किन देशों के लोगों में थैलसीमिया होने का खतरा ज्यादा, इसकी वजह?

थैलसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है जो माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए पहुंचता है. इस बीमारी में शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता जिससे रेड ब्लड सेल्स तेजी से खत्म होने लगते.
World Thalassaemia Day: हर साल 8 मई को वर्ल्ड थैलसीमिया डे मनाया जाता है. वहीं इस बार थैलसीमिया 2026 की थीम Hidden No More: Finding the Undiagnosed, Supporting the Unseen रखी गई है. इसका उद्देश्य उन लाखों लोगों की पहचान करना है, जिन्हें थैलसीमिया है.
दरअसल हमारे शरीर में खून सिर्फ एक तरल पदार्थ नहीं, बल्कि जीवन के सबसे जरूरी प्रणाली का हिस्सा है. शरीर के हर अंग तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम हिमोग्लोबिन करता है, जो लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद होता है. लेकिन जब शरीर पर्याप्त मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बन पाता, तब थैलसीमिया जैसी गंभीर बीमारी जन्म लेती है. यही वजह है कि हर साल 8 मई को विश्व थैलसीमिया डे मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस अनुवांशिक रक्त विकार के प्रति जागरूक किया जा सके और समय रहते जांच और बचाव के महत्व को समझाया जा सके.
आपको बता दें कि थैलसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए पहुंचता है. इस बीमारी में शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिससे रेड ब्लड सेल्स तेजी से खत्म होने लगते हैं और मरीज एनीमिया का शिकार हो जाता है. गंभीर मामलों में मरीज को पूरी जिंदगी नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवाना पड़ता है.
आपको बता दें कि थैलसीमिया एक अनुवांशिक रक्त विकार है, जो माता-पिता से बच्चों में जीन के जरिए पहुंचता है. इस बीमारी में शरीर सामान्य मात्रा में हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिससे रेड ब्लड सेल्स तेजी से खत्म होने लगते हैं और मरीज एनीमिया का शिकार हो जाता है. गंभीर मामलों में मरीज को पूरी जिंदगी नियमित रूप से ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवाना पड़ता है.
वहीं एक्सपर्ट्स के अनुसार थैलसीमिया का खतरा उन क्षेत्रों में ज्यादा देखा जाता है, जहां सदियों पहले मलेरिया का प्रभाव ज्यादा रहा है. यही कारण है कि दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, भूमध्यसागरीय देशों और अफ्रीका के कई हिस्सों में यह बीमारी ज्यादा पाई जाती है.
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, थाईलैंड और अन्य दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में थैलसीमिया के मामले काफी अधिक है. रिपोर्ट बताती है कि भारत में करोड़ों लोग बीटा थैलसीमिया ट्रेट के कैरियर हो सकते हैं. वहीं पाकिस्तान में भी कैरियर रेट काफी ज्यादा माना जाता है.
बांग्लादेश को भी दुनिया के थैलसीमिया बेल्ट का हिस्सा माना जाता है. वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की, जागरूकता की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. ग्रामीण इलाकों में स्थिति और ज्यादा चुनौती पूर्ण बताई जाती है.
वहीं चीन के दक्षिणी हिस्सों में अल्फा और बीटा थैलसीमिया दोनों के मामले ज्यादा पाए जाते हैं. आंकड़ों के अनुसार चीन में लाखों लोग थैलसीमिया ट्रेट के कैरियर है. कई क्षेत्र में हर साल हजारों बच्चे इस बीमारी के साथ जन्म लेते हैं.



