देश में ‘जिगोलो’ का चिंताजनक ट्रैंड

कुछ दिन पहले फरीदाबाद के एक लड़के से पुरुष प्लेब्वॉय बनाने के लिए साइबर ठगी की घटना सामने आई। वैसे भी सोशल मीडिया की अनेक खबरों के मुताबिक देश में पुरुष वेश्यावृत्ति के काम में वृद्धि देखी जा रही है। भारत में ही इस धंधे में हजारों पुरुष लिप्त हैं, जिन्हें ‘जिगोलो’ कहा जाता है। पिछले साल हुए एक सर्वे के मुताबिक देश की कई मैट्रो सिटीज में ऐसे पुरुषों की संख्या बढ़ी है। एक मीडिया रिपोर्ट में भी ऐसा दावा किया जा चुका है कि कई महानगरों में भी रात को पुरुषों का गोरखधंधा होता है।
‘जिगोलो’ एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर उन पुरुषों के लिए किया जाता है, जो महिलाओं के साथ व्यक्तिगत संबंध बनाने या उनके साथ समय बिताने के लिए पैसे लेते हैं। यह एक विवादास्पद और संवेदनशील विषय है, जो समाज में विभिन्न दृष्टिकोणों और नैतिक मुद्दों को शामिल करता है। सामाजिक सरोकार से जुड़े इस बिन्दू पर बात की जानी ठीक लगती है। इस समय ‘जिगोलो’ की सेवाएं देश के अनेक शहरों में तेजी से बढ़ रही हैं। ‘जिगोलो’ का ट्रैंड दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़ आदि मैट्रो शहरों में स्थित मिडल क्लास नाइट क्लबों में तेजी से बढ़ा है। अब अनेक छोटे शहर भी इससे अप्रभावित नहीं रहे। पैसा कमाने की होड़ में घर से चोरी, डिग्री कॉलेजों के अनेक लड़के इस व्यापार में लिप्त हो रहे हैं। इन लड़कों से सेवाएं लेने वाली महिलाएं भी अमूमन बड़े घरानों की होती हैं।
‘जिगोलो’ का इस्तेमाल कुछ महिलाएं अपनी वासना पूर्ति के लिए करती हैं। ‘जिगोलो’ बने पुरुषों को लगता है कि यह काम उनके लिए अत्यंत सुविधाजनक है। लेकिन जब शोषण के रूप में कड़वी सच्चाई सामने आती है तो पैरों तले जमीन खिसक जाती है। अनेक मीडिया रिपोर्टें बताती हैं कि पुरुष वेश्याओं का समाज में ज्यादा इस्तेमाल महिलाओं द्वारा किया जाता है। खुल कर मनोवैज्ञानिक नजर से बात करें तो कुछ ऊंचे घरों की उम्रदराज महिलाओं और कुछ विधवाओं द्वारा एवं कुछ कामकाजी महिलाएं भी, जिन्हें घर पर अपने पति से सुख नहीं मिलता, वे चोरी छुपे इन ‘जिगोलो’ की सॢवस का इस्तेमाल कर लेती हैं।
लेकिन सबसे जरूरी सवाल यह है कि कमाई के और साधन न खंगालते हुए युवा वर्ग का कुछ हिस्सा इस दलदल भरे काम को क्यों करता है? कथित ‘जिगोलो’ प्रणाली पश्चिमी सभ्यता का हिस्सा है, जिसके कदमों पर चलते हुए कुछ गुमराह युवा इस घिनौने काम को करने लगे हैं, क्योंकि उन्हें इस काम में ज्यादा मेहनत नजर नहीं आती और कमाई अच्छी मिलती है। ‘जिगोलो’ का कार्य भटके हुए लड़कों को तो सही लगता है लेकिन ‘जिगोलो’ इतनी स्त्रियों से संबंध बनाने के बाद अक्सर घातक बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसके आगे उनके लिए सिर्फ पछतावा ही रह जाता है।-डा. वरिन्द्र भाटिया



