वाले हैं और पिछले 20 दिनों से अस्पताल में रुके हैं। उनके बच्चे का 15 दिन से इलाज चल रहा है और अब डिस्चार्ज की तैयारी है। पूरा इलाज फ्री में हुआ है।

मरीज के पिता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वह भी बिहार से हैं और एक महीने से यहां हैं। अस्पताल में रहना, खाना और रुकने की व्यवस्था बिल्कुल मुफ्त दी गई है। उन्होंने बताया कि हम एक गरीब इंसान है जिस वजह से अन्य अस्पताल में इलाज करना बहुत ही मुश्किल था अब यहां मुक्त इलाज से हमारी आर्थिक स्थिति बाधा नहीं बनेगा। यह पर हमारे बच्चे का इलाज सही ढंग से किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के रणवीर का सपना – बड़ा होकर डॉक्टर बनूंगा
छत्तीसगढ़ के मरीज रणवीर पटेल ने बताया कि वह कई दिनों से अस्पताल में इलाज करा रहा है और बड़ा होकर डॉक्टर बनकर ऐसे ही पीड़ित लोगों का इलाज करेगा। उसके पिता वीरेंद्र पटेल ने कहा कि अस्पताल ने मेरे बच्चे को जीवन लौटाया है और इलाज सही तरीके से किया जा रहा है।

झारखंड के पनिश को पहले गुमराह किया गया
झारखंड के छतरपुर निवासी पनिश कुमार ने बताया कि शुरुआती इलाज में उसे हड्डी में छेद होना बताया गया था और वह दर-दर भटक रहा था। बाद में इस अस्पताल के बारे में पता चला तो यहां इलाज शुरू हुआ। उसके पिता ने बताया कि यहां सर्विस अच्छी है और सब कुछ निःशुल्क है।

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